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सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को मधुकम खादगढ़ा में आदिवासी जमीन पर दखल-दिहानी के मामले हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली महादेव उरांव की याचिका पर सुनवाई हुई। जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस मनमोहन की खंडपीठ ने झारखंड हाईकोर्ट के फैसले में हस्तक्षेप करने से इंकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि जमीन के बदले में पैसे लेकर घर खाली कराना कहीं से न्यायसंगत नहीं है। प्रार्थी पर 10 लाख रुपए का जुर्माना लगाया जा सकता है। महादेव की ओर से अपनी याचिका वापस लेने की अनुमति का आग्रह किया गया। वह सबकुछ जो आपके लिए जानना जरूरी है, जमीन वापसी का केस किया, फिर पैसे वसूले महादेव ने खादगढ़ा दुर्गा मंदिर लेन में पूर्वजों द्वारा बेची गई जमीन को वापस लेने के एसएआर कोर्ट में केस किया था। पक्ष में फैसला होने के बाद उसने 12 भवन मालिकों को केस वापस लेने की बात कह हर घर से प्रति कट्ठा 5.25 लाख की दर से 12 परिवारों से 1.08 करोड़ रुपए वसूले थे। झारखंड हाईकोर्ट का आदेश रहेगा लागू सुप्रीम कोर्ट से याचिका खारिज होने के बाद हाईकोर्ट का आदेश प्रभावी रहेगा। अब महादेव को उन लोगों को जुर्माना राशि देना होगा, जिनके घर दखल-दिहानी की कार्रवाई के दौरान तोड़े गए थे। 12 परिवारों को एक-एक लाख रुपए का भुगतान महादेव उरांव को करना होगा। सादा पट्टा पर भूमि बेचने वालों पर लगेगी लगाम सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से रांची में सादा पट्टा बनाकर आदिवासी जमीन बेचने और फिर उनका भयादोहन करने वालों पर लगाम लगेगी। क्योंकि, जिले में 50 हजार से अधिक घर आदिवासी जमीन पर बने हुए हैं। इनमें से 10 हजार से अधिक मामलों में जमीन वापसी का केस विभिन्न न्यायालयों में चल रहा है।
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