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जिले में उर्वरक की कालाबाजारी, निर्धारित दर से अधिक कीमत पर बिक्री और असामान्य मात्रा में उर्वरक बेचने के मामलों पर जिला प्रशासन एवं कृषि विभाग ने कार्रवाई तेज कर दी है। ताजा कार्रवाई में चार उर्वरक विक्रेताओं/प्रतिष्ठा नों के लाइसेंस निलंबित किए गए हैं। इसके साथ ही जिले में अब तक कुल छह उर्वरक दुकानों/प्रतिष्ठानों के लाइसेंस सस्पेंड किए जा चुके हैं। ओडगा लैम्पस लिमिटेड, जलडेगा, सुदामा खाद भंडार, जलडेगा, मनोज बिश्वाल, लरबा, कोलेबिरा तथा हरियाली बीज भंडार, कुरडेग के उर्वरक अनुज्ञप्ति निलंबित किए गए हैं। विभागीय जांच में उर्वरक की निर्धारित दर से अधिक कीमत पर बिक्री सामने आई। कुछ मामलों में किसानों को असामान्य मात्रा में उर्वरक उपलब्ध कराने जैसी अनियमितताएं भी मिलीं। इसके बाद यह कार्रवाई की गई।उर्वरक की बढ़ती मांग के बीच जिला प्रशासन और कृषि विभाग द्वारा दुकानों में उपलब्ध स्टॉक, बिक्री विवरणी और पीओएस मशीन में दर्ज आंकड़ों की निगरानी की जा रही है। इसी क्रम में प्राप्त शिकायतों और विभागीय जांच के आधार पर संबंधित प्रतिष्ठानों की बिक्री एवं स्टॉक से जुड़े अभिलेखों की जांच की गई। जांच के दौरान निर्धारित सरकारी दर से अधिक कीमत पर उर्वरक बेचने की बात सामने आई। कुछ मामलों में असामान्य मात्रा में उर्वरक की बिक्री भी पाई गई। संबंधित अनुज्ञप्तिधारियों से स्पष्टीकरण मांगा गया। उपलब्ध अभिलेखों और तथ्यों के परीक्षण के बाद लाइसेंस निलंबित करने की कार्रवाई की गई।कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि उर्वरक खरीदते समय निर्धारित मूल्य से अधिक राशि की मांग किए जाने पर शिकायत करें। उर्वरक की उपलब्धता के बावजूद बिक्री से इनकार करने पर भी शिकायत करें। किसी अन्य प्रकार की अनियमितता सामने आने पर भी विभाग को सूचना दें। जिला कृषि पदाधिकारी माधुरी टोप्पो ने कहा कि किसानों को निर्धारित मूल्य पर पर्याप्त मात्रा में उर्वरक उपलब्ध कराना प्राथमिकता है। उर्वरक की कालाबाजारी, जमाखोरी, ओवररेटिंग और असामान्य बिक्री के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा।
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