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हावड़ा से 40 कांवरियों का जत्था देवघर पहुंचा. वे कंधे पर 2 क्विंटल वजन की अनोखी कांवड़ लाए. इस कांवड़ को ‘वैकुंठ धाम’ का रूप दिया गया है. इसमें भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की झांकी सजी है. श्रद्धालु अपने पूर्वजों की इस पावन परंपरा को लगातार आगे बढ़ा रहे हैं.
देवघरः सावन का पावन महीना चल रहा है और इस पूरे महीने बाबा बैद्यनाथ की नगरी देवघर में आस्था का अद्भुत नजारा देखने को मिल रहा है. देश के कोने-कोने से श्रद्धालु बाबा बैद्यनाथ के दरबार में जलार्पण करने के लिए पहुंच रहे हैं. कोई अपने कंधे पर कांवड़ उठाकर सुल्तानगंज से देवघर तक करीब 105 किलोमीटर की पैदल यात्रा कर रहा है, तो कोई रास्ते भर दंड देते हुए बाबा धाम पहुंच रहा है.
वहीं, कई कांवरियों की टोली अपनी अनोखी और आकर्षक कांवड़ के साथ यात्रा कर रही है, जो रास्ते में लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बन रही है.इसी कड़ी में हावड़ा से आए कांवरियों का एक विशेष जत्था इन दिनों देवघर में चर्चा का विषय बना हुआ है. इस जत्थे की कांवड़ कोई साधारण कांवड़ नहीं, बल्कि भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की झांकी से सजा हुआ ‘वैकुंठ धाम’ स्वरूप कांवड़ है.
हावड़ा से 40 कांवरियों का जत्था पहुंचा बाबाधाम
हावड़ा से करीब 40 कांवरियों का जत्था इस विशेष कांवड़ को लेकर बाबा बैद्यनाथ धाम पहुंचा. कांवड़ को बहुत ही आकर्षक तरीके से सजाया गया है. इसमें भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की झांकी बनाई गई है, जिसे देखकर रास्ते में चल रहे श्रद्धालु भी कुछ देर के लिए रुक जाते हैं. कांवड़ के साथ चल रहे कांवरियों में भी अलग ही उत्साह देखने को मिला. पूरी यात्रा के दौरान बोल बम और हर-हर महादेव के जयकारों के बीच यह जत्था आगे बढ़ता रहा. करीब दो क्विंटल वजन वाली इस कांवड़ को लेकर 40 कांवरियों की टोली ने सावन के महीने में बाबा धाम तक पहुंचने का संकल्प लिया था और आखिरकार तीन दिन की यात्रा के बाद यह जत्था देवघर पहुंच गया.
कांवरियों ने क्या कहा?
जत्थे में शामिल हावड़ा निवासी राजन चौधरी बताते हैं कि इस तरह की आकर्षक कांवड़ लेकर बाबा धाम आने की परंपरा उनके परिवार में नई नहीं है.उनके पूर्वज भी इसी तरह विशेष और आकर्षक कांवड़ बनाकर बाबा बैद्यनाथ के दरबार में जल चढ़ाने के लिए आया करते थे.पूर्वजों की उसी परंपरा को आज भी परिवार के लोग आगे बढ़ा रहे हैं. राजन चौधरी का कहना है कि उनके लिए यह सिर्फ कांवड़ यात्रा नहीं है, बल्कि अपने पूर्वजों की परंपरा और बाबा भोलेनाथ के प्रति आस्था को आगे बढ़ाने का माध्यम है.हर साल कांवड़ को अलग तरीके से सजाने और कुछ नया करने की कोशिश की जाती है, ताकि यात्रा के साथ-साथ बाबा के प्रति उनकी भक्ति भी नजर आए.
इस बार वैकुंठ धाम का दिया गया स्वरुप
राजन चौधरी ने बताया कि इस बार उनकी टोली में कुल 40 लोग शामिल हैं और कांवड़ का वजन करीब दो क्विंटल के आसपास है.इतनी भारी कांवड़ को संभालना आसान नहीं है, लेकिन सभी कांवरियों में बाबा के प्रति इतनी श्रद्धा है कि रास्ते की थकान का एहसास ही नहीं होता.तीन दिन पहले इस यात्रा की शुरुआत की गई थी और लगातार यात्रा करते हुए जत्था बाबा बैद्यनाथ धाम पहुंचा है. कांवड़ में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की झांकी को ‘वैकुंठ धाम’ का स्वरूप दिया गया है.उनका कहना है कि बाबा भोलेनाथ की नगरी में पहुंचने के बाद सारी मेहनत सफल लगती है और मन को अलग ही शांति मिलती है.
भक्ति के साथ परंपार का निर्वहन
सावन में देवघर आने वाले कांवरियों के लिए यह यात्रा सिर्फ 105 किलोमीटर की दूरी तय करना नहीं है, बल्कि यह आस्था, विश्वास और संकल्प की यात्रा है. कोई पैदल चलकर बाबा के दरबार में पहुंचता है तो कोई कठिन नियमों का पालन करते हुए यात्रा पूरी करता है.हावड़ा से आए इस जत्थे की खासियत यह है कि इन्होंने अपनी भक्ति के साथ अपनी पारिवारिक परंपरा और रचनात्मकता को भी कांवड़ में शामिल किया है. भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की झांकी वाला यह ‘वैकुंठ धाम’ स्वरूप कांवड़ श्रद्धालुओं के बीच आकर्षण का केंद्र बनी हुई है. बाबा बैद्यनाथ की नगरी में हर दिन ऐसी कई अनोखी कांवड़ देखने को मिल रही हैं, जो सावन की भक्ति और कांवरियों की श्रद्धा की अलग-अलग तस्वीर पेश कर रही हैं.
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प्रसून सिंह को मीडिया में 7 साल काम करने का अनुभव है. खबरों को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर रोचक अंजाद में पेश करना खासियत है. दैनिक भास्कर अखबार में इंटर्नशिप के साथ करियर की शुरुआत हुई.
इसके बाद ETV Bharat (बिहार)…
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