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झारखंड के जंगलों में ग्रीन पिट वाइपर का खतरा बढ़ गया है. मानसून में यह जहरीला सांप पेड़ों और झाड़ियों में छिपा रहता है. इसका जहर खून और ऊतकों को नुकसान पहुंचाता है. सांप के काटने पर झाड़-फूंक से बचें. मरीज को तुरंत अस्पताल ले जाएं और एंटीवेनम लगवाएं.
पलामूः एक ओर मानसून का मौसम आते ही झारखंड के जंगलों की खूबसूरती बढ़ जाती है. तो वहीं खेतों, झाड़ियों और घरों के आसपास सांपों की गतिविधियां बढ़ जाती हैं. बारिश के दौरान सांप अपने छिपने के स्थानों से बाहर निकलते मानसून में झारखंड के जहरीले सांपों में एक है ग्रीन पिट वाइपर, पेड़ो और झाड़ियों में खड़ी रहती है मौतहैं और इसी दौरान ग्रामीण इलाकों में सांप के काटने की घटनाएं भी सामने आती हैं. खेतों में काम करने वाले किसान, मजदूर और जंगल पर निर्भर समुदाय इनके संपर्क में सबसे अधिक आते हैं. ऐसे में सांपों की पहचान और उनके काटने पर तुरंत इलाज बेहद जरूरी हो जाता है.
क्या कहते हैं वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट
पलामू जिले के रहने वाले वाइल्ड लाइफ के जानकर डॉ. डी एस श्रीवास्तव ने बताया कि झारखंड में पाए जाने वाले जहरीले सांपों में रसेल्स वाइपर, जिसे कई इलाकों में स्थानीय तौर पर ‘बहिरा’ भी कहा जाता है, बेहद खतरनाक माना जाता है. इसका वैज्ञानिक नाम Daboia russelii है और यह भारत के प्रमुख जहरीले सांपों में शामिल है. इसका सिर त्रिकोणीय और शरीर पर खास पैटर्न होता है, जिसकी वजह से यह आसानी से पहचाना जा सकता है. यह जमीन पर रहने वाला सांप है और खेत, सूखे पत्तों, झाड़ियों तथा जंगल के आसपास पाया जा सकता है. जो सबसे खतरनाक सांप है.
उन्होंने कहा कि रसेल्स वाइपर के जहर का असर मुख्य रूप से रक्त के जमने की प्रक्रिया और रक्तसंचार तंत्र पर पड़ता है. इसके जहर से शरीर में गंभीर कोएगुलोपैथी यानी रक्त के थक्के बनने की प्रक्रिया में गड़बड़ी हो सकती है. इसके अलावा रक्तस्राव, ऊतक क्षति और किडनी पर गंभीर असर जैसी जटिलताएं भी हो सकती हैं. इसलिए इसे केवल सांप के काटने का स्थानीय घाव समझकर नजरअंदाज करना बेहद खतरनाक हो सकता है.
सांप के काटने पर दिखेगा यह लक्षण
उन्होंने कहा कि इस सांप के काटने पर काटे गए स्थान पर तेज दर्द और तेजी से बढ़ती सूजन दिखाई दे सकती है. दांतों के निशान भी दिख सकते हैं और गंभीर स्थिति में मसूड़ों, घाव या पेशाब से रक्तस्राव हो सकता है. हालांकि हर मरीज में सभी लक्षण एक जैसे हों, यह जरूरी नहीं है.
उन्होंने यह भी बताया कि झारखंड के जंगलों में एक अन्य महत्वपूर्ण समूह ग्रीन पिट वाइपर का भी है. महुआडांड़ क्षेत्र में ग्रीन पिट वाइपर की मौजूदगी दर्ज है. यह पेड़ों और झाड़ियों पर रहने वाला सांप है और अपने हरे रंग तथा त्रिकोणीय सिर के कारण अलग पहचान रखता है. ये सांप भी वाइपर समूह का है. जिसके काटने से आपकी मौत भी हो सकती है.
सांप काटने पर झाड़-फूंक से बचें
उन्होंने कहा कि ग्रीन पिट वाइपर का भी जहर मुख्य रूप से हेमोटॉक्सिक होता है जो रक्त और ऊतकों को प्रभावित करता है. उन्होंने कहा कि इससे आदिवासी समुदाय और जंगलों में रहने वाले लोग बेहद अधिक प्रभावित होती है. इसीलिए सांप काटने की स्थिति में सबसे जरूरी है कि मरीज को तुरंत नजदीकी अस्पताल पहुंचाया जाए. झाड़-फूंक, जहर चूसने, घाव काटने या कसकर रस्सी बांधने जैसे घरेलू उपायों से बचना चाहिए. अस्पताल में चिकित्सक जरूरत के अनुसार एंटी-स्नेक वेनम यानी एंटीवेनम और अन्य जरूरी है.
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प्रसून सिंह को मीडिया में 7 साल काम करने का अनुभव है. खबरों को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर रोचक अंजाद में पेश करना खासियत है. दैनिक भास्कर अखबार में इंटर्नशिप के साथ करियर की शुरुआत हुई.
इसके बाद ETV Bharat (बिहार)…
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