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Palamu News: पलामू जिले के चियांकी पहाड़ पर करीब 500 फीट ऊंची गुफा में प्राचीन शिवलिंग विराजमान हैं. सावन के महीने में यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पूजा-अर्चना करने आते हैं. यह जगह पूजा स्थल होने के साथ-साथ प्राकृतिक सुंदरता से भरपूर भी है.
पलामू. सावन के पावन महीने में भगवान भोलेनाथ की पूजा की जाती है. श्रद्धालु पूरे भक्ति और भाव के साथ पूजा-अर्चना करते हैं. ऐसे में पलामू जिले में स्थित चियांकी पहाड़ शिवभक्तों के लिए आस्था और प्राकृतिक सुंदरता का अनोखा संगम है. करीब 500 फीट ऊंचे इस पहाड़ पर गुफा के अंदर प्राचीन शिवलिंग विराजमान हैं. सावन के महीने में यहां रोजाना बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचकर भगवान भोलेनाथ की पूजा-अर्चना और दर्शन कर रहे हैं. पहाड़ की चोटी से मेदिनीनगर शहर का मनोरम नजारा भी श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है.
पूजा करने के साथ ही दिखता है मनोरम नजारा
दरअसल, पलामू जिला मुख्यालय मेदिनीनगर से 5 किलोमीटर दूर चियांकी पहाड़ है, जहां की ऐतिहासिक और धार्मिक मान्यता भी है. पूजा करने आई आकृति तिवारी ने बताया कि वह सावन के अवसर पर पूजा-अर्चना के लिए चियांकी पहाड़ पहुंची हैं. उन्होंने कहा कि यहां भगवान शिव के दर्शन के साथ शहर का बेहद खूबसूरत और मनोरम नजारा देखने को मिलता है.
वहीं, पहली बार पहुंचे अविनाश कुमार ने बताया कि चियांकी पहाड़ आने के बाद उन्हें काफी अच्छा लगा. यह जगह बेहद शांत और सुकून देने वाली है. वहीं, पलक तिवारी ने कहा कि यहां आने से मन को शांति और सुकून मिलता है. गुफा में भगवान भोलेनाथ के विराजमान होने की जानकारी मिलने के बाद वह उनके दर्शन के लिए पहुंचीं.
सैकड़ों साल पुरानी है आस्था
मंदिर के पुजारी दीपक कुमार तिवारी ने लोकल18 को बताया कि यहां की धार्मिक मान्यता और शिव पूजा की परंपरा सैकड़ों साल पुरानी है. गुफा के अंदर शिवलिंग के अलावा पहाड़ के नीचे मंदिर का निर्माण भी कराया गया है. मंदिर में भगवान शिव-पार्वती, राधा-कृष्ण और हनुमान जी की प्रतिमाएं स्थापित हैं. स्थानीय निवासी कृष्ण वल्लभ तिवारी ने 15 फरवरी 2017 को इस मंदिर का निर्माण कराया था.
पुजारी ने आगे बताया कि 1960 के दशक में चियांकी पहाड़ का इलाका काफी सुनसान हुआ करता था. उस समय यहां बाघों की मौजूदगी बताई जाती थी. पहाड़ की गुफा में बाघों के रहने के कारण लोग ऊपर जाने से डरते थे. आज भी पहाड़ पर बंदर और लंगूर अपना बसेरा बनाए हुए हैं.
योगीराज बाबा से जुड़ी है मान्यता
पुजारी ने आगे बताया कि चियांकी गांव के मालिक बाबा योगीराज को लेकर भी स्थानीय लोगों में गहरी आस्था है. मान्यता है कि पहले बाबा योगीराज पहाड़ के ऊपर विराजमान थे और शिवशरण बैगा उनकी पूजा करते थे. उम्र बढ़ने के बाद शिवशरण बैगा ने पहाड़ पर चढ़कर पूजा करने में असमर्थता जताते हुए बाबा से नीचे आने की प्रार्थना की. इसके बाद बाबा योगीराज का स्थान पहाड़ के नीचे माना गया, जहां आज भी शिला के रूप में उनकी पूजा की जाती है.
सावन में बना आकर्षण का केंद्र
पुजारी ने बताया कि पहले चियांकी पहाड़ पर चढ़ना काफी मुश्किल था, लेकिन अब विकास कार्यों के बाद श्रद्धालुओं के लिए रास्ता काफी सुगम हो गया है. पर्यटन विभाग की ओर से स्थल के सौंदर्यीकरण और सुविधाओं के विकास का काम भी किया जा रहा है. लोकल18 के माध्यम से चियांकी पहाड़ की जानकारी लोगों तक पहुंचने के बाद यहां दूर-दराज से भी श्रद्धालु आने लगे हैं. अब सावन में यह स्थल शिवभक्तों के साथ पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बनता जा रहा है.
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Raina Shukla is an experienced journalist and content professional with nearly two decades of experience in print and digital media. She holds a Master’s degree in Mass Communication and Journalism from Bundelk…
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