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छात्रों को CID पर भरोसा क्यों नहीं, CBI जांच पर ही क्यों...


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JSSC CGL Protest: रांची में JSSC CGL परीक्षा को लेकर लंबे समय से आंदोलन कर रहे छात्रों और सरकार के बीच बातचीत का रास्ता खुलता दिख रहा है. सरकार की ओर से टेबल टॉक के निमंत्रण को छात्रों ने स्वीकार कर लिया है. हालांकि, वार्ता से पहले सबसे बड़ा पेंच CBI जांच को लेकर है. छात्रों का कहना है कि उन्हें CID और SIT की जांच पर भरोसा नहीं है. सवाल यह कि आखिर क्यों?

JSSC CGL विवाद में CID पर भरोसा क्यों नहीं, आखिर CBI जांच पर क्यों अड़े छात्र?Zoom

ID जांच पर छात्रों को भरोसा नहीं, CBI जांच की मांग क्यों?

रांची. झारखंड में JSSC CGL परीक्षा 21 और 22 सितंबर 2024 को हुई थी. लेकिन इसमें गड़बड़ियों की बातें सामने आईं तो मामले की जांच में 28 अभ्यर्थियों के नेपाल के बीरगंज जाने की बात भी पता लगी. खास बात यह कि इसको लेकर हाईकोर्ट में पेश SIT रिपोर्ट में बताया गया था कि 28 अभ्यर्थियों में से 10 अभ्यर्थी परीक्षा में सफल हुए और जांच में यह भी सामने आया कि कुछ अभ्यर्थियों से पैसे लिए गए थे. जांच में यह तथ्य भी उभरकर सामने आए कि इन्हें परीक्षा के सवाल-जवाब याद कराने की बात सामने आई थी. पेंच यहीं पर फंसा हुआ है और छात्रों का आरोप है कि जांच में सामने आए कई गंभीर तथ्यों को उस तरह नहीं रखा गया, जिस तरह छात्रों के पास मौजूद दस्तावेज और जांच रिकॉर्ड में दिखाई देते हैं. यही वजह है कि छात्र अब पूरे मामले की CBI जांच की मांग पर अड़े हैं.

सवाल-जवाब रटाने की बात जांच में आई

दरअसल, हाईकोर्ट के रिकॉर्ड के मुताबिक, CID ने अपने जवाब में बताया था कि 28 अभ्यर्थियों के नाम आरोपियों के मोबाइल फोन में मिले थे. 15 अभ्यर्थियों के मोबाइल की लोकेशन बीरगंज, रक्सौल और मोतिहारी क्षेत्र में पाई गई. जांच में यह भी कहा गया कि अभ्यर्थियों को मूल प्रश्नपत्र नहीं दिया गया, बल्कि पांच-छह हस्तलिखित पन्नों पर लिखे सवाल-जवाब याद करने के लिए दिए गए थे. यहीं से छात्रों का सबसे बड़ा सवाल शुरू होता है. उनका कहना है कि अगर परीक्षा से पहले अभ्यर्थियों को परीक्षा में आने वाले सवालों के जवाब उपलब्ध कराए गए और उन्हें याद कराया गया, तो इसकी पूरी सच्चाई सामने आनी चाहिए. छात्रों को आशंका है कि राज्य की एजेंसी की जांच इस पूरे नेटवर्क की जड़ तक नहीं पहुंच रही.

135 या 120 जवाब सही होने का दावा कितना सही?

छात्रों की ओर से दावा किया जा रहा है कि नेपाल में अभ्यर्थियों को बड़ी संख्या में उत्तर रटाए गए और इनमें से बड़ी संख्या में उत्तर परीक्षा में सही निकले. लेकिन उपलब्ध न्यायिक रिकॉर्ड इस दावे के अलग आंकड़े पेश करता है. SIT रिपोर्ट के अनुसार, चार गवाहों के मोबाइल स्क्रीनशॉट से General Studies के कुल 187 उत्तर मिले. इनमें कई उत्तर दोहराए गए थे और 123 अलग-अलग उत्तर निकले. Set-A के प्रश्नपत्र से मिलान करने पर 66 उत्तर मैच हुए. हाईकोर्ट ने इसे लगभग 53 प्रतिशत मिलान बताया.

फिर छात्रों का भरोसा क्यों टूटा?

छात्रों का कहना है कि जांच में 28 अभ्यर्थियों का नेपाल जाना, पैसे का लेनदेन और सवाल-जवाब याद कराने जैसी बातें सामने आने के बावजूद इसे संगठित पेपर लीक के तौर पर स्थापित नहीं किया गया. दूसरी तरफ SIT ने कहा कि मूल 150 प्रश्नों वाला पूरा प्रश्नपत्र किसी मोबाइल या इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस में नहीं मिला. इसी आधार पर कोर्ट ने संगठित तरीके से प्रश्नपत्र लीक होने की पुष्टि नहीं मानी. कुछ ऐसे तथ्य उभरकर सामने आए जिससे संदेह गहरे होते गए हैं.

सवाल उठाते ये तथ्य भी जानिए, 28 अभ्यर्थियों के नेपाल जाने का मामला

  • 28 अभ्यर्थियों के नेपाल के बीरगंज जाने की बात जांच रिकॉर्ड में सामने आई, इनमें से 10 अभ्यर्थी परीक्षा में सफल हुए.
  • 15 अभ्यर्थियों की मोबाइल लोकेशन बीरगंज, रक्सौल और मोतिहारी में मिली.
  • अभ्यर्थियों को हस्तलिखित पन्नों पर सवाल-जवाब याद कराने की बात जांच रिकॉर्ड में दर्ज है.
  • 187 उत्तरों में से 123 अलग-अलग उत्तर पाए गए, इनमें 66 उत्तर Set-A के प्रश्नों से मैच हुए.
  • मूल 150 प्रश्नों वाला पूरा प्रश्नपत्र किसी मोबाइल या इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस से बरामद नहीं हुआ.
  • हाईकोर्ट ने कहा कि संगठित तरीके से प्रश्नपत्र लीक होने का प्रमाण नहीं मिला.
  • 10 सफल अभ्यर्थियों का चयन जांच के अंतिम परिणाम के अधीन रखा गया था.
  • यही विरोधाभास छात्रों के आंदोलन का मुख्य आधार बन गया है.
  • छात्रों का सवाल है कि अगर परीक्षा से पहले सवाल-जवाब उपलब्ध कराने और अभ्यर्थियों को नेपाल ले जाकर उन्हें याद कराने के पर्याप्त संकेत मिले हैं, तो इसके पीछे पूरा नेटवर्क कौन था, पैसा किसने लिया और कितने अभ्यर्थियों को इसका फायदा मिला, इसकी स्वतंत्र जांच क्यों नहीं होनी चाहिए.

सीबीआई जांच की मांग इसलिए

छात्रों का सवाल है कि अगर परीक्षा से पहले सवाल-जवाब उपलब्ध कराने और अभ्यर्थियों को नेपाल ले जाकर उन्हें याद कराने के पर्याप्त संकेत मिले हैं, तो इसके पीछे पूरा नेटवर्क कौन था? पैसा किसने लिया और कितने अभ्यर्थियों को इसका फायदा मिला? इसकी स्वतंत्र जांच क्यों नहीं होनी चाहिए?

सरकार और छात्रों के बीच अब बातचीत

ऐसे में JSSC CGL को लेकर आंदोलन कर रहे अभ्यर्थियों ने परीक्षा रद्द करने और CBI जांच की मांग की है. सरकार ने छात्रों को बातचीत के लिए आमंत्रित किया है और छात्रों ने टेबल टॉक स्वीकार कर लिया है. प्रस्तावित बातचीत में छात्र अपने कानूनी सलाहकारों के साथ शामिल होने की बात कह रहे हैं. हालांकि, परीक्षा रद्द करने और CBI जांच का मुद्दा अभी भी सबसे बड़ा विवाद बना हुआ है. बता दें कि दिसंबर 2025 में झारखंड हाईकोर्ट ने JSSC को परिणाम जारी करने का निर्देश दिया था और SIT को जांच जारी रखने तथा छह महीने में जांच पूरी करने को कहा था. नेपाल गए 28 अभ्यर्थियों में सफल हुए 10 अभ्यर्थियों का परिणाम जांच के अंतिम नतीजे के अधीन रखा गया था.

असली सवाल अब भी वही

बहरहाल, JSSC CGL विवाद में अब छात्रों की मांग सिर्फ परीक्षा की गड़बड़ी तक सीमित नहीं है. वे यह जानना चाहते हैं कि अभ्यर्थियों को परीक्षा से पहले सवाल-जवाब उपलब्ध कराने का पूरा नेटवर्क क्या था? पैसे का लेनदेन कितना हुआ? कितने अभ्यर्थियों को इसका लाभ मिला और इस नेटवर्क में कौन-कौन लोग शामिल थे? दरअसल, यही वे सवाल हैं जिनके जवाब छात्र CBI जैसी केंद्रीय एजेंसी से चाहते हैं. सरकार और छात्रों के बीच होने वाली बातचीत में अब देखना होगा कि क्या इन सवालों पर कोई सर्वमान्य रास्ता निकलता है या CBI जांच को लेकर गतिरोध आगे भी जारी रहता है.

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Vijay jha

पत्रकारिता क्षेत्र में 22 वर्षों से कार्यरत. प्रिंट, इलेट्रॉनिक एवं डिजिटल मीडिया में महत्वपूर्ण दायित्वों का निर्वहन. नेटवर्क 18, ईटीवी, मौर्य टीवी, फोकस टीवी, न्यूज वर्ल्ड इंडिया, हमार टीवी, ब्लूक्राफ्ट डिजिट…

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