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Hanuman Coin Scam Odisha ओडिशा के बलांगीर में अलौकिक हनुमान सिक्के का झांसा देकर 62 वर्षीय कारोबारी नरेंद्र साहू का अपहरण कर लिया गया. बदमाशों ने गनपॉइंट पर पीड़ित से फर्जी हमले का वीडियो बनवाया और 10 करोड़ की रंगदारी मांगी. इस खौफनाक साजिश में एक महिला सब-इंस्पेक्टर और एक पत्रकार भी शामिल थे, जिन्होंने पीड़ित को थाने के भीतर झूठे केस में फंसाने की धमकी दी. फिलहाल पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है.
पुलिस मामले की जांच कर रही है.
ओडिशा के बलांगीर में करोड़ों रुपये मूल्य के दुर्लभ हनुमान सिक्के को लेकर हुए विवाद ने एक ऐसा खौफनाक मोड़ लिया जिसने पुलिस महकमे और मीडिया तंत्र के गठजोड़ पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. तांबे या पीतल के प्राचीन और अलौकिक सिक्कों का फर्जी चक्रव्यूह रचा गया, जिसमे 62 वर्षीय कारोबारी फंस गए. उनके अपहरण, पिस्टल की नोक पर प्रताड़ना, फर्जी वीडियो शूटिंग और पुलिस स्टेशन के भीतर रची गई इस हाई-प्रोफाइल साजिश के भंडाफोड़ के बाद पुलिस ने एक महिला सब-इंस्पेक्टर और एक पत्रकार समेत मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है.
हनुमान सिक्के का वो छलावा
मामले की शुरुआत पश्चिमी ओडिशा में फैले हनुमान पैसा रैकेट से हुई. पुलिस के मुताबिक ऐसे रैकेट तांबे या पीतल के उन प्राचीन सिक्कों का फर्जी चक्रव्यूह रचते हैं जिन पर भगवान हनुमान की छवि बनी होती है. अंधविश्वास का फायदा उठाकर दावा किया जाता है कि ये सिक्के अलौकिक शक्तियों से लैस हैं और अंतरराष्ट्रीय बाजार में इनकी कीमत करोड़ों में है.
इसी चमत्कार के फेर में 14 अगस्त को बलांगीर के कारोबारी नरेंद्र साहू उर्फ गुंडा साहू का अपहरण हुआ. मुख्य आरोपी क्षितिश चंद्र साहू (50) और उसके साथियों ने नरेंद्र को रंदा चौक बुलाया, वहां से बंदूक की नोक पर अगवा कर भुवनेश्वर ले गए और होटल में बंधक बनाकर रखा. हालांकि, पुलिस की मुस्तैदी से अगले ही दिन कारोबारी को भुवनेश्वर से सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया गया.
बंदूक की नोक पर स्टेज्ड वीडियो
उत्तरी रेंज के आईजी हिमांशु कुमार लाल के अनुसार, आरोपी क्षितिश का दावा था कि उसने 2020 में दुर्लभ सिक्के के एवज में नरेंद्र को 2.7 करोड़ दिए थे जो न सिक्के दे रहा था और न पैसे. हालांकि, पुलिस को इस लेन-देन का कोई वित्तीय सबूत नहीं मिला.
बलांगीर के एसपी अभिलाष जी. ने बताया कि भुवनेश्वर में कैद में रहने के दौरान नरेंद्र को पिस्तौल दिखाकर डराया गया और घर पर फोन कराकर सुरक्षित होने का झूठ बोलने पर मजबूर किया गया. इसके बाद पुलिस को क्षितिश के मोबाइल से 12 खौफनाक वीडियो मिले. वीडियो में पीड़ित कारोबारी को बिना कारतूस वाली पिस्टल थमाकर ऐसा नाटक करवाया गया जैसे उसने क्षितिश पर हमला किया हो. उसे माफी मांगने और पैसे लौटाने के लिए मजबूर किया गया ताकि झूठे सबूत गढ़े जा सकें.
सब-इंस्पेक्टर बहन और पत्रकार की भूमिका
साजिश यहीं खत्म नहीं हुई. आरोपी क्षितिश ने इस फर्जीवाड़े में भुवनेश्वर के खंडगिरी पुलिस स्टेशन में तैनात अपनी सब-इंस्पेक्टर बहन और एक स्थानीय पत्रकार संजय जेना को शामिल किया. CCTV फुटेज से खुलासा हुआ कि पत्रकार जेना ने खुद को पुलिस अधिकारी बताकर नरेंद्र को खंडगिरी थाने पहुंचाया और उसके खिलाफ हमले की झूठी शिकायत दर्ज कराई.
वहीं, SI स्नेहमंजरी साहू पर आरोप है कि उसने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए पीड़ित कारोबारी को फर्जी केस में फंसाने की धमकी दी. पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने कारोबारी पर 50 लाख से लेकर 10 करोड़ तक ऐंठने के लिए यह पूरी योजना रची थी. पुलिस ने बीएनएस (BNS) और आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज कर जांच तेज कर दी है. डिजिटल फॉरेंसिक जांच में आरोपियों के बीच लगातार हुई बातचीत की पुष्टि हुई है.
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पत्रकारिता में 16 वर्षों से अधिक का सुदीर्घ अनुभव रखने वाले संदीप गुप्ता वर्तमान में News18 इंडिया में बतौर चीफ सब-एडिटर होम पेज पर जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. जटिल और सामरिक विषयों को बेहद सरल भाषा में पाठकों त…
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