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Why CBI Investigation Demand Not Accepted: झारखंड सरकार ने जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा और टीडीपीएल द्वारा आयोजित सभी परीक्षाएं रद्द कर दी हैं. इसके साथ ही सीएम हेमंत सोरेन ने परीक्षा सुधार समिति की घोषणा की है. लेकिन, सरकार ने सीबीआई जांच की छात्रों की मांग नहीं मानी. ऐसा क्यों. इस कहानी में हम इसके पीछे की कहानी बताते हैं.
रांची आंदोलन के चेहरा रहे देवेंद्र नाथ महतो का अस्पताल में इलाज चल रहा है. फोटो- पीटीआई
Why CBI Investigation Demand Not Accepted: भर्ती परीक्षाओं में अनियमितता के खिलाफ छात्रों का आंदोलन खत्म कराने के लिए झारखंड सरकार ने कई बड़े फैसले लिए हैं. छात्रों के विरोध प्रदर्शन और अनशन पर बैठने के बीच मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सोमवार देर रात जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा और 2014 से आउटसोर्स एजेंसी टीडीपीएल द्वारा आयोजित सभी परीक्षाओं को रद्द करने की घोषणा की. यह फैसला सोरेन की अध्यक्षता में राज्य मंत्रिमंडल की एक बैठक में लिया गया. सोरेन ने मंत्रिमंडल की बैठक के बाद कहा कि सरकार ने झारखंड कर्मचारी चयन आयोग-संयुक्त स्नातक स्तर (जेएसएससी-सीजीएल) परीक्षा रद्द करने का फैसला किया है, जो प्रदर्शन कर रहे छात्रों की मुख्य मांगों में से एक थी. हमने आउटसोर्स एजेंसी टीडीपीएल (टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड) द्वारा आयोजित सभी परीक्षाओं और उसके द्वारा जारी नतीजों को भी रद्द करने का फैसला किया है.
उन्होंने भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के वरिष्ठ अधिकारी अमिताभ कौशल की अध्यक्षता में एक परीक्षा सुधार समिति के गठन की भी घोषणा की. लेकिन, सरकार ने इन मामलों की जांच सीबीआई से कराने के छात्रों की सबसे बड़ी मांग को मानने से इनकार कर दिया है. आंदोलन कर रहे छात्र सीबीआई से जांच कराने और जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा रद्द करने की मांग कर रहे थे. छात्रों का आंदोलन सोमवार को 24वें दिन भी जारी था. लेकिन, सबसे बड़ा सवाल यह है कि इतने लंबे आंदोलन के बावजूद हेमंत सोरेन सरकार ने सीबीआई जांच की मांग क्यों नहीं मानी. क्या आंदोलन कर रहे छात्र अब बिना सीबीआई जांच के आंदोलन खत्म करने पर सहमत हो गए हैं. इन चीजों से पर्दा मंगलवार को साफ हो सकती है.
सीबीआई जांच कराने का अधिकार है क्या नहीं
इस पूरे मामले में कानूनी स्थिति को समझना जरूरी है. राज्य सरकार यह कहकर पूरी तरह पल्ला नहीं झाड़ सकती कि उसके पास सीबीआई जांच कराने का अधिकार नहीं है. सीबीआई दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना अधिनियम यानी डीएसपीई एक्ट के तहत काम करती है. इसकी धारा 6 के मुताबिक किसी राज्य में सीबीआई को जांच करने के लिए राज्य की सहमति जरूरी होती है. राज्य सरकार किसी खास मामले में सीबीआई जांच की सिफारिश कर सकती है. इसका मतलब साफ है. झारखंड सरकार के पास सीबीआई जांच की सिफारिश करने का कानूनी रास्ता मौजूद है. इसलिए यहां असली सवाल अधिकार का कम और सरकार की इच्छा का ज्यादा है. हालांकि, किसी मामले में हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट आदेश होने पर स्थिति अलग हो सकती है. अगर अदालत ने किसी विशेष एजेंसी को जांच का जिम्मा सौंपा है, तो राज्य सरकार अपने स्तर पर समानांतर जांच नहीं चला सकती. कुल मिलाकर इस मामले की सीबीआई जांच कराने की अनुमति देने का पूरा अधिकार राज्य सरकार के पास है.
क्या है राजनीतिक कारण
सरकार सीबीआई के बजाय राज्य की सीआईडी से जांच करा रही है. इसके साथ हाईकोर्ट के रिटायर जज की अध्यक्षता में निगरानी व्यवस्था बनाने की बात कही गई है. सरकार का तर्क है कि इससे जांच में पारदर्शिता आएगी. एक रिटायर जज की निगरानी से जांच पर सवाल कम होंगे. लेकिन छात्र कहते रहे हैं कि राज्य सरकार की एजेंसी से जांच कराने पर पूरी तरह भरोसा कैसे किया जाए? सीबीआई की मांग के पीछे छात्रों की यही सोच है कि केंद्रीय एजेंसी राज्य सरकार के प्रशासनिक ढांचे से बाहर है. इसलिए जांच राज्य सरकार के दबाव में नहीं होगी. लेकिन, दूसरी तरह सरकार का भी यही तर्क है. सीबीआई और अन्य केंद्रीय एजेंसियों की भूमिका हमेशा से राजनीतिक रही है. वे राजनीतिक विवाद की वजह बनी है. राज्य सरकार का मानना है कि अगर मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी जाती है तो एजेंसी हो सकता है कि राजनीतिक दबाव में राज्य सरकार को बेवजह निशाना बनाने लगे. इससे राज्य सरकार पर जांच की आंच आ सकती है. यही वह सबसे बड़ी वजह है. राज्य सरकार का मानना है कि सीबीआई जांच की स्थिति में पूरा मामले उसके हाथ से निकल जाएगा.
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न्यूज18 हिंदी में बतौर एसोसिएट एडिटर कार्यरत. मीडिया में करीब दो दशक का अनुभव. दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, आईएएनएस, बीबीसी, अमर उजाला, जी समूह सहित कई अन्य संस्थानों में कार्य करने का मौका मिला. माखनलाल यूनिवर्स…
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