Last Updated:
India Census 2027: कांग्रेस ने ‘जनगणना 2027’ में जाति से जुड़े सवालों के प्रारूप पर केंद्र सरकार को घेरा है. पार्टी ने आरोप लगाया कि जनगणना में जाति संबंधी आंकड़े जुटाने की पद्धति को जानबूझकर गलत और भ्रामक बनाया गया है. पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि धर्म, जन्मतिथि और माता-पिता के जन्मस्थान जैसे बेहद बारीक सवाल पहले कभी नहीं पूछे गए. उन्होंने इस पूरी कवायद के पीछे सरकार का गहरा छिपा हुआ मकसद होने की आशंका जताई.
जनगणना के सवालों पर कांग्रेस ने ऐतराज जताया है. (फाइल फोटो)
Census 2027 Question: कांग्रेस ने बुधवार को आरोप लगाया कि ‘जनगणना 2027’ में जाति संबंधी सवाल पूछने की पद्धति को “जानबूझकर त्रुटिपूर्ण” रखा गया है और जिस तरह से सूक्ष्म सवाल पूछे जा रहे हैं उससे पता चलता है कि इस कवायद के पीछे कोई निहित उद्देश्य है. पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि जनगणना-2027 में जाति के बारे में सवाल पूछने की पद्धति “जानबूझकर गलत” रखी गई है.
उन्होंने दावा किया कि धर्म, जन्मतिथि तथा माता-पिता के जन्मस्थान से जुड़े सूक्ष्म सवाल पहले कभी नहीं पूछे गए हैं. रमेश ने कहा कि जनगणना गोपनीय होती है और इसीलिए इन प्रावधानों को लेकर गंभीर सवाल उठते हैं. कांग्रेस महासचिव ने आरोप लगाया कि “स्पष्ट रूप से जनगणना-2027 का कोई गहरा निहित उद्देश्य है.” रमेश ने मंगलवार को आरोप लगाया था कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस जनगणना में जाति की गणना के विचार को ही दफन कर दिया है.
रमेश ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि मोदी सरकार ने 21 सितंबर, 2021 को सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में जाति जनगणना की मांग को स्पष्ट रूप से खारिज कर दिया था. उनके मुताबिक, हलफनामे के पैरा 12(डी) में कहा गया था कि 2011 की जनगणना से पहले जातियों का कोई रजिस्टर तैयार नहीं किया गया था और यह बेहतर होता कि जातियों के रजिस्टर में चयन के लिए ‘ड्रॉपडाउन मेन्यू’ दिया गया होता, जिससे लगातार और भरोसेमंद आंकड़े उपलब्ध हो सकते.
कांग्रेस महासचिव ने सवाल किया कि जब केंद्र सरकार ने खुद 2021 में इस तरह की व्यवस्था की जरूरत बताई थी, तो 2027 की जनगणना में ऐसा ‘ड्रॉपडाउन मेन्यू’ क्यों नहीं है. जनगणना के डिजिटल फॉर्म में ‘ड्रॉपडाउन मेन्यू’ विकल्पों की एक छिपी हुई सूची होती है. किसी खाने पर क्लिक करने पर राज्यों, भाषाओं या तय श्रेणियों जैसे विकल्प नीचे की ओर खुलते हैं, जिनमें से एक को चुनना होता है.
कांग्रेस नेता ने दावा किया कि बिहार और तेलंगाना में हुए जाति सर्वेक्षणों से पहले इस तरह का मेन्यू तैयार किया गया था. रमेश ने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष ने भी पांच मई, 2025 को प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में ऐसी व्यवस्था का सुझाव दिया था. उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री ने 30 अप्रैल, 2025 को जाति जनगणना कराने की घोषणा करके अपने पुराने रुख से ‘पूरी तरह यू-टर्न’ लिया था.
About the Author
राकेश रंजन कुमार को डिजिटल पत्रकारिता में 10 साल से अधिक का अनुभव है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने लाइव हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, ज़ी न्यूज़, जनसत्ता और दैनिक भास्कर में काम किया है. वर्तमान में वह h…
और पढ़ें