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2 क्विंटल का कांवर लेकर बाबा धाम पहुंची पश्चिम बंगाल की टोली,...


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Devghar Kanwar Yatra: सावन के महीने में सुल्तानगंज से देवघर तक कांवरियों की यात्रा जारी है. इसी बीच पश्चिम बंगाल से आई कांवरियों की एक टोली अपने अनोखे कांवर के कारण चर्चा में है. इस कांवर में भगवान भोलेनाथ और उनके पूरे परिवार की आकर्षक प्रतिमाएं लगाई गई हैं. करीब 1 क्विंटल 70 किलो से 2 क्विंटल वजन वाले इस कांवर को लेकर टोली ने करीब 105 किलोमीटर की पैदल यात्रा की. कांवरियों का कहना है कि पिछले तीन वर्षों से वे हर साल अलग-अलग थीम पर कांवर तैयार कर बाबा बैद्यनाथ धाम पहुंचते हैं.

देवघर: सावन का पावन महीना चल रहा है. इन दिनों देवघर की धरती पूरी तरह बोल बम के जयकारों से गूंज रही है. देश के कोने-कोने से श्रद्धालु सुल्तानगंज से गंगाजल लेकर बाबा बैद्यनाथ धाम पहुंच रहे हैं. कांवरिया करीब 105 किलोमीटर की पैदल यात्रा कर बाबा के दरबार में पहुंच रहे हैं. कोई सामान्य कांवर लेकर बाबा धाम पहुंच रहा है. वहीं, कुछ श्रद्धालु अपनी भक्ति को अनोखे अंदाज में दिखा रहे हैं. सुल्तानगंज से देवघर तक कांवरियों के कदम लगातार बाबा धाम की ओर बढ़ रहे हैं. पूरे कांवरिया पथ पर हर तरफ बोल बम, हर हर महादेव और बाबा बैद्यनाथ के जयकारे सुनाई दे रहे हैं. इसी आस्था के बीच पश्चिम बंगाल से आई कांवरियों की एक टोली लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है. इस टोली ने इस बार खास तरह का कांवर तैयार किया है. कांवर को देखने के लिए रास्ते में लोग रुक जा रहे हैं. दरअसल, इस टोली के कांवर में भगवान भोलेनाथ और उनके पूरे परिवार की आकर्षक प्रतिमा लगाई गई है.

भोलेनाथ के पूरे परिवार को लेकर पहुंचे बाबा धाम
पश्चिम बंगाल से आए इन कांवरियों ने अपने कांवर को सिर्फ यात्रा का साधन नहीं बनाया है. उन्होंने इसे अपनी आस्था और भक्ति का प्रतीक बनाया है. कांवर में भगवान शिव के साथ उनके पूरे परिवार की प्रतिमा को बेहद आकर्षक तरीके से सजाया गया है. प्रतिमाओं को कांवर में इस तरह लगाया गया है कि रास्ते से गुजरने वाले श्रद्धालुओं की नजर पड़ते ही वे कुछ देर के लिए रुक जाते हैं. लोग कांवर को देखते हैं और कांवरियों का उत्साह भी बढ़ाते हैं. खास बात यह है कि इस पूरे कांवर का वजन करीब दो क्विंटल बताया जा रहा है. इतनी भारी कांवर को लेकर सुल्तानगंज से देवघर तक करीब 105 किलोमीटर की पैदल यात्रा करना बड़ी चुनौती है. लेकिन कांवरियों के लिए बाबा के प्रति आस्था सबसे बड़ी ताकत बनी हुई है. कांवरियों का कहना है कि जब मन में बाबा भोलेनाथ के प्रति सच्ची श्रद्धा हो तो रास्ते की थकान और मुश्किलें पीछे छूट जाती हैं. इसी विश्वास के साथ यह टोली सुल्तानगंज से गंगाजल लेकर पैदल निकली. बोल बम का जयघोष करते हुए कांवरियों ने बाबा धाम की ओर अपनी यात्रा जारी रखी.

तीन साल से अलग-अलग थीम पर कांवर तैयार कर रहे
इस टोली में शामिल अमित कुमार साव ने बताया कि उनका बाबा बैद्यनाथ धाम से पुराना लगाव है. पिछले तीन वर्षों से वे लोग हर साल कुछ अलग और अनोखे कांवर के साथ बाबा धाम पहुंच रहे हैं. उन्होंने बताया कि हर साल कांवर के जरिए कुछ नया करने की कोशिश रहती है. इसका उद्देश्य बाबा के प्रति अपनी भक्ति को अलग अंदाज में व्यक्त करना है. अमित कुमार साव के अनुसार, इस बार उन्होंने भगवान शिव के पूरे परिवार की आकर्षक प्रतिमा तैयार कर उसे कांवर में शामिल किया है. उन्होंने बताया कि भगवान भोलेनाथ और उनके परिवार के प्रति उनकी गहरी आस्था है. इसी आस्था को ध्यान में रखते हुए इस बार शिव परिवार को कांवर की थीम बनाया गया. करीब 1 क्विंटल 70 किलो वजन वाले इस कांवर को लेकर पूरी टोली सुल्तानगंज से देवघर तक पैदल चली है. रास्ते में कांवर को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग रुक रहे हैं. लोग कांवरियों की भक्ति की सराहना कर रहे हैं. इससे कांवरियों का उत्साह भी बढ़ रहा है.

हर साल अलग थीम के साथ पहुंचेंगे बाबा धाम
इसी मंडली के एक अन्य कांवरिया अजय कुमार हिला ने बताया कि बाबा बैद्यनाथ के प्रति उनकी आस्था ही उन्हें हर साल इतनी लंबी पैदल यात्रा करने की ताकत देती है. उन्होंने कहा कि बाबा से उनका लगाव इतना गहरा है कि सावन आते ही मन अपने आप बाबा धाम की ओर खिंचा चला आता है. इसी वजह से हर साल अलग-अलग थीम और अलग अंदाज का कांवर तैयार कर वे लोग बाबा धाम पहुंचते हैं. उनका कहना है कि कांवर यात्रा सिर्फ 105 किलोमीटर पैदल चलने का नाम नहीं है. यह बाबा के प्रति विश्वास, श्रद्धा और समर्पण की यात्रा है. उन्होंने कहा कि रास्ते में कितनी भी थकान हो. पैर कितने भी दर्द करें. लेकिन जब बोल बम का जयकारा गूंजता है तो कांवरियों के अंदर एक अलग ही ऊर्जा पैदा होती है. कांवरियों का कहना है कि जब तक जीवन रहेगा, तब तक वे बाबा बैद्यनाथ के दरबार में इसी तरह आते रहेंगे. हर साल अपनी श्रद्धा को किसी न किसी नए अंदाज में बाबा के चरणों तक पहुंचाते रहेंगे. इस बार शिव परिवार की प्रतिमा वाला भारी कांवर उनकी इसी भक्ति और समर्पण का उदाहरण बना हुआ है.

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Amita kishor

न्यूज़18इंडिया में कार्यरत हैं. आजतक से रिपोर्टर के तौर पर करियर की शुरुआत फिर सहारा समय, ज़ी मीडिया, न्यूज नेशन और टाइम्स इंटरनेट होते हुए नेटवर्क 18 से जुड़ी. टीवी और डिजिटल न्यूज़ दोनों विधाओं में काम करने क…

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