भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने जम्मू-कश्मीर के अपने पहले दौरे के दौरान इस क्षेत्र को भारत का ‘अहम हिस्सा’ बताया है. श्रीनगर में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से मुलाकात के बाद गोर ने कहा, ‘यहां हर कोई जानता है कि मैं भारत में अमेरिकी राजदूत हूं और यह भारत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है. मैं पहली बार यहां आया हूं. यह बेहद खूबसूरत जगह है और यहां आकर मुझे खुशी हो रही है.’
गोर के इस बयान को कश्मीर पर अमेरिका की सार्वजनिक भाषा के लिहाज से अहम माना जा रहा है. लंबे समय से अमेरिकी अधिकारी इस मुद्दे पर सतर्क शब्दों का इस्तेमाल करते रहे हैं, और इस क्षेत्र को विवादित भी कहा जाता रहा.
अनुच्छेद 370 हटने के बाद दूसरे अमेरिकी राजदूत का दौरा
2019 में भारत सरकार की तरफ से अनुच्छेद 370 हटाए जाने और जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा समाप्त किए जाने के बाद किसी अमेरिकी राजदूत का यह दूसरा दौरा है. इससे पहले तत्कालीन अमेरिकी राजदूत केनेथ जस्टर ने 2020 में जम्मू-कश्मीर का दौरा किया था. गोर का दौरा 2025 के पहलगाम आतंकी हमले के बाद हो रहा है. उन्होंने जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा व्यवस्था में सुधार की भी सराहना की. उन्होंने कहा कि नई दिल्ली और प्रदेश की सरकारों ने इस क्षेत्र को पहले से अधिक सुरक्षित बनाने के लिए ‘कई अहम कदम’ उठाए हैं.
क्या अमेरिकी यात्रा चेतावनी में बदलाव होगा?
गोर ने अमेरिकी नागरिकों के लिए जारी जम्मू-कश्मीर यात्रा चेतावनी की समीक्षा का भी संकेत दिया. अमेरिकी विदेश विभाग की मौजूदा ‘लेवल 4: डू नॉट ट्रैवल’ एडवाइजरी जम्मू-कश्मीर के अधिकांश हिस्से पर लागू होती है. इसमें आतंकवाद और नागरिक अशांति की आशंका का हवाला दिया गया है, हालांकि पूर्वी लद्दाख और लेह को इसमें अलग रखा गया है.
गोर ने कहा कि अमेरिका समय-समय पर अपनी यात्रा चेतावनियों की समीक्षा करता है. उन्होंने कहा, ‘मैं आज यहां कोई बड़ी घोषणा नहीं कर सकता, लेकिन हम इस पर विचार करेंगे कि क्या यात्रा चेतावनी को कम किया जाना चाहिए.’ उन्होंने जम्मू-कश्मीर को एक खूबसूरत क्षेत्र बताते हुए कहा कि कई अमेरिकी पर्यटक यहां आकर इसकी प्राकृतिक सुंदरता और अवसरों को देखना पसंद कर सकते हैं.
ऐसे अगर अमेरिकी यात्रा चेतावनी में ढील दी जाती है, तो इसका जम्मू-कश्मीर के पर्यटन उद्योग पर व्यावहारिक असर पड़ सकता है.
उमर अब्दुल्ला से क्या हुई बात?
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने अमेरिकी राजदूत के साथ हुई मुलाकात को सकारात्मक बताया. उन्होंने कहा कि बातचीत में भारत-अमेरिका संबंधों और केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में अमेरिकी सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा हुई. अब्दुल्ला ने कुछ ‘पुराने मुद्दों’ का भी जिक्र किया और कहा कि उनके समाधान में समय लगेगा. हालांकि उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में सहयोग के नए अवसर खुल सकते हैं. गोर के अपने इस दौरे में लद्दाख भी जाने वाले हैं.
पाकिस्तान के लिए क्या संदेश?
सर्जियो गोर का जम्मू-कश्मीर को सार्वजनिक रूप से ‘भारत का अहम हिस्सा’ बताना पाकिस्तान के लिए भी कूटनीतिक रूप से महत्वपूर्ण संकेत माना जा सकता है. पाकिस्तान लंबे समय से कश्मीर मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाता रहा है. ऐसे में अमेरिकी राजदूत का जम्मू-कश्मीर में जाकर भारत की क्षेत्रीय वास्तविकता को स्वीकार करने वाला बयान नई दिल्ली के लिए एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक संदेश के तौर पर देखा जा सकता है.
हालांकि अमेरिका की ओर से कश्मीर विवाद पर किसी औपचारिक नीति परिवर्तन की घोषणा नहीं की गई है. लेकिन अमेरिकी राजदूत का दौरा, सुरक्षा स्थिति की सराहना और यात्रा चेतावनी की समीक्षा की संभावना यह संकेत देती है कि वॉशिंगटन जम्मू-कश्मीर के साथ व्यावहारिक और प्रत्यक्ष जुड़ाव बढ़ाने पर विचार कर रहा है.
दूसरी ओर, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर या पीओजेके में राजनीतिक अधिकारों, आर्थिक चुनौतियों और समय-समय पर होने वाले विरोध प्रदर्शनों के मुद्दे लगातार चर्चा में रहे हैं. इस पृष्ठभूमि में गोर का बयान सिर्फ एक राजनयिक शिष्टाचार नहीं, बल्कि दक्षिण एशिया में बदलती रणनीतिक और कूटनीतिक प्राथमिकताओं के संकेत के रूप में भी देखा जा सकता है.
इस बयान पर पाकिस्तान की तत्काल प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है. लेकिन श्रीनगर से दिया गया अमेरिकी राजदूत का यह संदेश निश्चित रूप से इस्लामाबाद में भी ध्यान से देखा जाएगा.