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Palamu Koyal Apparel Park: सरकारी योजनाएं जब जमीन पर उतरती हैं, तो बदलाव की तस्वीर साफ दिखाई देने लगती है. पलामू में महिलाओं के आत्मनिर्भर बनने की ऐसी ही तस्वीर सामने आई है. जिला प्रशासन की पहल पर शुरू किए गए कोयल अपैरल पार्क में बड़ी संख्या में महिलाएं काम कर रही हैं. एक ही छत के नीचे महिलाएं आधुनिक मशीनों से काम कर रही हैं. खास बात यह है कि यहां देश की चर्चित डिक्सी कंपनी के पुरुष अंडरगार्मेंट्स तैयार किए जा रहे हैं. सिलाई मशीनों की लगातार चलती आवाज के बीच महिलाएं कपड़ों को आकार दे रही हैं. इसके साथ ही वे अपने सपनों को भी नई दिशा दे रही हैं. इस रोजगार से उनके परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है. महिलाओं में आत्मविश्वास भी बढ़ रहा है.
कोयल आजीविका अपैरल पार्क में फिलहाल करीब 130 महिलाएं काम कर रही हैं. यहां आधुनिक मशीनों की मदद से रोजाना पुरुषों के अंडरगार्मेंट्स तैयार किए जा रहे हैं. इस काम से जुड़ी महिलाओं को हर महीने करीब 6 हजार रुपये तक की आमदनी हो रही है. ग्रामीण इलाकों की महिलाओं के लिए यह रोजगार सिर्फ कमाई का साधन नहीं है. यह आत्मनिर्भर बनने की दिशा में एक नई शुरुआत भी है. महिलाएं घर की जिम्मेदारियां संभालने के साथ अब परिवार की आर्थिक जरूरतों में भी योगदान दे रही हैं. इससे उन्हें अपने पैरों पर खड़े होने का मौका मिल रहा है.
यहां अंडरगार्मेंट्स तैयार करने की प्रक्रिया काफी तकनीकी है. सबसे पहले यूनिट में कपड़ा पहुंचता है. इसके बाद उसकी कटिंग की जाती है. कटिंग के बाद कपड़े के अलग-अलग हिस्सों को मशीनों की मदद से तैयार किया जाता है. इसमें लेग फोल्डिंग, पॉकेट होल्डिंग, ओवरलॉक और वाई शेप जैसे काम शामिल हैं. इसके बाद इलास्टिक अटैचमेंट और लेबल अटैचमेंट किया जाता है. थ्रेड कटिंग के बाद उत्पाद की फिनिशिंग होती है. इसके बाद आयरन किया जाता है. अंत में फोल्डिंग और पैकिंग की प्रक्रिया पूरी होती है. यानी कपड़े के एक टुकड़े से तैयार उत्पाद बनने तक कई चरणों में महिलाओं की मेहनत शामिल होती है.
सुपरवाइजर निखत परवीन के अनुसार, एक अंडरगार्मेंट्स को पूरी तरह तैयार करने में करीब 13 लोगों की टीम काम करती है. अलग-अलग मशीनों पर महिलाओं को अलग-अलग जिम्मेदारी दी गई है. फिलहाल पार्क में करीब 80 मशीनें लगी हुई हैं. आने वाले दिनों में मशीनों की संख्या बढ़ाकर 120 करने की तैयारी है. मशीनों की संख्या बढ़ने के बाद उत्पादन क्षमता भी बढ़ेगी. इसके साथ ही ज्यादा महिलाओं को रोजगार से जोड़ने का रास्ता खुलेगा. इससे ग्रामीण क्षेत्र की और महिलाओं को अपने गांव के आसपास काम मिलने की उम्मीद है.
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फिलहाल यहां महिलाएं हर दिन करीब 800 से 1000 पीस अंडरगार्मेंट्स तैयार कर रही हैं. वहीं उत्पादन का लक्ष्य प्रतिदिन करीब 2000 पीस रखा गया है. तैयार उत्पाद की पैकिंग के बाद उसे कंपनी के लिए भेजा जाता है. बाजार में मांग बढ़ने के साथ उत्पादन बढ़ाने की भी तैयारी है. उत्पादन बढ़ने पर रोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है.
महिलाओं को रोजगार देने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से लिजर एंड लाइफ स्टाइल कंपनी के साथ एमओयू किया गया था. इसके बाद इस यूनिट की शुरुआत हुई. अब यह पहल धीरे-धीरे ग्रामीण महिलाओं के लिए रोजगार का मजबूत माध्यम बन रही है. जिन महिलाओं की दुनिया पहले घर की चारदीवारी तक सीमित थी, वे अब आधुनिक मशीनों पर काम कर रही हैं. वे बाजार के लिए उत्पाद तैयार कर रही हैं. इससे उन्हें काम का अनुभव भी मिल रहा है और आमदनी का जरिया भी मजबूत हो रहा है.
कोयल अपैरल पार्क की सबसे खास तस्वीर यही है कि यहां एक ही छत के नीचे कई महिलाओं के सपने आकार ले रहे हैं. कोई मशीन पर कपड़ा सिल रही है. कोई इलास्टिक लगा रही है. कोई फिनिशिंग का काम कर रही है. वहीं कोई तैयार उत्पाद की पैकिंग कर रही है. हर महिला की जिम्मेदारी अलग है. लेकिन सभी का लक्ष्य एक है. आत्मनिर्भर बनना और अपने परिवार का भविष्य मजबूत करना. पलामू की यह पहल बताती है कि अगर महिलाओं को उनके घर और गांव के आसपास रोजगार का अवसर मिले, तो वे अपनी जिंदगी बदल सकती हैं.