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बलिया का फेमस पेड़ा, 40 साल से कायम है स्वाद का जादू,...


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Ballia famous Peda: बलिया-बैरिया मार्ग पर बहादुरपुर में मिलने वाला विश्वकर्मा पेड़ा भंडार आज किसी पहचान का मोहताज नहीं है. चार दशक से देसी दूध, पारंपरिक विधि और कारीगर के अनुभव से तैयार हो रहा यह पेड़ा स्वाद के साथ लोगों के भरोसे की भी मिसाल बन चुका है. बचपन में इसका स्वाद चखने वाली पुरानी पीढ़ी हो या आज की नई पीढ़ी, हर किसी की जुबान पर इस पेड़े की मिठास कायम है. यही वजह है कि स्थानीय ग्राहकों के साथ-साथ दूसरे शहरों और विदेश जाने वाले लोग भी यहां से पेड़ा पैक कराकर अपने साथ ले जाते है.

बलिया-बैरिया मार्ग पर बहादुरपुर में स्थित रेपुरा निवासी विश्वकर्मा साहू की विश्वकर्मा पेड़ा भंडार दुकान किसी परिचय की मोहताज नहीं है. चार दशक से पेड़ा बनाने वाले दुकानदार ने स्वाद और गुणवत्ता की ऐसी परंपरा कायम रखी है, जिसे पुरानी पीढ़ी से लेकर नई पीढ़ी तक पसंद करती आ रही है. यहां आने वाले कई ग्राहक न केवल पेड़ा लेते हैं, बल्कि पैक कराकर घर भी ले जाते हैं.

दुकानदार के अनुसार, यह पेड़ा बनाने का कार्य करीब 40 साल पहले से करते आ रहे हैं. शुरुआती दौर में दुकान बलिया शहर में संचालित हुआ करती थी. लेकिन सन 2003 में दुकान को उक्त स्थान पर लाए थे. जगह बदली, समय बदला और जमाना भी बदल गया, लेकिन साहू के पेड़ा बनाने का पारंपरिक तरीका आज भी जस का तस है. इनका पेड़ बहुत ही शानदार होता हैं और दुकान भी NH 31 से सटा हुआ हैं.

गांव के एकदम शुद्ध देसी दूध से इस फेमस पेड़े की असली कहानी शुरू होती है. दुकानदार विश्वकर्मा साहू के अनुसार पेड़ा तैयार करने के लिए देहात से दूध लेकर उसको अच्छी तरह पकाकर पहले खोवा तैयार किया जाता है. इसके बाद खोवे में हल्का चीनी मिलाई जाती है और मिश्रण को दोबारा भुन दिया जाता है. ऐसा करने से पेड़े का स्वाद और बढ़ जाता हैं.

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पेड़ा बनाने की विधि सुनने में भले आसान लगे, लेकिन असली कमाल उसकी सही से पकाने, भूनने और अनुभव से ही हो पाता हैं. खोवा और चीनी के मिश्रण को सही ढंग से भूनने के बाद इसको आग से उतार लिया जाता है और फिर इसे हल्का ठंडा होने के लिए छोड़ दिया जाता है. अब इसको हाथों से आकार देकर पेड़ा तैयार किया जाता है. यही पारंपरिक तरीका इस पेड़े में खास स्वाद भर देती हैं.

दुकानदार विश्वकर्मा साहू के अनुसार, यह पेड़ा टिकाऊ होता है यानि जल्द खराब नहीं होता है. यही वजह है कि ग्राहक इसे पैक कराकर अपने साथ दूर-दराज के शहरों तक भी ले जाते हैं. छपरा, गौरीगंज और आरा समेत कई इलाकों में इसकी मांग रहती है. यही नहीं, विदेश जाने वाले लोग भी इसे अपने साथ ले जाते हैं. इसका हर निवाला स्वाद से भरपूर होता है.

यहां ग्राहकों के लिए दो तरह के पेड़े मौजूद होते हैं. एक की कीमत ₹300KG और दूसरा वाला ₹400KG मिलता हैं. अगर कोई ज्यादा मात्रा में नहीं लेना चाहता, तो वह ₹10 प्रति पीस के हिसाब से पेड़ा खरीद सकते हैं. यानी इस स्पेशल 9पेड़े के स्वाद के लिए जेब पर भी बहुत ज्यादा असर नहीं पड़ता हैं. इस पेड़े की बात ही निराली है.

स्थानीय जो ग्राहकों हैं, उनके बीच भी इस पेड़े को लेकर अलग ही अपनापन दिखाई देता है. ग्राहक आजाद भोला पाण्डेय ने कहा कि वह बचपन से विश्वकर्मा जी के यहां का पेड़ा खाते आ रहे हैं. उनके अनुसार इस दुकान के पेड़े का स्वाद ऐसा है कि, एक बार खाने के बाद दोबारा खाने का मन करता है. कही न कही यही भरोसा इस दुकान की सबसे बड़ी पूंजी है.

जनपद के विश्वकर्मा पेड़ा भंडार की दुकान बलिया रेलवे स्टेशन से हल्दी की ओर जाने वाले मार्ग पर, दूबहर थाना से आगे मुख्य सड़क के दाहिने किनारे स्थित है. प्रतिदिन यहां ग्राहक पहुंचते हैं और स्वाद का आनंद लेते हैं. 40 साल की मेहनत, पारंपरिक विधि और देसी स्वाद ने इस पेड़े को स्थानीय मिठाई से आगे बढ़ाया है. स्वाद ऐसा की एक बार खाने के बाद हर कोई दीवाना बन जाए.

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