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महराजगंज की ठूठीबारी मंडी बदहाल, कभी रोजगार की उम्मीद थी, अब पशुओं...


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Maharajganj News: मंडी के निर्माण के समय स्थानीय लोगों में काफी उत्साह था. उन्हें उम्मीद थी कि यहां नियमित बाजार और व्यापारिक गतिविधियां शुरू होंगी. जिससे आसपास के गांवों के लोगों को सामान खरीदने-बेचने के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा. लोगों का मानना था कि इससे क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा और यह ठूठीबारी व गरौड़ा बाजार की तरह एक महत्वपूर्ण व्यापारिक केंद्र बन सकता था.

ठूठीबारी क्षेत्र के भारत-नेपाल सीमा से सटे नेटुअहिया गांव में लगभग 12 साल पहले बनी एक मंडी अब बदहाली का शिकार है. जिस मंडी से कभी व्यापार बढ़ने और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद थी. वह आज तक शुरू नहीं हो पाई है. लंबे समय से उपयोग में न आने के कारण मंडी का पूरा परिसर धीरे-धीरे जर्जर होता जा रहा है.

मंडी के निर्माण के समय स्थानीय लोगों में काफी उत्साह था. उन्हें उम्मीद थी कि यहां नियमित बाजार और व्यापारिक गतिविधियां शुरू होंगी. जिससे आसपास के गांवों के लोगों को सामान खरीदने-बेचने के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा. लोगों का मानना था कि इससे क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा और यह ठूठीबारी व गरौड़ा बाजार की तरह एक महत्वपूर्ण व्यापारिक केंद्र बन सकता था.

संचालन न होने से जर्जर स्थिति
हालांकि, वर्षों बीतने के बाद भी मंडी का संचालन शुरू नहीं हुआ. देखरेख के अभाव में परिसर के कई हिस्से खराब हो चुके है. मंडी की दीवारें कई जगह टूट गई है और शटर भी जर्जर स्थिति में है. परिसर में लगाए गए कई सामान चोरी हो चुके है. बाउंड्रीवाल भी जगह-जगह कमजोर व क्षतिग्रस्त हो रही है.

स्थानीय लोगों की प्रतिक्रिया
स्थानीय लोगों का कहना है कि मंडी का उपयोग न होने से करोड़ों रुपये की परियोजना का मूल उद्देश्य पूरा नहीं हो पाया. उनका मानना है कि यदि यहां नियमित बाजार शुरू होता तो व्यापारियों, किसानों और स्थानीय लोगों को अपनी उपज व अन्य सामान बेचने के लिए बेहतर स्थान मिलता. सीमावर्ती क्षेत्र होने के कारण नेपाल से आने वाले लोगों और ग्रामीणों के जरिए कारोबार बढ़ने की भी अच्छी संभावना थी.

वर्तमान स्थिति और भविष्य
आज स्थिति यह है कि जिस परिसर में कभी दुकानों और ग्राहकों की आवाजाही की उम्मीद थी, वहां सन्नाटा पसरा रहता है. मंडी परिसर का उपयोग अब स्थानीय पशुपालक अपने पशुओं को घुमाने के लिए करते है. जर्जर भवन, टूटती दीवारें और खराब शटर इस परियोजना को अधूरे विकास और टूटे सपनों का प्रतीक बनाते है.

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Manish Rai

Manish Rai is a digital journalist with over 8 years of experience in regional and digital media. He is currently associated with News18 as the Local18 Uttar Pradesh Coordinator, where he works on planning, coo…

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