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Cattle Health Tips: बरसात में बढ़ा गाय-बछड़ों को फीता कृमि का खतरा,...


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बरसात में बढ़ा गाय-बछड़ों को फीता कृमि का खतरा, एक्सपर्ट ने बताए बचने के तरीके

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Parasite Infection in Cattle: बरसात के मौसम में लगातार बारिश, नमी और साफ-सफाई की कमी के कारण गाय, बैल और बछड़ों में परजीवी संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है. बोकारो पेट क्लिनिक के पशु चिकित्सक डॉ. जावेद के अनुसार, गंदे स्थान पर बांधने और दूषित घास खिलाने से फीता कृमि का संक्रमण हो सकता है. इससे पशुओं में कमजोरी, दस्त, वजन कम होना और दूध उत्पादन घटने जैसी समस्याएं हो सकती हैं. बछड़ों पर इसका असर ज्यादा पड़ सकता है.

बोकारो: बरसात के मौसम में पशुओं में परजीवी संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है. लगातार बारिश और वातावरण में नमी इसकी बड़ी वजह है. साफ-सफाई की कमी से भी संक्रमण का खतरा बढ़ता है. खासकर खुले में बंधे रहने वाले गाय, बैल और बछड़े इसकी चपेट में जल्दी आ सकते हैं. इस मौसम में फीता कृमि, गोल कृमि और हुकवर्म जैसे परजीवी पशुओं के स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकते हैं. इनमें फीता कृमि का संक्रमण अधिक देखने को मिलता है. बोकारो पेट क्लिनिक के पशु चिकित्सक डॉ. जावेद ने बरसात के मौसम में पशुओं को परजीवी संक्रमण से बचाने को लेकर जरूरी जानकारी दी. उन्होंने बताया कि गंदे या संक्रमित स्थान पर गाय और बछड़ों को बांधकर रखने से संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है. दूषित घास खाने से भी पशु फीता कृमि की चपेट में आ सकते हैं.

त्वचा से जुड़ी समस्याएं
डॉ. जावेद के अनुसार, फीता कृमि पशु के शरीर में पहुंचकर उसके पोषक तत्वों का इस्तेमाल करता है. इससे पशु कमजोर होने लगता है. उसे दस्त की समस्या हो सकती है. शरीर की सामान्य स्थिति भी प्रभावित हो सकती है. संक्रमित पशुओं में दूध उत्पादन कम होने की समस्या भी देखी जा सकती है. कुछ मामलों में पशु का वजन घटने लगता है. त्वचा से जुड़ी समस्याएं भी सामने आ सकती हैं.

बछड़ों पर ज्यादा असर
पशु चिकित्सक के मुताबिक, फीता कृमि का असर बछड़ों पर ज्यादा पड़ सकता है. संक्रमण होने पर बछड़े कमजोर दिखाई देने लगते हैं. उनके विकास पर भी इसका असर पड़ सकता है. लगातार दस्त की समस्या हो सकती है. इसके अलावा पेट या गले में असामान्य रूप से फूलने की समस्या भी नजर आ सकती है. बछड़े में कमजोरी बढ़ सकती है. अगर संक्रमण गंभीर हो जाए और समय पर उपचार न मिले, तो उसकी स्थिति गंभीर हो सकती है. कुछ मामलों में बछड़े की जान भी खतरे में पड़ सकती है.

पशुशाला की सफाई जरूरी
डॉ. जावेद ने बताया कि परजीवी संक्रमण से बचाव के लिए पशुशाला की नियमित सफाई जरूरी है. पशुओं को गंदे और कीचड़ वाले स्थान पर बांधने से बचना चाहिए. बरसात में पशुशाला में पानी जमा नहीं होने देना चाहिए. जगह को सूखा और साफ रखने की कोशिश करनी चाहिए. पशुओं के खाने और पानी पीने वाले बर्तनों की सफाई पर भी ध्यान देना जरूरी है. दूषित घास या गंदा चारा पशुओं को नहीं देना चाहिए. चारा और पानी साफ जगह पर रखना चाहिए.

समय पर पशु चिकित्सक से इलाज
पशु चिकित्सक की सलाह के अनुसार कृमिनाशक दवा देने से भी परजीवी संक्रमण से बचाव में मदद मिल सकती है. उन्होंने बताया कि वयस्क गायों को छह महीने के अंतराल पर कृमिनाशक दवा दी जा सकती है. वहीं, छह महीने तक की उम्र वाले बछड़ों को हर महीने कृमिनाशक दवा देने की सलाह दी जाती है. हालांकि, दवा की मात्रा और प्रकार पशु की उम्र, वजन और स्वास्थ्य के अनुसार पशु चिकित्सक से तय कराना जरूरी है. बरसात में पशुओं की साफ-सफाई और उनके खान-पान पर विशेष ध्यान देकर परजीवी संक्रमण के खतरे को कम किया जा सकता है. संक्रमण के लक्षण दिखाई देने पर पशु का समय पर पशु चिकित्सक से इलाज कराना भी जरूरी है.

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Amita kishor

न्यूज़18इंडिया में कार्यरत हैं. आजतक से रिपोर्टर के तौर पर करियर की शुरुआत फिर सहारा समय, ज़ी मीडिया, न्यूज नेशन और टाइम्स इंटरनेट होते हुए नेटवर्क 18 से जुड़ी. टीवी और डिजिटल न्यूज़ दोनों विधाओं में काम करने क…

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