भारतन्यूज़ – टॉप हेडर
News Menu Bar

झारखंड के गांवों में होती है मां मनसा की पूजा, जानें मान्यता


Last Updated:

Jharkhand Villages Maa Mansa Devi Puja: बरसात का मौसम शुरू होते ही झारखंड के ग्रामीण इलाकों में सांप और दूसरे जहरीले जीवों का खतरा बढ़ जाता है. इस दौरान, कई ग्रामीण क्षेत्रों में लोक आस्था के अनुसार मां मनसा की पूजा की जाती है, जिन्हें नागों और सांपों से जुड़ी देवी माना जाता है.

जमशेदपुर. बरसात का मौसम शुरू होते ही ग्रामीण इलाकों में सांप-बिच्छू और दूसरे जहरीले जीव-जंतुओं का खतरा बढ़ जाता है. खेत, झाड़ियां और घरों के आसपास पानी जमा होने के कारण सांप अक्सर सुरक्षित जगह की तलाश में लोगों के घरों तक पहुंच जाते हैं. ऐसे समय में झारखंड के कई ग्रामीण क्षेत्रों में मां मनसा की पूजा की जाती है. लोक आस्था में मां मनसा को नागों और सांपों से जुड़ी देवी माना जाता है. ग्रामीण मान्यता है कि मां मनसा की पूजा करने से परिवार पर सांप-बिच्छू का खतरा कम होता है और बरसात के दिनों में देवी उनकी रक्षा करती हैं.

सांप-बिच्छू से न हो किसी को नुकसान
मां मनसा की पूजा के दौरान कई जगहों पर सांपों की विशेष रूप से पूजा की जाती है. ग्रामीण क्षेत्रों में नाग या सांप की प्रतिमा, तस्वीर अथवा प्रतीक बनाकर उसके सामने पूजा-अर्चना की जाती है. कुछ स्थानों पर सांपों को दूध चढ़ाने की भी परंपरा है. इसके अलावा फूल, धूप, दीप, फल और प्रसाद अर्पित कर मां मनसा से परिवार और गांव की सुख-समृद्धि की कामना की जाती है. पूजा के दौरान ग्रामीण देवी से प्रार्थना करते हैं कि बरसात के मौसम में खेतों में काम करने वाले लोगों और घरों में रहने वाले परिवारों को सांप-बिच्छू से किसी तरह का नुकसान न हो.

नई पीढ़ी भी आगे बढ़ा रही है परंपरा
झारखंड की लोक संस्कृति में प्रकृति और धार्मिक आस्था का गहरा संबंध देखने को मिलता है. ग्रामीण जीवन काफी हद तक जंगल, खेत, नदी और मौसम पर निर्भर रहा है. ऐसे में बारिश के मौसम में सांपों का निकलना ग्रामीणों के लिए हमेशा से चिंता का विषय रहा है. इसी वजह से कई क्षेत्रों में मां मनसा की पूजा केवल धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि प्रकृति और जीव-जंतुओं के प्रति सम्मान की भावना से भी जुड़ी हुई मानी जाती है. बुजुर्ग पीढ़ी से चली आ रही इन परंपराओं को आज भी नई पीढ़ी आगे बढ़ा रही है.

रीति-रिवाजों से होती है पूजा
पूजा के दौरान ग्रामीण महिलाएं और परिवार के अन्य सदस्य पारंपरिक तरीके से पूजा की तैयारी करते हैं. घर और पूजा स्थल की साफ-सफाई की जाती है. इसके बाद विधि-विधान से मां मनसा की पूजा कर प्रसाद चढ़ाया जाता है. कई गांवों में इस अवसर पर परिवार और आसपास के लोग भी एक साथ पूजा में शामिल होते हैं. इससे धार्मिक आस्था के साथ-साथ गांव के लोगों के बीच आपसी मेल-जोल भी बढ़ता है. कई जगहों पर लोकगीत और पारंपरिक रीति-रिवाज भी इस पूजा का हिस्सा बनते हैं.

सांप की प्रतीकात्मक पूजा ही सही
हालांकि, सांपों को दूध चढ़ाने की परंपरा धार्मिक आस्था का हिस्सा है, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार वास्तविक सांप को पकड़कर उसके सामने दूध रखने या उसे जबरन दूध पिलाने से बचना चाहिए. सांप दूध को सामान्य रूप से भोजन के रूप में नहीं लेते और उन्हें पकड़ना या परेशान करना इंसानों और सांप दोनों के लिए खतरनाक हो सकता है. इसलिए पूजा के लिए सांप की प्रतिमा या प्रतीक का इस्तेमाल करना अधिक सुरक्षित है. ग्रामीणों को सांप दिखाई देने पर उसे मारने के बजाय प्रशिक्षित रेस्क्यू टीम या वन विभाग की मदद लेनी चाहिए.

सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा
मां मनसा की पूजा झारखंड के ग्रामीण जीवन की उस परंपरा को दर्शाती है, जहां धार्मिक विश्वास, प्रकृति और लोक संस्कृति एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं. बरसात के मौसम में जब सांप-बिच्छू का खतरा बढ़ जाता है, तब ग्रामीण श्रद्धा के साथ मां मनसा का स्मरण करते हैं और अपने परिवार की सुरक्षा की कामना करते हैं. यह परंपरा आज भी कई गांवों में लोगों की आस्था और सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा बनी हुई है.

About the Author

Raina Shukla

Raina Shukla is an experienced journalist and content professional with nearly two decades of experience in print and digital media. She holds a Master’s degree in Mass Communication and Journalism from Bundelk…

और पढ़ें



Source link

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top