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Palamu Khonhar Nath Mandir: झारखंड के गढ़वा जिले में स्थित खोनहर नाथ मंदिर भगवान भोलेनाथ की अनोखी मान्यता और प्राकृतिक शिवलिंग के कारण श्रद्धालुओं के बीच विशेष महत्व रखता है. यहां शिवलिंग का अर्घ्य पूर्व दिशा की ओर है, जिसे श्रद्धालु अत्यंत दुर्लभ मानते हैं.
पलामू. भारत आस्था और धार्मिक मान्यताओं की धरती है. यहां कई ऐसे प्राचीन मंदिर हैं, जिनसे लोगों की गहरी आस्था जुड़ी हुई है. वहीं झारखंड राज्य के गढ़वा जिले के खोनहर गांव में स्थित खोनहर नाथ मंदिर आस्था और मान्यता का अटूट केंद्र है. पलामू-गढ़वा सीमा के करीब स्थित यह मंदिर भगवान भोलेनाथ की अनोखी मान्यता और प्राकृतिक शिवलिंग के कारण श्रद्धालुओं के बीच विशेष महत्व रखता है. महाशिवरात्रि के अवसर पर यहां भव्य मेले का आयोजन होता है, जिसमें दूर-दराज से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं.
आस्था के साथ-साथ पर्यटन से भी पहचान
मंदिर के पुजारी संतोष कुमार तिवारी ने लोकल18 को बताया कि खोनहर नाथ मंदिर हजारों वर्ष पुराना है. मान्यता है कि कभी यह पूरा क्षेत्र घने जंगल से घिरा हुआ था और उसी प्राकृतिक परिवेश में बाबा भोलेनाथ विराजमान थे. समय के साथ मंदिर परिसर का विकास हुआ और आज यह क्षेत्र धार्मिक आस्था के साथ-साथ पर्यटन के लिहाज से भी पहचान बना रहा है.
पूर्वाभिमुख अर्घ्य है सबसे बड़ी विशेषता
खोनहर नाथ नाम मूल रूप से खोडर नाथ मंदिर के रूप में जाना जाता है. इसकी सबसे खास बात यहां स्थित प्राकृतिक शिवलिंग की बनावट और उसके अर्घ्य की दिशा बताई जाती है. स्थानीय मान्यता के अनुसार, यहां शिवलिंग का अर्घ्य पूर्व दिशा की ओर है. श्रद्धालु इसे अत्यंत दुर्लभ मानते हैं. साधु-संतों और बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं ने इसे दुर्लभ शिवधाम के रूप में माना है. इसी विशेषता के कारण खोनहर नाथ मंदिर की अपनी अलग धार्मिक पहचान बनी हुई है.
शिवलिंग के साथ मां गंगा की भी मान्यता
उन्होंने कहा कि यहां भगवान भोलेनाथ के साथ मां गंगा का भी वास माना जाता है. शिवलिंग एक प्राकृतिक पत्थर से सटा हुआ है और इसी स्थान को श्रद्धालु विशेष पवित्र मानते हैं. यहां पूजा-अर्चना करने के लिए दिल्ली, कानपुर, लखनऊ सहित कई दूर-दराज के क्षेत्रों से श्रद्धालु पहुंचते हैं, जो अपनी-अपनी मन्नत को लेकर आते हैं.
स्थानीय निवासी अभिषेक पांडे ने बताया कि खोनहर नाथ मंदिर की पहचान यहां की प्राचीनता से ज्यादा उससे जुड़ी आस्था और मान्यताओं से है. सावन और महाशिवरात्रि के दौरान मंदिर में विशेष पूजा होती है और श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है.
अन्य शिवधामों से अलग
हालांकि मंदिर के हजारों वर्ष पुराना होने और इसे ‘दुर्लभ ज्योतिर्लिंग’ बताए जाने जैसी बातें स्थानीय धार्मिक मान्यताओं पर आधारित हैं. इसके बावजूद खोनहर नाथ मंदिर आज भी क्षेत्र के लोगों के लिए आस्था का बड़ा केंद्र है. प्राकृतिक रूप से विराजमान माने जाने वाले भोलेनाथ और पूर्वाभिमुख अर्घ्य की विशेष मान्यता इस मंदिर को झारखंड के अन्य शिवधामों से अलग पहचान देती है.
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Raina Shukla is an experienced journalist and content professional with nearly two decades of experience in print and digital media. She holds a Master’s degree in Mass Communication and Journalism from Bundelk…
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