Karnataka News: ‘बेटा, मेरी देख-रेख करने वाला कोई नहीं… इसलिए मुझे भीख मांगना पड़ता है!’ ऐसा कहकर कर्नाटक के मांड्या की एक बुजुर्ग महिला सालों तक मस्जिद के बाहर बैठकर भीख मांगती रही. वह लोगों से मिलने वाली मदद से अपना गुजारा करती थी. लेकिन किसे पता था कि उसकी मौत के बाद उसके छोटे से घर का ऐसा राज खुलेगा, जिसे देखकर हर कोई हैरान रह जाएगा. महिला के घर में बोरियों के अंदर सिक्के और नोट भरे मिले. जब रकम की गिनती हुई तो यह 30 लाख रुपये से ज्यादा निकली. स्थानीय लोगों के मुताबिक, कुल रकम 30 से 40 लाख रुपये के बीच हो सकती है.
मस्जिद के बाहर मांगती थीं भीख
बुजुर्ग महिला की का नाम हूर है. वह मांड्या शहर के गुट्टालु लेआउट में रहती थीं. बताया गया कि कई सालों से वह इलाके की एक मस्जिद के बाहर बैठकर लोगों से मदद मांगती थीं. यही उसका रोज का काम था. मस्जिद आने-जाने वाले लोग उन्हें अक्सर वहां देखते थे.
स्थानीय लोगों के मुताबिक, हूर कहा करती थीं कि उनके परिवार के लोग उनका ठीक से ख्याल नहीं रखते और इसी वजह से उन्हें अपना खर्च चलाने के लिए भीख मांगनी पड़ती है. उनकी जिंदगी का ज्यादातर हिस्सा इसी तरह गुजरता रहा.
मौत के बाद घर पहुंचे लोग तो खुला राज
बढ़ती उम्र के कारण उसे कोई गंभीर बिमारी थी. जिसके चलते उसकी मौत हो गई. पड़ोस के लोगों ने उनके अंतिम संस्कार की व्यवस्था की. जैसे ही अंतिम संस्कार हुआ और कुछ लोग जब उनके घर वापस पहुंचे, तो वहां का नजारा देखकर उनके होश उड़ गए. घर के अंदर कई बोरियां रखी थीं. जब उन्हें खोला गया तो उनमें बड़ी मात्रा में सिक्के और नोट मिले. किसी को अंदाजा नहीं था कि हूर ने इतने वर्षों में इतनी बड़ी रकम जमा कर ली थी.
स्थानीय निवासी नूर ने News18 के रिपोर्टर सौम्य कालसा को बताया कि लोगों को इस रकम को देखकर काफी हैरानी हुई. उनके मुताबिक, गिनती के बाद रकम 30 लाख रुपये से अधिक निकली. यह राशि करीब 30 से 40 लाख रुपये के बीच होने सकती है.
मस्जिद कमेटी ने पैसे लेने से किया इनकार
रकम सामने आने के बाद यह सवाल उठा कि आखिर इस पैसे का क्या किया जाए. चूंकि हूर ने वर्षों तक मस्जिद के बाहर भीख मांगी थी, इसलिए कुछ स्थानीय लोगों ने सुझाव दिया कि उनकी जमा रकम मस्जिद को दान कर दी जाए. हालांकि, स्थानीय निवासी के मुताबिक, मस्जिद कमेटी ने इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया. कमेटी ने कहा कि वह भीख मांगकर जमा किए पैसे हैं. इसलिए हम स्वीकार नहीं करना चाहते.
भाई ने भी नहीं लिया हिस्सा
बताया गया कि हूर के दो भाई थे. उनमें से एक आर्थिक रूप से सही था इसलिए उसने रकम में हिस्सा लेने से इनकार कर दिया. इसके बाद उनका दूसरा भाई अपने परिवार के साथ वहां पहुंचा. स्थानीय लोगों के बीच बातचीत के बाद कथित तौर पर दूसरे भाई ने पैसे ले लिए. इस पूरे मामले ने इलाके में एक अलग चर्चा भी छेड़ दी है.
कुछ स्थानीय लोगों का आरोप है कि हूर जिंदगीभर अपने परिवार की तरफ से देखभाल न किए जाने की शिकायत करती थीं, लेकिन उनकी मौत के बाद उनकी जमा की हुई बड़ी रकम लोगों की दिलचस्पी का केंद्र बन गई. मामला मांड्या ईस्ट पुलिस स्टेशन के अधिकार क्षेत्र में आता है. हालांकि, पुलिस ने इस मामले में हस्तक्षेप नहीं किया, क्योंकि पैसे को लेकर किसी ने कोई शिकायत या आपत्ति दर्ज नहीं कराई थी.