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Gumla PCCF Sanjeev Kumar Launches Tree Protection Campaign


गुमला वन प्रमंडल ने रक्षाबंधन के अवसर पर सदर प्रखंड के जोराग आंजन और तर्री गांवों में पेड़ों को रक्षा सूत्र बांधकर वन संरक्षण का संकल्प लिया। यह कार्यक्रम देशभर में भाइयों की कलाई पर राखी बांधकर मनाए जा रहे रक्षाबंधन के त्योहार के साथ आयोजित किया गया

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इस कार्यक्रम में झारखंड के प्रधान मुख्य वन संरक्षक (PCCF) संजीव कुमार, गुमला वन प्रमंडल पदाधिकारी बेलाल अहमद और वन समिति के सैकड़ों ग्रामीण उपस्थित रहे।

वन समिति के अध्यक्ष चंदमोहन उरांव ने बताया कि ग्रामीण पिछले 10 वर्षों से पेड़ों को रक्षा सूत्र बांधकर उनकी रक्षा का संकल्प ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि जंगल के पेड़-पौधों से ऑक्सीजन मिलता है और वनोपज से आर्थिक लाभ भी प्राप्त होता है।

PCCF संजीव कुमार ने बताया कि यह अभियान पूरे एक महीने तक जारी रहेगा, जिसके तहत 24 जिलों में कुल तीन लाख पेड़ों पर राखी बांधी जाएगी।

PCCF संजीव कुमार ने बताया कि यह अभियान पूरे एक महीने तक जारी रहेगा, जिसके तहत 24 जिलों में कुल तीन लाख पेड़ों पर राखी बांधी जाएगी।

यह पहल ‘पेड़ बचाओ’ अभियान का हिस्सा

PCCF संजीव कुमार ने बताया कि यह पहल ‘पेड़ बचाओ’ अभियान का हिस्सा है, जो एक महीने तक चलेगा। इस अभियान का लक्ष्य राज्य के 24 जिलों के चयनित गांवों में तीन लाख पेड़ों पर राखी बांधना है। कुमार ने शुक्रवार को गुमला जिले के जोराग गांव में एक पेड़ पर राखी बांधकर इस अभियान का शुभारंभ किया।

संजीव कुमार ने कहा, “रक्षाबंधन भाई-बहनों का त्योहार है, जिसमें भाई अपनी बहनों की रक्षा का संकल्प लेते हैं। इसी तरह, पर्यावरण की रक्षा करना भी हमारा परम कर्तव्य है, क्योंकि हमारा जीवन इस पर निर्भर करता है।”

अभियान पूरे एक महीने तक जारी रहेगा

उन्होंने बताया कि रक्षाबंधन के दिन 700 गांवों में लगभग एक लाख पेड़ों पर राखी बांधने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। यह अभियान पूरे एक महीने तक जारी रहेगा, जिसके तहत 24 जिलों में कुल तीन लाख पेड़ों पर राखी बांधी जाएगी।

संजीव कुमार की इस पहल की शुरुआत 2004 में धनबाद जिले के टुंडी ब्लॉक के लुकाइया गांव से हुई थी, जो कभी माओवादी प्रभावित क्षेत्र था। उन्होंने आगे बताया कि तब से राज्य भर के 12,000 से अधिक गांवों को इस कार्यक्रम से जोड़ा जा चुका है।

इस पहल के माध्यम से लुकाइया गांव में 20,000 से अधिक महुआ के पेड़ों को बचाया गया, जो अब ग्रामीणों की आजीविका में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। इस अभियान ने कई गांवों को छोटे वन उत्पाद उगाने में भी सहायता की है, जिससे ग्रामीणों की आय में वृद्धि हुई है।



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