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Livestock superfood: खेती और पशुपालन करने वाले किसानों के लिए आज हम एक ऐसी फसल के बारे में बताने जा रहे हैं. जो उन्हें कई तरह से फायदा पहुंचा सकती है, किसान अपने खेतों में बरसीं की बुवाई करते हुए एक साथ डबल मुनाफा प्राप्त कर सकते हैं. यह फसल पशुओं के लिए उपयोगी होने के साथ-साथ खेत के लिए भी बहुत फायदेमंद माना जाता है.
अगर आप किसान हैं और खेती के साथ-साथ पशुपालन का भी काम करते हैं तो आज हम आपको एक ऐसी फसल के बारे में बताने जा रहे हैं, जो आपके लिए बेहद फायदेमंद हो सकती है. बदलते मौसम के साथ-साथ पशुपालक किसानों के लिए पशुओं के लिए हरे चारे का इंतजाम बेहद कठिन हो जाता है.
ऐसे में पशुओं को सूखा चारा खिलाना पड़ता है. जिससे दूध उत्पादन में भी कमी आती है और पशुओं के स्वास्थ्य पर भी इसका प्रभाव देखने को मिलता है. ऐसे में आज हम आपको एक ऐसे हरे चारे के बारे में बताने जा रहे हैं. जो पशुओं के साथ-साथ किसानों के लिए भी बेहद फायदेमंद हो सकता है.
पशुपालन के साथ-साथ खेती करने वाले किसान अपने खेतों में बरसीम की बुवाई कर सकते हैं. यह फसल कई तरीके से किस के लिए बेहद फायदेमंद हो सकती सबसे खास बात यह है कि यह हरा चारा पशुओं के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है इसमें 20 फ़ीसदी तक कच्चा प्रोटीन और कई जरूरी खनिज पाए जाते हैं जो पशुओं के स्वास्थ्य के लिए बैठ फायदेमंद होते हैं.
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यह हरा चारा बेहद मुलायम और रसदार होता है. जो दुधारू पशुओं के द्वारा बेहद पसंद भी किया जाता है, सबसे खास बात यह है कि यह बेहद आसानी से पच जाता है. जिससे पशुओं का स्वास्थ्य बेहतर होता है, पशुओं को रोजाना यह हरा चारा खिलाने से उनके दूध उत्पादन की क्षमता भी बढ़ती है और साथ ही साथ दूध की गुणवत्ता भी बेहतर होती है.
कृषि एक्सपर्ट डॉ. अखिलेश बताते हैं कि बरसीम की बुवाई के लिए हल्की दोमट और पानी सूखने वाली जमीन सबसे उपयोगी मानी जाती है. फसल बुवाई के पहले खेत को भी फसल के अनुरूप तैयार करना बेहद आवश्यक होता है. इसके लिए खेत की कम से कम दो से तीन बार अच्छी तरह से जुताई करनी चाहिए.
गहरी जुताई करने से खेत की मिट्टी भुरभुरी होजाती है इसके बाद पाटा चला कर खेत को बिल्कुल बराबर कर लेना चाहिए जिसे कहीं पर भी पानी ठहरने की की स्थिति ना हो. इस फसल की एक एकड़ बुवाई के लिए लगभग 8 से 10 किलो बीज की आवश्यकता होगी.
किसानों को चाहिए कि वह फसल बुवाई से पहले बीजों को राइजोबियम कल्चर से जरूर उपचारित करने इससे पौधों की जड़ों में गांठ बनती है जो मिट्टी में नाइट्रोजन सुख कर फसल को मजबूत बनाते हैं. किसान खेत की क्यारी में हल्का पानी भरकर बीज का छिड़काव कर सकते हैं जिससे बी मिट्टी में बैठ जाते हैं और जमाव बेहतर होता है.
इस फसल की सबसे खास बात यह है कि इसे एक बार बुवाई के बाद कई बार काटा जा सकता है. फसल बुवाई की तकरीबन 50 दिनों के बाद यह फसल पहली बार कटाई के लिए तैयार हो जाती है. इसके बाद जैसे-जैसे पौधे को काटा जाता है. उसके हर 25वें दिन के बाद यह अगली कटाई के लिए तैयार हो जाता है. ऐसे में पूरे सीजन भर किसान इसे कम से कम 5 से 6 बार काट सकते हैं. वही फसल की बुवाई से खेत की मिट्टी की गुणवत्ता भी बेहतर होती है.