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किसान फसल चक्र अपनाएं, खेत में कभी नहीं होंगे कीड़े, कृषि वैज्ञानिक...


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किसान फसल चक्र अपनाएं, खेत में कभी नहीं होंगे कीड़े, कृषि वैज्ञानिक से जानें

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पलामू में अरहर की खेती में उखठा रोग से बचाव के लिए फसल चक्र अपनाना जरूरी है. कृषि वैज्ञानिक डॉ. दिलीप पांडे ने लगातार दलहनी फसल लगाने से मना किया है. किसानों को अरहर के बाद मक्का, बाजरा या रागी उगाने की सलाह दी गई है. इससे मिट्टी की उर्वरता बढ़ेगी.

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पलामूः झारखंड के पलामू जिले में अरहर की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है और यह दलहनी फसल किसानों के लिए आमदनी का एक बेहतर माध्यम है. हालांकि लगातार एक ही खेत में वर्षों तक अरहर या अन्य दलहनी फसलों की खेती करने से उखठा रोग समेत कई तरह की बीमारियों और कीटों का खतरा बढ़ जाता है. ऐसे में किसानों के लिए कुछ खास तरीके अपनाना बेहद जरूरी होता है. जो कि एक प्रभावी और पर्यावरण अनुकूल उपाय साबित हो सकता है.

क्या रहते हैं कृषि वैज्ञानिक?
पलामू जिले के कृषि वैज्ञानिक डॉ. दिलीप पांडे ने बताया कि यदि किसी खेत में लगातार दलहनी फसल लगाने के कारण उखठा रोग की समस्या उत्पन्न हो रही है, तो किसानों को कुछ समय के लिए उस खेत में फसल बदलकर खेती करनी चाहिए. लगातार एक ही प्रकार की फसल उगाने से मिट्टी में रोग फैलाने वाले जीवाणु और फफूंद की संख्या बढ़ सकती है. इसके साथ ही कीटों का प्रकोप भी बढ़ने लगता है और मिट्टी के पोषक तत्वों का संतुलन प्रभावित होता है.

उन्होंने कहा कि फसल चक्र अपनाने से इस समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है. किसान अरहर की जगह मक्का, बाजरा, रागी या अन्य उपयुक्त फसलों की खेती कर सकते हैं. एक या अधिक मौसम तक फसल बदलने से मिट्टी में मौजूद रोग कारकों का प्रभाव कम होने में मदद मिलती है और अगली फसल के लिए खेत की स्थिति बेहतर बनती है.

मिट्टी की उत्पादन क्षमता होगी मजबूत
उन्होंने कहा कि फसल चक्र का एक बड़ा लाभ यह भी है कि मिट्टी की उत्पादन क्षमता को लंबे समय तक बनाए रखने में मदद मिलती है. अलग-अलग फसलों की जड़ें मिट्टी की अलग-अलग परतों से पोषक तत्व ग्रहण करती हैं. कम गहराई तक जड़ वाली फसल के बाद गहरी जड़ वाली फसल लगाने से मिट्टी के पोषक तत्वों का बेहतर उपयोग होता है. इससे कई परिस्थितियों में उर्वरकों पर निर्भरता और खेती की लागत कम करने में भी मदद मिल सकती है.

उन्होंने कहा कि किसान लंबी अवधि की फसल के साथ अपनी सुविधा के अनुसार कम अवधि वाली फसलों को भी फसल चक्र में शामिल कर सकते हैं. इससे खेत लंबे समय तक खाली नहीं रहता और मिट्टी के कटाव तथा पोषक तत्वों के नुकसान को रोकने में सहायता मिलती है. खाली खेतों में बारिश और हवा के कारण मिट्टी का अपरदन अधिक होता है, जबकि नियमित फसल चक्र अपनाने से भूमि की गुणवत्ता बनाए रखने में मदद मिलती है.

किसानों के लिए जरूरी सलाह
आगे कहा कि जिन किसानों के खेतों में हर साल अरहर या अन्य दलहनी फसल में उखठा रोग की समस्या हो रही है, उन्हें लगातार उसी फसल की खेती से बचना चाहिए. अरहर के स्थान पर एक वर्ष के अंतराल में मक्का, बाजरा, रागी या अन्य गैर-दलहनी फसलों को शामिल किया जा सकता है. इस तरह फसल चक्र अपनाने से रोगों और कीटों का दबाव कम करने, मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने, खेती की लागत घटाने और पर्यावरण के अनुकूल खेती को बढ़ावा देने में मदद मिल सकती है.

About the Author

Prashun Singh

प्रसून सिंह को मीडिया में 7 साल काम करने का अनुभव है. खबरों को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर रोचक अंजाद में पेश करना खासियत है. दैनिक भास्कर अखबार में इंटर्नशिप के साथ करियर की शुरुआत हुई.

इसके बाद ETV Bharat (बिहार)…

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