पवित्र कैलाश पर्वत की यात्रा पर निकले तमिलनाडु के 21 श्रद्धालुओं के लिए नेपाल की यात्रा किसी भयानक सपने जैसी साबित हुई. तिमुरे के उफनते पहाड़ों में स्याब्रू बेस और केरूंग के बीच अचानक आए तूफान ने पूरे रास्ते को एक डेंजर जोन में बदल दिया. मूसलाधार बारिश, भरभराकर गिरता मलबा और खौफनाक जलप्रलय के बीच एक साड़ी और एक कपल की निस्वार्थ बहादुरी ने ऐसा मिरेकल कर दिखाया, जिसने 21 लोगों को मौत के मुंह से बाहर खींच लिया. पहाड़ी ढलान पर पानी का तेज सैलाब बह रहा था और जान बचाने की सिर्फ एक ही जगह थी, ऊपर की ओर कीचड़ से भरी खड़ी ढलान. डर का माहौल ऐसा था कि कोई भी वापस नीचे देखने की हिम्मत नहीं कर रहा था.
जब साड़ी बनी लाइफलाइन और देवदूत बना एक कपल
इसी बीच मायावरम के रहने वाले रत्नाकुमार और उनकी पत्नी पूंगुझली पहले ही सुरक्षित ऊपर पहुंच चुके थे. लेकिन जैसे ही रत्नाकुमार ने देखा कि 4-5 महिलाएं कीचड़ में बार-बार फिसल रही हैं और ऊपर नहीं चढ़ पा रही हैं, वे अपनी जान की परवाह किए बिना वापस नीचे डेंजर जोन में उतर गए. उन्होंने अपनी पत्नी पूंगुझली की साड़ी खोली और उसे एक मजबूत रस्सी की तरह इस्तेमाल किया. ऊपर से पत्नी सहारा दे रही थीं और नीचे से रत्नाकुमार एक-एक महिला को उस साड़ी के सहारे खींचकर ऊपर चढ़ा रहे थे.
“हमारे लिए वो पार्वती और परमेश्वर बन गए”
इस भयानक मंजर को याद करते हुए यात्रा में शामिल शिवरंजनी ने भावुक होकर बताया, “खौफ के उस माहौल में जब अपनी जान बचाकर ऊपर चढ़ा इंसान कभी वापस नीचे नहीं उतरता, तब रत्नाकुमार भाई हमारे लिए वापस नीचे आए. उस पल वे दोनों हमें साक्षात पार्वती और परमेश्वर जैसे लग रहे थे. हमने हाथ जोड़कर उन्हें प्रणाम किया.”
भगवान की कृपा और 5 फीट का फासला
शिवरंजनी ने बताया कि जब उनकी गाड़ी भारतीय दूतावास चेकपॉइंट के पास पानी से घिरी थी, तब एक-एक सेकंड भारी था. अगर गाड़ी महज 5 फीट इधर या उधर होती, तो सब बह जाते. गाड़ी के ड्राइवर साइड का दरवाजा खुला और लोग किसी तरह बाहर निकले. इसके बाद पूरा ग्रुप 2 दिनों तक कड़ाके की ठंड में स्थानीय लोगों द्वारा दिए गए स्नैक्स और पानी के सहारे टिका रहा. बाद में भारतीय दूतावास, विदेश मंत्रालय और तमिलनाडु सरकार के 48 घंटे के ताबड़तोड़ एयर रेस्क्यू ऑपरेशन के जरिए सभी 21 यात्रियों को सुरक्षित काठमांडू से एयरलिफ्ट कर भारत वापस लाया गया.
सवाल-जवाब
रेस्क्यू के दौरान साड़ी का इस्तेमाल किस तरह किया गया?
रत्नाकुमार नाम के यात्री ने अपनी पत्नी की साड़ी को रस्सी (makeshift rope) की तरह इस्तेमाल किया और कीचड़ भरी ढलान में फंसी महिलाओं को एक-एक करके खींचकर सुरक्षित ऊपर पहुंचाया.
यह घटना कहां हुई थी और कितने यात्री फंसे थे?
यह घटना नेपाल के तिमुरे क्षेत्र में हुई थी, जहां पवित्र कैलाश पर्वत की यात्रा से लौट रहे तमिलनाडु के 21 तीर्थयात्री बाढ़ और लैंडस्लाइड में फंस गए थे.