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बारिश के मौसम के साथ राजधानी में चूहों से फैलने वाली बीमारी लेप्टोस्पायरोसिस (रैट फीवर) का खतरा बढ़ गया है। राजधानी के निजी शिशु अस्पताल में पिछले दो महीनों के दौरान करीब 120 मरीज इस संक्रमण के सामने आए हैं। जबकि अस्पताल में इस साल अब तक करीब 140 मामले पहुंच चुके हैं। चिकित्सकों के अनुसार, इनमें बड़ी संख्या बच्चों की है और 5 से 10 वर्ष की उम्र के बच्चों में संक्रमण ज्यादा देखा जा रहा है। हालांकि, आंकड़ों की स्वास्थ्य विभाग ने अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। विशेषज्ञ चिकित्सक के अनुसार, लेप्टोस्पायरोसिस एक बैक्टीरियल संक्रमण है, जो लेप्टोस्पाइरा नामक जीवाणु के कारण होता है। चूहों और कुछ अन्य संक्रमित जानवरों के मल-मूत्र से दूषित पानी या मिट्टी के संपर्क में आने पर यह संक्रमण मनुष्य तक पहुंच सकता है। डॉक्टरों के मुताबिक, दूषित पानी या खाद्य पदार्थों के संपर्क में आने के बाद त्वचा पर मौजूद छोटे घाव के जरिए जीवाणु शरीर में प्रवेश कर सकते हैं। इसलिए बच्चों को जलजमाव वाले स्थानों पर खेलने से रोकना जरूरी है। तेज बुखार से शुरुआत, सिरदर्द और उल्टी भी रिम्स के शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. किरण कुमार बताते हैं कि लेप्टोस्पायरोसिस के शुरुआती लक्षण सामान्य वायरल बुखार जैसे हो सकते हैं। इसमें अचानक तेज बुखार, सिरदर्द, ठंड लगना, शरीर और मांसपेशियों में दर्द, कमजोरी, उल्टी और आंखों में लालिमा जैसी शिकायत हो सकती है। बीमारी गंभीर होने पर किडनी और लिवर पर असर, सांस लेने में परेशानी तथा अन्य जटिलताएं हो सकती हैं। इसलिए लगातार तेज बुखार या उपरोक्त लक्षण होने पर डॉक्टर से सलाह लें। जलजमाव वाले पानी में बच्चों को खेलने से रोकना चाहिए। घर के आसपास चूहों के मल-मूत्र की मौजूदगी हो तो सफाई करते समय सीधे संपर्क से बचना चाहिए; डॉ. किरण कुमार, शिशु रोग विशेषज्ञ, रिम्स इधर, डेंगू के 100 से ज्यादा मरीज, मलेरिया के आंकड़े 20 हजार के करीब झारखंड में एच1एन1 और सामान्य वायरल संक्रमण के बीच मच्छरजनित बीमारियों का खतरा भी बना हुआ है। इस साल अब तक राज्य में डेंगू के 100 से ज्यादा मामलों की पुष्टि हो चुकी है। वहीं मलेरिया के करीब 20 हजार मरीज सामने आ चुके हैं। ऐसे में बुखार के मामलों में केवल फ्लू या वायरल संक्रमण मानकर चलना जोखिम भरा हो सकता है। डेंगू और मलेरिया के शुरुआती लक्षणों में तेज बुखार, बदन दर्द, कमजोरी और सिरदर्द जैसी शिकायतें हो सकती हैं। यही कारण है कि कई बार इनके लक्षण सामान्य वायरल बुखार या फ्लू से मिलते-जुलते नजर आते हैं। हालांकि, डेंगू में तेज बदन दर्द, सिरदर्द, आंखों के पीछे दर्द और कुछ मामलों में प्लेटलेट कम होने जैसी स्थिति सामने आ सकती है। वहीं मलेरिया में बुखार के साथ ठंड लगना और कंपकंपी प्रमुख लक्षणों में शामिल हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, बुखार कई दिनों तक बना रहे, बार-बार तेज हो या मरीज की हालत बिगड़ रही हो तो चिकित्सकीय सलाह लेकर आवश्यक जांच करानी चाहिए। उचित जांच के बाद ही इलाज तय किया जाना चाहिए। रिम्स का आइसोलेशन वार्ड फुल, डेंगू- मलेरिया मरीजों का इलाज जारी रिम्स का आइसोलेशन वार्ड इस समय पूरी तरह भरा हुआ है। यहां डेंगू और मलेरिया से संक्रमित मरीजों का इलाज चल रहा है। मरीजों की संख्या को देखते हुए अस्पताल में निगरानी और उपचार व्यवस्था जारी है। इधर, स्वास्थ्य मंत्री ने की समीक्षा, बोले- झारखंड में एच1एन1 के बढ़ते मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने पूरे राज्य में सतर्कता बढ़ा दी है। स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने शनिवार को स्वाइन फ्लू की स्थिति और तैयारियों की समीक्षा की। उन्होंने सभी सिविल सर्जन, मेडिकल कॉलेजों के अधीक्षक-प्राचार्य और जिला सर्विलेंस अधिकारियों को सतत निगरानी रखने के निर्देश दिए। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि संभावित मरीजों की समय पर पहचान, जांच, उपचार और जरूरत पड़ने पर तत्काल रेफरल की व्यवस्था मजबूत की गई है। उन्होंने कहा कि स्वाइन फ्लू से किसी व्यक्ति की जान नहीं जाने दी जाएगी।
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