देवघर. देवघर की दो बेटियों ने यह साबित कर दिया है कि सफलता के लिए बड़े संसाधनों से ज्यादा जरूरी बड़ा हौसला और परिवार का साथ होता है. आर्थिक परेशानियों और सीमित संसाधनों के बीच अपने खेल के सपने को पूरा करने वाली मुस्कान कुमारी और मौसम कुमारी का चयन अंडर-14 और अंडर-19 नेशनल वॉलीबॉल टीम के लिए हुआ है. दोनों बेटियों की इस उपलब्धि के बाद परिवार के साथ-साथ स्कूल, खेल जगत और देवघर के लोगों में खुशी का माहौल है.
राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने का इन दोनों खिलाड़ियों का सफर संघर्षों से भरा रहा है, लेकिन हर मुश्किल के सामने इनके हौसले और माता-पिता का भरोसा मजबूत साबित हुआ. अब देवघर की ये दोनों बेटियां राष्ट्रीय स्तर पर अपने खेल का दम दिखाने की तैयारी में जुटी हैं और आने वाले दिनों में देश के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलने का सपना देख रही हैं.
पिता ऑटो चलाकर करते हैं परिवार का भरण-पोषण
मुस्कान कुमारी के परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत मजबूत नहीं है. उनके पिता दिवाकर सिंह ऑटो चलाकर पूरे परिवार का भरण-पोषण करते हैं. ऑटो से होने वाली कमाई से घर का खर्च, बच्चों की पढ़ाई और रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करना ही परिवार के लिए एक बड़ी जिम्मेदारी थी. ऐसे में जब बेटी ने वॉलीबॉल खेलने की इच्छा जताई और खेल के मैदान में बेहतर प्रदर्शन करना शुरू किया तो परिवार के सामने एक नई चुनौती खड़ी हो गई.
खेल में आगे बढ़ने के लिए जरूरी संसाधन, अभ्यास और प्रतियोगिताओं में भाग लेने के लिए भी खर्च की जरूरत थी, लेकिन पिता ने आर्थिक मजबूरियों को बेटी के सपनों के बीच नहीं आने दिया. उन्होंने अपनी क्षमता के अनुसार हर संभव कोशिश की कि बेटी को आगे बढ़ने का मौका मिले.
आगे बढ़ता रहा सफर
जब घर की आमदनी कम पड़ने लगी तो मां मनोरमा देवी ने भी सिलाई का काम शुरू कर दिया और पति के साथ कंधे से कंधा मिलाकर बेटियों के सपनों को पूरा करने में जुट गईं. एक तरफ पिता ऑटो चलाकर मेहनत करते रहे तो दूसरी तरफ मां सिलाई मशीन चलाकर परिवार की आमदनी बढ़ाती रहीं और इसी संघर्ष के बीच बेटियों का वॉलीबॉल का सफर आगे बढ़ता गया.
सीमित संसाधनों में की खेल की शुरुआत
परिवार के लोगों का कहना है कि बेटियों को खेल में आगे बढ़ाने के दौरान सिर्फ आर्थिक परेशानियां ही नहीं आईं, बल्कि समाज की बातें भी कई बार सुननी पड़ीं. कुछ लोगों ने बेटियों पर खर्च करने को लेकर सवाल उठाए और कहा कि आखिर बेटियों के खेल पर इतना पैसा खर्च करने से क्या फायदा होगा. लेकिन माता-पिता ने लोगों की बातों को कभी अपनी सोच पर हावी नहीं होने दिया.
मां-बाप का भरोसा रंग लाया
उन्होंने बेटा और बेटी में कोई फर्क नहीं किया और बच्चों की प्रतिभा को पहचानते हुए उन्हें आगे बढ़ने का पूरा मौका दिया. माता-पिता का यही भरोसा आज रंग लाया है और सीमित संसाधनों में खेल की शुरुआत करने वाली मुस्कान और मौसम राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने में सफल हो गई हैं. दोनों खिलाड़ियों की सफलता अब उन परिवारों के लिए भी एक बड़ा संदेश है, जो आर्थिक परेशानी या समाज के डर से बेटियों के सपनों को आगे बढ़ने से रोक देते हैं.
देवघर की मुस्कान और मौसम का हुआ राष्ट्रीय स्तर पर चयन
मुस्कान और मौसम ने खेलो झारखंड के तहत रांची में आयोजित प्रतियोगिता में अपने खेल का शानदार प्रदर्शन किया था. वहां बेहतर प्रदर्शन करने के बाद दोनों खिलाड़ियों को आगे बढ़ने का मौका मिला और फिर उन्होंने एसजीएफआई प्रतियोगिता में भी अपनी प्रतिभा दिखाई. लगातार अच्छे प्रदर्शन और मेहनत के आधार पर झारखंड से राष्ट्रीय स्तर के लिए कुल 12 खिलाड़ियों का चयन किया गया, जिसमें देवघर की मुस्कान और मौसम कुमारी भी शामिल हैं. दोनों के चयन से यह साफ हो गया है कि देवघर और संथाल परगना के बच्चों में खेल प्रतिभा की कोई कमी नहीं है. जरूरत सिर्फ सही मार्गदर्शन, बेहतर प्रशिक्षण और आगे बढ़ने के लिए अवसर की है.
अपनी इस सफलता का श्रेय दिया माता-पिता को
दोनों खिलाड़ियों ने अपनी इस सफलता का श्रेय माता-पिता के साथ-साथ स्कूल की शिक्षिकाओं और वॉलीबॉल एसोसिएशन से जुड़े लोगों को दिया है. उनका कहना है कि खेल के सफर में कई बार मुश्किल हालात सामने आए, लेकिन परिवार और शिक्षकों के सहयोग ने उन्हें कभी हार नहीं मानने दिया. सेंट मैरी उच्च विद्यालय की प्रधानाध्यापिका क्रिस्टीना मुर्मू ने भी दोनों खिलाड़ियों की सफलता पर खुशी जताई है.
उन्होंने कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवार से आने के बावजूद दोनों बेटियों ने जिस तरह मेहनत और लगन के साथ यह मुकाम हासिल किया है, वह दूसरे बच्चों के लिए प्रेरणा है. दोनों के राष्ट्रीय टीम में चयन होने के बाद स्कूल के अन्य बच्चे भी काफी उत्साहित हैं और अब खेल के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए अधिक मेहनत कर रहे हैं.