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सिर्फ एकादशी पर ही खुलते हैं त्रेता के ठाकुर मंदिर के कपाट,...


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अयोध्या की यही विशेषता है कि यहां हर मंदिर अपने आप में एक कथा, एक विश्वास और एक परंपरा को जीवित रखे हुए है. त्रेता के ठाकुर मंदिर भी उसी आस्था का प्रतीक है, जहां सीमित समय के लिए होने वाले दर्शन भक्तों के लिए और भी अधिक विशेष और पुण्यदायी बन जाते हैं.

अयोध्या: आस्था इतिहास और परंपराओं की नगरी अयोध्या अपने भीतर ऐसे कई रहस्य समेटे हुए है जो इसे अन्य तीर्थ स्थलों से अलग पहचान देते हैं. यहां स्थित मंदिरों की विशेषता सिर्फ उनकी प्राचीनता ही नहीं, बल्कि उनसे जुड़ी अनोखी परंपराएं भी हैं. ऐसी ही एक अद्भुत परंपरा से जुड़ा है स्वर्ग द्वार के अंदर स्थित त्रेता के ठाकुर मंदिर है जो पूरे महीने में सिर्फ दो दिन ही श्रद्धालुओं के लिए खुलता है. सरयू तट के समीप स्वर्ग द्वार मोहल्ले में स्थित यह मंदिर धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है.

त्रेता के ठाकुर मंदिर 

त्रेता के ठाकुर नाम से प्रसिद्ध इस मंदिर में भगवान श्रीराम, माता जानकी, लक्ष्मण और हनुमान जी की पूजा की जाती है. मंदिर का इतिहास भी उतना ही रोचक है जितनी इसकी परंपरा. मंदिर के पुजारी सुनील कुमार मिश्र के अनुसार इस मंदिर का मूल निर्माण प्राचीन काल में सरयू नदी के किनारे हुआ था. कहा जाता है कि आठवीं शताब्दी के आसपास यहां एक भव्य मंदिर था. बाद में वर्ष 1680 ईस्वी में मुगल शासक औरंगजेब के समय इस मंदिर को क्षतिग्रस्त कर दिया गया. उस समय जो मूर्तियां वहां स्थापित थीं, उन्हें सुरक्षित रखते हुए वर्तमान स्थान पर स्थापित किया गया. यही स्थान आगे चलकर त्रेता के ठाकुर मंदिर के रूप में प्रसिद्ध हुआ.

महीने केवल दो बार खुलता है मंदिर

इस मंदिर की सबसे विशेष बात इसकी खुलने की परंपरा है. यह मंदिर हर महीने केवल दो बार, यानी दोनों एकादशी के दिन ही खोला जाता है वह भी सिर्फ शाम के समय, जब भक्तों को भगवान के दर्शन करने का अवसर मिलता है. सालों से चली आ रही इस परंपरा का पालन आज भी पूरी श्रद्धा के साथ किया जा रहा है.मान्यता है कि जो भी श्रद्धालु लगातार तीन वर्षों तक हर महीने की दोनों एकादशी के दिन इस मंदिर में आकर दीपक जलाता है.उसकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं. इसी आस्था के कारण दूर-दूर से भक्त इन दो विशेष दिनों का इंतजार करते हैं और मंदिर खुलने पर बड़ी संख्या में यहां पहुंचते हैं.

अयोध्या की यही विशेषता है कि यहां हर मंदिर अपने आप में एक कथा, एक विश्वास और एक परंपरा को जीवित रखे हुए है. त्रेता के ठाकुर मंदिर भी उसी आस्था का प्रतीक है. जहां सीमित समय के लिए होने वाले दर्शन भक्तों के लिए और भी अधिक विशेष और पुण्यदायी बन जाते हैं.

About the Author

Vivek Kumar

विवेक कुमार एक सीनियर जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें मीडिया में 10 साल का अनुभव है. वर्तमान में न्यूज 18 हिंदी के साथ जुड़े हैं और हरियाणा, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की लोकल खबरों पर नजर रहती है. इसके अलावा इन्हें देश-…और पढ़ें



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