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Business Idea: नौकरी छोड़ शुरू किया ये काम! वर्मी कम्पोस्ट ने दिलाई...


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Jalore Organic Farming Success: जालोर के युवाओं ने वर्मी कम्पोस्ट (केंचुआ खाद) के उत्पादन को एक बेहतरीन बिजनेस स्टार्टअप में बदलकर सफलता की नई इबारत लिखी है. जैविक खेती के बढ़ते चलन ने इस ‘काले सोने’ यानी वर्मी कम्पोस्ट की मांग को न केवल स्थानीय स्तर पर, बल्कि गुजरात जैसे बड़े बाजार तक पहुंचा दिया है. इस स्टार्टअप की सबसे बड़ी खासियत इसकी कम लागत और अत्यधिक मुनाफा है, जो इसे ग्रामीण युवाओं के लिए एक आदर्श विकल्प बनाता है. वर्मी कम्पोस्ट न केवल मिट्टी की उर्वरक शक्ति को बढ़ाता है, बल्कि रसायन मुक्त कृषि को भी बढ़ावा देता है. जालोर के इन युवाओं ने साबित कर दिया है कि पारंपरिक खेती के साथ जुड़कर या इससे जुड़ा कोई सूक्ष्म व्यवसाय शुरू करके भी आत्मनिर्भर बना जा सकता है.

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जालौर: जालोर में खेती अब सिर्फ परंपरागत तरीका नहीं रही, बल्कि एक सफल बिजनेस मॉडल के रूप में उभर रही है. यहां के युवा किसान बलवंत लखाणी ने ऑस्ट्रेलियाई केंचुओं की मदद से वर्मी कम्पोस्ट यानी ‘काला सोना’ तैयार कर खेती में नई दिशा दी है. कम लागत और ज्यादा मुनाफे वाले इस मॉडल ने न सिर्फ उनकी किस्मत बदली, बल्कि आसपास के किसानों के लिए भी प्रेरणा का काम किया है.

बलवंत लखाणी बताते हैं कि उन्होंने इस काम की शुरुआत कच्चे गोबर से की. सबसे पहले गोबर को 10 से 15 दिनों तक एक जगह पर इकट्ठा कर उसे अच्छी तरह भिगोया जाता है, ताकि उसमें नमी बनी रहे. इसके बाद करीब 20 फीट लंबी बेड तैयार की जाती है, जिसमें ऑस्ट्रेलियाई केंचुए डाले जाते हैं. ये केंचुए गोबर और जैविक अपशिष्ट को धीरे-धीरे प्रोसेस कर पोषक तत्वों से भरपूर खाद में बदल देते हैं. लगभग दो महीने में यह वर्मी कम्पोस्ट पूरी तरह तैयार हो जाती है.

फसलों में रोग भी कम लगते
इस खाद की खासियत यह है कि इसमें 16 से अधिक पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने और फसल की पैदावार सुधारने में बेहद उपयोगी होते हैं. यही कारण है कि किसान इसे ‘काला सोना’ कहते हैं. इस जैविक खाद के इस्तेमाल से मिट्टी की गुणवत्ता सुधरती है, पानी रोकने की क्षमता बढ़ती है और फसलों में रोग भी कम लगते हैं.

आज बलवंत की तैयार की गई वर्मी कम्पोस्ट की डिमांड जालोर के जीवाणा, बावतरा और बागोड़ा सहित कई क्षेत्रों में तेजी से बढ़ रही है. इतना ही नहीं, उनकी यह खाद अब राजस्थान से बाहर गुजरात तक भी पहुंच रही है, जहां किसान इसे खास तौर पर फलदार फसलों के लिए उपयोग में ले रहे हैं.

किसान अगर इसको अपनाएं तो खेती में अच्छी कमाई कर सकते
किसान बलवंत लखाणी लोकल18 को बताते है कि लंबी पढ़ाई और नौकरी की तलाश में बिताए कई साल, लेकिन जब सफलता नहीं मिली तो हार मानने के बजाय नई राह चुनी. इस काम में लागत बहुत कम आती है और मुनाफा अच्छा मिल जाता है. हम कच्चे गोबर से वर्मी कम्पोस्ट तैयार करते हैं, जो करीब दो महीने में बनकर तैयार हो जाती है. इसकी डिमांड लगातार बढ़ रही है, और सालाना 4 से 5 लाख रुपए तक की आमदनी हो जाती है. मेरा मानना है कि किसान अगर इसको अपनाएं तो खेती में अच्छी कमाई कर सकते हैं.

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Jagriti Dubey

Hi, I am Jagriti Dubey, a media professional with 6 years of experience in social media and content creation. I started my career with an internship at Gbn 24 news channel in 2019 and have worked with many repu…और पढ़ें



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