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सरसों की खेतीः फसल में डालना न भूलें यह एक चीज, वरना...


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सरसों की खेतीः फसल में डालना न भूलें यह एक चीज, वरना घट सकती है तेल की मात्रा

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रबी सीजन में किसान बड़े पैमाने पर सरसों की खेती करते हैं. बेहतर पैदावार और तेल की मात्रा बढ़ाने के लिए सल्फर का इस्तेमाल करना बेहद जरूरी है. किसान अक्सर सल्फर डालना भूल जाते हैं. कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार, बुवाई के 20 से 25 दिन बाद पहली सिंचाई करनी चाहिए.

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पलामूः रबी के मौसम में किसान बड़े पैमाने पर सरसों की खेती करते हैं. सरसों एक प्रमुख तिलहनी फसल है, जिससे किसानों को अच्छी आमदनी हो सकती है. हालांकि, बेहतर उत्पादन के लिए समय पर सिंचाई और संतुलित उर्वरकों का इस्तेमाल करना जरूरी है. ज्यादातर किसान सरसों की खेती में यूरिया, डीएपी और पोटाश का इस्तेमाल तो करते हैं, लेकिन सल्फर डालना भूल जाते हैं. इससे फसल की बढ़वार और बीज में तेल की मात्रा प्रभावित हो सकती है. ऐसे में किसानों को सरसों की खेती के दौरान सल्फर सहित सभी जरूरी पोषक तत्वों का संतुलित इस्तेमाल करना चाहिए.

एक एकड़ में कितनी मात्रा में डालें खाद
क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र चियांकी के कृषि वैज्ञानिक डॉ. प्रमोद कुमार ने बताया कि सरसों की खेती में खाद एवं उर्वरकों का इस्तेमाल मिट्टी की जांच और फसल की जरूरत के अनुसार करना चाहिए. सामान्य तौर पर प्रति एकड़ 80:40:40:20 किलोग्राम नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटाश और सल्फर की मात्रा का लक्ष्य रखा जा सकता है. हालांकि, यह मात्रा अलग-अलग मिट्टी और स्थानीय कृषि अनुशंसाओं के अनुसार बदल सकती है. किसान नाइट्रोजन की पूर्ति के लिए यूरिया, फॉस्फोरस के लिए डीएपी और पोटाश के लिए पोटाश उर्वरक का इस्तेमाल कर सकते हैं. ध्यान रखें कि डीएपी से मिलने वाले नाइट्रोजन को भी कुल नाइट्रोजन की जरूरत में शामिल करना चाहिए.

सल्फर से बढ़ सकती है तेल की मात्रा
आगे कहा कि सरसों की खेती में सल्फर का विशेष महत्व है. यह तिलहनी फसलों में तेल निर्माण और पौधों की सामान्य वृद्धि के लिए जरूरी पोषक तत्व है. किसान अक्सर अन्य उर्वरकों पर ध्यान देते हैं, लेकिन सल्फर का इस्तेमाल नहीं करते. इससे मिट्टी में सल्फर की कमी होने पर फसल की पैदावार और तेल की मात्रा प्रभावित हो सकती है. सामान्य परिस्थितियों में प्रति एकड़ लगभग 10 से 11 किलो सल्फर की जरूरत हो सकती है, लेकिन वास्तविक मात्रा सल्फर युक्त उत्पाद की संरचना और मिट्टी की जांच के आधार पर तय करनी चाहिए.

पहली सिंचाई 20 से 25 दिन में करें
आगे कहा कि सरसों की फसल में सिंचाई का सही समय उत्पादन बढ़ाने में अहम भूमिका निभाता है. सामान्य परिस्थितियों में पहली सिंचाई बुवाई के लगभग 20 से 25 दिन बाद जरूरत के अनुसार की जा सकती है. हालांकि, मिट्टी में नमी और मौसम के अनुसार समय में बदलाव हो सकता है. फूल आने से पहले पर्याप्त नमी बनाए रखना फसल के लिए लाभकारी होता है. खेत में जरूरत से ज्यादा पानी जमा नहीं होने देना चाहिए, क्योंकि इससे पौधों की जड़ों को नुकसान पहुंच सकता है.

सही समय पर यूरिया का छिड़काव करें
सरसों की फसल में यूरिया का इस्तेमाल फसल की नाइट्रोजन जरूरत के अनुसार करना चाहिए. यदि बुवाई के समय पूरी नाइट्रोजन नहीं दी गई है, तो बची हुई मात्रा को कृषि विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार उचित समय पर दिया जा सकता है. सिंचाई के बाद खेत में नमी रहने पर यूरिया का इस्तेमाल अधिक प्रभावी हो सकता है. बिना जरूरत बार-बार यूरिया डालने से बचना चाहिए.

About the Author

Prashun Singh

प्रसून सिंह को मीडिया में 7 साल काम करने का अनुभव है. खबरों को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर रोचक अंजाद में पेश करना खासियत है. दैनिक भास्कर अखबार में इंटर्नशिप के साथ करियर की शुरुआत हुई.

इसके बाद ETV Bharat (बिहार)…

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