![]()
मानसून की बेरुखी का असर इस वर्ष जिले में धान की खेती पर पड़ा है। पिछले साल की तुलना में इस बार 1,942 हेक्टेयर कम जमीन पर धान की खेती हुई है। इसका असर संभावित उत्पादन पर भी दिख रहा है। इस वर्ष जिले में 1 लाख 57 हजार 452 मीट्रिक टन धान का उत्पादन होने
.
इस तरह पिछले वर्ष की तुलना में इस बार 5,826 मीट्रिक टन कम धान उत्पादन का अनुमान है। विदित हो कि जिले में इस वर्ष 56,400 हेक्टेयर में धान की खेती का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। इसके विरुद्ध 52,484 हेक्टेयर में ही धान की खेती हो सकी। यानी लक्ष्य का 93.06 प्रतिशत क्षेत्र ही धान की खेती के दायरे में आ सका। वहीं पिछले वर्ष 54,426 हेक्टेयर में धान की खेती हुई थी।जो निर्धारित लक्ष्य का 96.16 प्रतिशत था।
जून में सामान्य से 123.2 मिमी कम बारिश, अगस्त में मिली राहत: जिले में इस वर्ष मानसून की बारिश पिछले साल की तुलना में काफी कम रही। जून से सितंबर तक कुल 785.9 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में 944.4 मिलीमीटर बारिश हुई थी। इस तरह इस वर्ष 158.5 मिलीमीटर कम बारिश हुई।
मानसून के शुरुआती दो महीनों में बारिश की कमी ने धान की खेती को प्रभावित किया। जून में सामान्य 138.8 मिलीमीटर बारिश के मुकाबले महज 15.6 मिलीमीटर पानी बरसा। यानी सामान्य से 123.2 मिलीमीटर कम बारिश हुई। कृषि कार्यालय से प्राप्त प्रखंडवार आंकड़ों के अनुसार जिले में धान की खेती के लक्ष्य को हासिल करने में प्रखंडों के बीच अंतर रहा है।
रंका और बड़गड़ में निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप शत-प्रतिशत धान की खेती हुई है। इसके विपरीत मझिआंव प्रखंड में सबसे कम 87 प्रतिशत आच्छादन दर्ज किया गया। कांडी में 89 प्रतिशत, जबकि नगर उंटारी और चिनिया में 90 प्रतिशत लक्ष्य हासिल हुआ। भवनाथपुर, बरडीहा और भंडरिया में 95 प्रतिशत, केतार में 96 प्रतिशत तथा डंडई, बिशुनपुरा और खरौंधी में 94 प्रतिशत धान की खेती हुई।