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गोरया आहर की जलधारण क्षमता का आकलन करें




गढ़वा | जिले के बंशीधर नगर प्रखंड के सुलसुलिया गांव में स्थित ऐतिहासिक गोरया आहर की उपेक्षा का मुद्दा सामने आया है। लगभग 250×250 फीट क्षेत्रफल वाले इस जलस्रोत से 100 हेक्टेयर से अधिक कृषि भूमि की सिंचाई होने का दावा किया जा रहा है। इसके बावजूद इसे सोन-कनहर पाइपलाइन योजना से नहीं जोड़े जाने पर समाजसेवी सुधीर कुमार चौबे ने आपत्ति जताई है। चौबे ने जिला प्रशासन, संबंधित विभाग और जनप्रतिनिधियों से आहर की उपयोगिता का आकलन कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि आहर की जलधारण क्षमता का स्थल निरीक्षण कर आकलन किया जाए। इससे सिंचित होने वाली भूमि का सर्वे भी कराया जाए। उन्होंने यह भी मांग रखी कि सोन-कनहर पाइपलाइन योजना से जोड़ने की तकनीकी और व्यावहारिक संभावना की जांच हो। चौबे के अनुसार गोरया आहर स्थानीय किसानों की सिंचाई जरूरतों का प्रमुख स्रोत है। उन्होंने बताया कि गोरया बाबा के धार्मिक स्थल से जुड़े होने के कारण यह गांव की सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा भी है। अगर योजना से जोड़ा गया, तो किसानों को सिंचाई के लिए अतिरिक्त पानी मिल सकता है।



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