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मुख्य सड़क के किनारे बना कचरे का पहाड़, दुर्गंध और धुएं से...




भास्कर न्यूज|लोहरदगा शहर में कचरा प्रबंधन की समस्या गंभीर होती जा रही है। 23 वार्डों वाले नगर परिषद क्षेत्र से प्रतिदिन कई टन कचरा निकल रहा है। इसके आधुनिक कचरा प्रबंधन की अब तक कोई स्थायी व्यवस्था नहीं हो सकी है। स्थिति यह है कि वर्षों पुराने लोहरदगा नगर परिषद के पास आज तक स्थायी कचरा डंपिंग यार्ड नहीं है। इससे लोगों को दुर्गंध, प्रदूषण और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। तेजी से बढ़ती आबादी के साथ शहर से निकलने वाला कचरा लोहरदगा-किस्को मुख्य मार्ग पर ओयना के समीप बनाए गए अस्थायी डंपिंग यार्ड में फेंका जा रहा है। यह मार्ग किस्को और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों को जिला मुख्यालय से जोड़ता है। यह प्रमुख सड़क मार्ग है। यहां प्रतिदिन हजारों लोगों का आवागमन होता है। सड़क किनारे जमा कचरे के विशाल ढेर से उठने वाली दुर्गंध के कारण राहगीरों, वाहन चालकों और आसपास के ग्रामीणों को काफी परेशानी होती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि डंपिंग यार्ड में समय-समय पर कचरे में आग लगा दी जाती है। इससे निकलने वाला धुआं दूर-दूर तक फैल जाता है। धुएं और दुर्गंध के कारण लोगों को सांस लेने में परेशानी होती है। सड़क पर दृश्यता कम हो जाती है। दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। लोगों का आरोप है कि डंपिंग यार्ड में न तो बाउंड्री वॉल की व्यवस्था है। दुर्गंध को नियंत्रित करने के लिए किसी प्रकार के रसायन या केमिकल का नियमित छिड़काव भी नहीं किया जाता। ऐसे में कचरा खुले में बिखरा रहता है। आसपास का वातावरण लगातार प्रदूषित हो रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि प्लास्टिक, मेडिकल एवं अन्य अपशिष्टों से युक्त कचरे का खुले में निस्तारण पर्यावरण और जनस्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। बढ़ती आबादी और शहर के विस्तार के साथ यह समस्या आने वाले समय में और विकराल रूप ले सकती है। ऐसे में नगर परिषद एवं संबंधित विभागों के लिए स्थायी कचरा प्रबंधन व्यवस्था विकसित करना बड़ी चुनौती बन गया है। स्थानीय लोग लगातार यह मुद्दा उठा रहे हैं। वे डंपिंग यार्ड को आबादी और मुख्य सड़क से दूर स्थानांतरित करने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि वर्षों से कचरा निस्तारण की योजनाएं केवल कागजों तक सीमित हैं। जमीनी स्तर पर कोई ठोस पहल दिखाई नहीं दे रही है। इसके बावजूद अब तक समस्या के समाधान की दिशा में कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हो सकी है। लोगों को उम्मीद है कि लंबित प्रक्रियाएं पूरी होंगी। जल्द ही स्थायी कचरा डंपिंग यार्ड और आधुनिक कचरा प्रबंधन प्रणाली विकसित की जाएगी। इससे इस गंभीर समस्या से राहत मिल सकेगी। एजेंसी का कहना है कि स्थायी डंपिंग के लिए जमीन का चयन किया जाना है। इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है।



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