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बड़े पर्दे पर दिखा सदियों पुराना गांव, असलियत में POP और फाइबर...


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सिनेमा का जादू: पर्दे पर दिखा सदियों पुराना गांव, असल में है पीओपी का सेट

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Bollywood Movie Set: सिनेमाई निर्माण कला के तहत फिल्मों में दिखने वाले सदियों पुराने गांव और मंदिर असल में प्लास्टर ऑफ पेरिस, फाइबर और लोहे के ढांचे से तैयार किए जाते हैं. तेलुगु फिल्म रणबली के सेट से सामने आई झलकियों ने इस अनोखी हकीकत को उजागर किया है.

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हैदराबाद: फिल्मों की जादुई दुनिया दर्शकों को अक्सर ऐसी जगहों पर ले जाती है जो देखने में पूरी तरह असली और ऐतिहासिक लगती हैं. सिनेमाघरों में जब हम बड़े-बड़े किले, सदियों पुराने मंदिर और पत्थर की प्राचीन झोपड़ियां देखते हैं, तो यकीन करना मुश्किल होता है कि वे असल में मौजूद नहीं हैं. हाल ही में तेलुगु फिल्म रणबली के भव्य सेट से सामने आई कुछ दिलचस्प झलकियों ने सिनेमाई निर्माण कला और पर्दे के पीछे की इस अनोखी हकीकत को उजागर किया है.

परदे पर ऐतिहासिक गांव के रूप में दिखने वाला यह पूरा इलाका दरअसल आर्ट डायरेक्टर्स और कारीगरों की कड़ी मेहनत का नतीजा है. फिल्म में एक विशाल मंदिर को दिखाया गया है जिसे भद्रमल्लन्ना स्वामी का पवित्र स्थल दर्शाया गया है. देखने में ऐसा प्रतीत होता है. मानो यह सदियों पुराना कोई वास्तविक पत्थर का मंदिर हो, लेकिन इसकी असलियत यह है कि मजबूती के लिए सिर्फ मंदिर का निचला बेसमेंट ही असली सीमेंट से तैयार किया गया है. इसके ऊपर की पूरी संरचना, नक्काशीदार खंभे, भव्य मूर्तियां और सजावटी हिस्से प्लास्टर ऑफ पेरिस और लोहे के मजबूत ढांचों के जरिए गढ़े गए हैं.

पेंट और बनावट का ऐसा तालमेल बिठाया गया
मंदिर के अलावा परिसर में मौजूद कच्ची-पक्की झोपड़ियां भी दर्शकों को हैरत में डालती है. बाहर से देखने पर लगता है कि झोपड़ियों की दीवारें भारी-भरकम चट्टानों और पत्थरों को जोड़कर बनाई गई हैं. हालांकि, पास से देखने पर पता चलता है कि ये दीवारें पूरी तरह फाइबर और पीओपी से बनी खोखली डमी हैं. इसके निर्माण में पेंट और बनावट का ऐसा तालमेल बिठाया गया है कि कैमरे की नजर में ये बिल्कुल असली पत्थरों जैसी दिखाई देती हैं.

खाली जमीन पर एक पूरी काल्पनिक दुनिया को वास्तविक रूप में
इसके साथ ही सेट पर रखे गए विशाल लकड़ी के रथ, पारंपरिक कुआं, पहरेदारों के पुतले और विशालकाय दैत्यों की आकृतियां भी इसी कलात्मक तकनीक का हिस्सा हैं. शूटिंग के दौरान दृश्यों में जान फूंकने के लिए जहां कई प्रॉप्स असली रखे गए, वहीं कई जटिल चीजों को डमी के रूप में ही खूबसूरती से तराशा गया. फिल्म निर्माण की यह तकनीक बताती है कि कैसे कला और तकनीकी समझ के मेल से किसी भी खाली जमीन पर एक पूरी काल्पनिक दुनिया को वास्तविक रूप में खड़ा किया जा सकता है.

About the Author

Jagriti Dubey

मेरा नाम जागृति दुबे है. मीडिया और डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया में पिछले 6 वर्षों से सक्रिय हूं. पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून को मैंने वर्ष 2019 में GBN 24 न्यूज़ चैनल से इंटर्नशिप के साथ शुरुआत देकर एक पेशेव…

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