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सरकार ने कहा-सरयू समेत सभी आरोपियों के खिलाफ आरोप सही पूर्व मंत्री सरयू राय से जुड़े आहार पत्रिका के मुद्रण, प्रकाशन और वितरण में कथित वित्तीय अनियमितता मामले में हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने कहा कि मामले की जांच एसीबी को सौंपने से संबंधित फाइल को कैबिनेट सचिवालय एवं निगरानी विभाग के पास अनिश्चितकाल तक लंबित नहीं रखा जा सकता। कोर्ट ने कहा कि विभाग इस पर जल्दी उचित निर्णय ले। इसके साथ ही कोर्ट ने याचिका निष्पादित कर दी। सुनवाई के दौरान एसीबी की ओर से बताया गया कि याचिका में सरयू राय को पक्षकार नहीं बनाया गया है। जबकि उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर की जांच एसीबी को सौंपने की मांग की गई है। इस पर राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि पुलिस जांच में सरयू राय समेत अन्य नामजद आरोपियों के खिलाफ प्रथमदृष्टया आरोप सही पाए गए हैं। भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत सक्षम प्राधिकार की अनुमति जरूरी है। इसके लिए पुलिस मुख्यालय ने 4 जून 2025 को कैबिनेट सचिवालय एवं निगरानी विभाग से मामले की जांच एसीबी को सौंपने के लिए निर्देश मांगा था। यह प्रस्ताव अभी भी निगरानी के पास है। इसके बाद कोर्ट ने इस पर तत्काल फैसला लेने का निर्देश दिया। मालूम हो कि मनोज सिंह ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर अरगोड़ा थाने में दर्ज केस की जांच सीबीआई या किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराने की मांग की थी। यह एफआईआर 6 सितंबर 2024 को दर्ज हुई थी। आरोप था कि अक्टूबर 2017 से मार्च 2019 के बीच आहार पत्रिका के मुद्रण, प्रकाशन और वितरण के नाम पर 3.38 करोड़ रुपए की सरकारी राशि का दुरुपयोग किया गया।
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