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Nisha Bhagat Death Case: निशा भगत मौत मामले में अब IRS अधिकारी निशा उरांव का बयान सामने आया है. उन्होंने कहा-हमारे समाज ने एक बेटी को आज खो दिया. समाज के लिए लड़ते लड़ते एक बेटी आज दुनिया से चली गई. इसकी उच्च स्तरीय जांच हो. निशा उरांव ने सोशल मीडिया पर निशा भगत के साथ अपनी तस्वीर शेयर कर भावुक श्रद्धांजलि दी है. पूरी खबर विस्तार से आगे पढ़िए.
निशा भगत मौत मामला: IRS अधिकारी निशा उरांव ने उठाई उच्चस्तरीय जांच की मांग
रांची. झारखंड की आदिवासी सामाजिक कार्यकर्ता निशा भगत की मौत के बाद आदिवासी समाज में जहां एक ओर शोक व्याप्त है, वहीं प्रशासन और सरकार के खिलाफ आक्रोश भी है. इस बीच चर्चित आईआरएस अधिकारी निशा उरांव की प्रतिक्रिया भी आई है और उन्होंने इस घटना पर दुख जताते हुए मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है. उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि समाज ने आज एक बेटी को खो दिया, जो अपने समाज के लिए लड़ते-लड़ते दुनिया से चली गई.
निशा उरांव ने क्या कहा?
राजस्व अधिकारी निशा उरांव ने निशा भगत की मौत पर भावुक प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “हमारे समाज ने एक बेटी को आज खो दिया. समाज के लिए लड़ते-लड़ते एक बेटी आज दुनिया से चली गई.” निशा उरांव का कहना है कि घटना की परिस्थितियों की गंभीरता से जांच होनी चाहिए, ताकि पूरी सच्चाई सामने आ सके.
फेसबुक लाइव के बाद हुई निशा भगत की मौत
बता दें कि आदिवासी सामाजिक कार्यकर्ता निशा भगत की मौत 6 नवंबर को रांची के पिठोरिया थाना क्षेत्र में हुई. घटना से पहले वह फेसबुक लाइव पर आई थीं. करीब 10 से 11 मिनट के वीडियो में उन्होंने आदिवासी समाज के अधिकारों, जमीन से जुड़े विवादों और प्रशासन से मदद नहीं मिलने की बात कही थी.बताया जाता है कि फेसबुक लाइव में उन्होंने जमीन माफिया, चरित्र हनन, पुलिस की निष्क्रियता और अकेले संघर्ष की बात कही. लाइव के दौरान उन्होंने पिठोरिया थाना प्रभारी को फोन कर अपनी जान देने की बात भी कही. इसके बाद उनका शव फंदे से लटका मिला. पुलिस उन्हें रिम्स ले गई, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया.
कौन थीं निशा भगत?
निशा भगत आदिवासी समाज के अधिकार, सरना धर्म कोड, धर्मांतरण विरोध और आदिवासी पहचान जैसे मुद्दों को लेकर सक्रिय थीं. वह जमीन से जुड़े मामलों पर भी मुखर होकर अपनी बात रखती थीं और जल-जंगल-जमीन और पेसा कानून लागू कराने की मांग को लेकर सक्रिय थीं. जानकारी के अनुसार, निशा भगत ने बेंगलुरु की नौकरी छोड़कर उन्होंने समाज के लिए संघर्ष चुना था. सितंबर 2025 में उन्हें केंद्रीय सरना समिति की केंद्रीय महिला अध्यक्ष बनाया गया था. इससे पहले वर्ष 2024 में उन्होंने झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (JLKM) के टिकट पर गुमला सीट से विधानसभा चुनाव भी लड़ा था.
परिवार और समाज ने भी उठाए सवाल
निशा भगत की मौत के बाद उनके परिवार और आदिवासी संगठनों ने निष्पक्ष जांच की मांग की है. उनके पिता इंदु भगत ने सीबीआई जांच की मांग करते हुए आरोप लगाया कि उनकी बेटी को परेशान किया जा रहा था. सामाजिक और राजनीतिक संगठनों ने घटना की परिस्थितियों की जांच और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है.
सरकार ने निष्पक्ष जांच का भरोसा दिया
वहीं, पुलिस का कहना है कि मौत के कारणों और फेसबुक लाइव में लगाए गए आरोपों की जांच की जा रही है. ऐसे में अब इस मामले में सबसे अहम सवाल यही है कि निशा भगत की मौत से पहले क्या परिस्थितियां बनीं और उनकी शिकायतों पर क्या कार्रवाई हुई? सरकार ने निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच का भरोसा दिया है. जांच पूरी होने के बाद ही इन सवालों के जवाब सामने आ सकेंगे.