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डॉ. डी.एस. श्रीवास्तव के अनुसार पलामू में बढ़ती गर्मी का सबसे बड़ा कारण जंगलों का तेजी से कम होना है. वर्ष 1951 में पलामू में लगभग 43 प्रतिशत वन क्षेत्र था, जो अब घटकर करीब 7 प्रतिशत रह गया है. जंगल खत्म होने से पहाड़ों की चट्टानें खुली रह गई हैं, जो दिन में तेजी से गर्म होती हैं और रात में जल्दी ठंडी हो जाती हैं. इसी कारण पहले जहां दिन-रात के तापमान में 10 डिग्री का अंतर रहता था, वहीं अब यह….
पलामू: झारखंड का पलामू जिला इन दिनों लगातार बढ़ती गर्मी और बदलते मौसम के कारण चिंता का विषय बना हुआ है. पिछले एक दशक में यहां तापमान तेजी से बढ़ा है, जबकि रात के समय तापमान अचानक नीचे गिर रहा है. दिन और रात के तापमान में बढ़ता अंतर इस इलाके में बड़े जलवायु परिवर्तन का संकेत माना जा रहा है. यहां गर्मी भी प्रचंड पड़ रही है. इससे किसानों के साथ ही आम लोग भी परेशान हो रहे हैं.
देश के सबसे गर्म जिलों में शामिल पलामू
पिछले कुछ वर्षों में कई बार पलामू का तापमान पूरे देश में सबसे अधिक दर्ज किया गया है. वर्ष 2024 में यहां 47.4 डिग्री सेल्सियस तापमान रिकॉर्ड किया गया, जो पूर्वी भारत में सबसे अधिक था. इससे पहले मई 2022 में 46.5 डिग्री और जून 2019 में 47.2 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया जा चुका है. 2023 के बाद भी कई मौकों पर पलामू देश का सबसे गर्म इलाका बना. इस साल भीषण गर्मी पड़ रही है. लगातार तापमान 43 से 44 के बीच देखा जा रहा है.
क्यों बढ़ रही है गर्मी?
विशेषज्ञ डॉ० डी एस श्रीवास्तव ने लोकल18 को बताया कि ये हमारे करतूत का फल मिल रहा है. पलामू तो पहले से ही गर्म क्षेत्र था. अभी और गर्मी बढ़ेगी. वनों का क्षेत्रफल घटना इसका सबसे बड़ा कारण है. पलामू, गढ़वा और लातेहार का इलाका रैन शैडो क्षेत्र में आता है. यह क्षेत्र नेतरहाट, रांची और बिहार के रोहतास पठारी इलाकों से घिरा हुआ है. पलामू तलहटी में स्थित है, जहां बादल कम पहुंचते हैं. इसके साथ ही पलामू से कर्क रेखा भी गुजरती है, जिससे यहां गर्मी स्वाभाविक रूप से अधिक रहती है.
वन कटान बना बड़ी वजह
डॉ. डी.एस. श्रीवास्तव के अनुसार पलामू में बढ़ती गर्मी का सबसे बड़ा कारण जंगलों का तेजी से कम होना है. वर्ष 1951 में पलामू में लगभग 43 प्रतिशत वन क्षेत्र था, जो अब घटकर करीब 7 प्रतिशत रह गया है. जंगल खत्म होने से पहाड़ों की चट्टानें खुली रह गई हैं, जो दिन में तेजी से गर्म होती हैं और रात में जल्दी ठंडी हो जाती हैं. इसी कारण पहले जहां दिन-रात के तापमान में 10 डिग्री का अंतर रहता था, वहीं अब यह 15 से 20 डिग्री तक पहुंच गया है. जो कि रेगिस्तान बनने का संकेत दे रहा है.
क्या रेगिस्तान बनने की आशंका
उन्होंने आगे कहा कि यदि वन क्षेत्र बढ़ाने और जल संरक्षण पर काम नहीं किया गया तो आने वाले समय में पलामू रेगिस्तानी हालात की ओर बढ़ सकता है. लगातार सूखापन, कम बारिश और बढ़ती गर्मी इसके संकेत हैं.
बचाव का उपाय
डॉ. श्रीवास्तव ने बताया कि गांवों की नंगी पहाड़ियों पर बरसात में अपने आप उगने वाले पौधों को तीन साल तक बचा लिया जाए तो पहाड़ियां फिर से हरी-भरी हो सकती हैं. ग्राम सभा प्रस्ताव पास कर पहाड़ियों की सुरक्षा करें तो जलस्तर भी सुधरेगा और खेतों में पानी भी पहुंचेगा. इसके लिए पहाड़ों को संरक्षित करना जरूरी है.
गर्मी को लेकर हाई अलर्ट जारी
पलामू में बढ़ते तापमान को देखते हुए जिला प्रशासन ने हाई अलर्ट जारी किया है. मेडिकल कॉलेज सहित सभी अस्पतालों में बेड रिजर्व किए गए हैं. स्वास्थ्य विभाग ने लोगों के लिए गाइडलाइन जारी कर दोपहर में बाहर न निकलने, पानी पीने और सतर्क रहने की सलाह दी है.
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