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NEET UG Success Story: जानलेवा बीमारी से लड़ते हुए पास किया नीट...


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Anuradha Singh NEET UG Success Story: ‘बेटी है, पढ़ाई पर पैसा क्यों बर्बाद कर रहे हो?’ समाज के ऐसे तानों के बीच भी प्रयागराज की अनुराधा सिंह और उनके परिवार ने हार नहीं मानी. 35 किलो वजन और जानलेवा बीमारी से लड़ते हुए अनुराधा सिंह ने नीट यूजी की तैयारी जारी रखी और आखिरकार एम्स में एडमिशन हासिल कर लिया.

जानलेवा बीमारी से लड़ते हुए पास किया नीट यूजी, सिर्फ 35 किलो रह गया था वजनZoom

Anuradha Singh NEET Story: अनुराधा सिंह ने 2 असफलताओं से भी हार नहीं मानी (फोटो सोर्स- besides_mbbs)

नई दिल्ली (Anuradha Singh NEET UG Success Story). ‘लड़की है, इसकी पढ़ाई पर इतना पैसा क्यों खर्च कर रहे हो? इसकी शादी करा दो!’ उत्तर प्रदेश के प्रयागराज की अनुराधा सिंह के पिता ने परिवार और समाज से इसी तरह के ताने सुने. लेकिन ना तो उन्होंने हिम्मत हारी और ना ही उनकी बेटी ने. प्रयागराज से 40 किलोमीटर दूर शंकरगढ़ ब्लॉक के एक छोटे से गांव से शुरू हुआ यह सफर एम्स देवघर की दहलीज तक जा पहुंचा है. इस बीच अनुराधा सिंह गंभीर रूप से बीमार भी पड़ गई थीं.

अनुराधा सिंह बचपन में गॉड गिफ्टेड या टॉपर स्टूडेंट नहीं थीं. 9वीं तक उनके अंक एवरेज रहे, लेकिन डॉक्टर बनने का सपना उनकी आंखों में साफ था. इसी सपने की खातिर उनके माता-पिता ने गांव छोड़कर शहर का रुख किया. तैयारी के दौरान अनुराधा ने खुद को दुनिया से अलग कर लिया, दोस्त नहीं बनाए और अपना सारा वक्त किताबों को दे दिया. लेकिन सफलता आसान नहीं थी. पहले प्रयास की असफलता और फिर जानलेवा बीमारी के बीच भी अनुराधा ने मुश्किलों के सामने घुटने नहीं टेके. पढ़िए उनकी सक्सेस स्टोरी.

ताने, बीमारी और एम्स का सफर: अनुराधा सिंह की कहानी

छोटे शहरों या गांवों में बसे कई परिवारों में बेटियों को पढ़ाना-लिखाना अब भी बहुत आसान नहीं है. माता-पिता प्रोग्रेसिव सोच के हों भी तो समाज वाले ताने दे-देकर उनका जीना दूभर कर देते हैं. इसी समाज के बीच से अनुराधा सिंह के पिता जैसे लोग भी निकलते हैं, जिन्होंने किसी बात की परवाह किए बिना अपनी बेटी को पढ़ाना जारी रखा. खुद की मेहनत और पिता का विश्वास ही आज अनुराधा सिंह का डॉक्टर बनने का सपना पूरा कर रहा है.

पहले प्रयास में असफलता से मिला सबक

अनुराधा सिंह ने 11वीं क्लास से नीट की तैयारी शुरू कर दी थी. पहले प्रयास में उन्हें 442 अंक मिले. असफलता का सबसे बड़ा कारण यह था कि नीट यूजी की तैयारी के लिए उन्होंने एनसीईआरटी (NCERT) पर ध्यान देने के बजाय कई अलग-अलग किताबों और कोचिंग मटीरियल का इस्तेमाल किया. यहीं से समाज का असली चेहरा सामने आया, जब लोग उनके पिता को अनुराधा की पढ़ाई बंद कर उनकी शादी कराने की सलाह देने लगे.

अनुराधा के पिता बने उनकी सबसे बड़ी ताकत

जब समाज के लोग उनकी पढ़ाई-लिखाई पर ताने दे रहे थे, तब अनुराधा सिंह के पिता ने ढाल बनकर उन्हें संभाला. उन्होंने कहा, बचपन से तुम्हारा सपना डॉक्टर बनने का था तो इतनी जल्दी हार क्यों मान रही हो? पिता के इसी भरोसे ने अनुराधा सिंह को कोटा जाने के लिए प्रेरित किया. कोटा में तैयारी के दौरान कोरोना काल (COVID-19) आ गया. इसी बीच अनुराधा को गंभीर बीमारी ने अपनी चपेट में ले लिया. हालत यह थी कि उनका वजन गिरकर महज 35 किलो रह गया था.

50 बार NCERT पढ़कर नीट यूजी में हुईं सफल

बिस्तर पर पड़ी अनुराधा के लिए उठना भी दूभर था, लेकिन पढ़ाई का जज्बा कम नहीं हुआ. दूसरे प्रयास में उनका स्कोर 597 था, लेकिन 2 सवालों की वजह से सरकारी कॉलेज से चूक गईं. 2 बार की असफलता और बीमारी से टूट चुकी अनुराधा को उनके पिता ने फिर खड़ा किया. इस बार अनुराधा ने अपनी गलतियां सुधारीं. उन्होंने बायो की एनसीईआरटी 50 से ज्यादा बार पढ़ी और 100 से ज्यादा मॉक टेस्ट दिए. आखिरकार, तीसरे प्रयास में 634 अंकों के साथ उन्होंने AIR 7199 हासिल की और एम्स देवघर में एडमिशन लिया.

अनुराधा सिंह besides_mbbs नामक इंस्टाग्राम अकाउंट के जरिए अपनी लाइफस्टाइल से जुड़े वीडियोज शेयर करती रहती हैं. एमबीबीएस करने वाली वह अपने गांव की पहली बेटी हैं.

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Deepali PorwalSenior Sub Editor

Deepali Porwal is a seasoned bilingual journalist with 11 years of experience in the media industry. She currently works with News18 Hindi, focusing on the Education and Career desk. She is known for her versat…और पढ़ें



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