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रातों-रात बनकर तैयार हुआ था यह मंदिर, घंटी में चुनरी बांधने से...


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Dharohar: रांची के पास स्थित देवड़ी मंदिर अपनी प्राचीनता के लिए प्रसिद्ध है. यहां सोलह भुजा वाली माता विराजमान हैं. मान्यता है कि यह मंदिर रातों-रात बनकर तैयार हुआ था. श्रद्धालु यहां घंटी में चुनरी बांधकर मन्नत मांगते हैं. महेंद्र सिंह धोनी की भी इस मंदिर में अटूट आस्था है.

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रांची: झारखंड की राजधानी रांची से लगभग 60 किलोमीटर दूर तमाड़ में स्थित देवड़ी मंदिर अपनी प्राचीनता, अद्भुत वास्तुकला और अटूट आस्था के लिए विश्व प्रसिद्ध है. यह मंदिर न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि इसके निर्माण से जुड़े रहस्य आज भी वैज्ञानिकों और इतिहासकारों के लिए एक पहेली बने हुए हैं. काले पत्थरों से बना यह मंदिर अपनी सुंदरता और आध्यात्मिक शक्ति के कारण हर दिन हजारों श्रद्धालुओं को अपनी ओर खींचता है.

16 भुजा वाली माता का एकमात्र मंदिर
इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यहां विराजमान माता रानी की 16 भुजाओं वाली प्रतिमा है. पूरे झारखंड में यह एकमात्र ऐसा मंदिर है जहां देवी मां इस स्वरूप में दर्शन देती हैं. मंदिर की बनावट में किसी सीमेंट या आधुनिक सामग्री का प्रयोग नहीं दिखता, बल्कि बड़े-बड़े पत्थरों को एक-दूसरे पर रखकर इसे तराशा गया है. मंदिर के स्तंभों (पिलर्स) पर की गई बारीक नक्काशी और प्राचीन कलाकृति इसकी भव्यता में चार चाँद लगा देती है.

इतिहास के गर्भ में छिपे रहस्य
देवड़ी मंदिर का निर्माण कब और किसने कराया, इसके बारे में कोई ठोस प्रमाण मौजूद नहीं है. मंदिर के पुजारी शिव पाहन बताते हैं कि यह मंदिर कितना पुराना है, यह कहना असंभव है. उनके अनुसार, उनके पूर्वजों की कई पीढ़ियों ने इस मंदिर को इसी रूप में देखा है. यहां प्रचलित मान्यताओं में से एक यह है कि यह मंदिर रातों-रात अपने आप प्रकट हुआ था. वहीं, कुछ स्थानीय कहानियों के अनुसार, करीब 300 साल पहले एक राजा को माता ने स्वप्न में दर्शन दिए थे, जिसके बाद उन्होंने जंगल से माता की मूर्ति लाकर इस भव्य मंदिर का निर्माण कराया.

एमएस धोनी की अटूट श्रद्धा और लोकप्रियता
इस मंदिर की ख्याति तब और बढ़ गई जब भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी यहां नियमित रूप से आने लगे. धोनी की इस मंदिर के प्रति अगाध श्रद्धा है। कहा जाता है कि चाहे कोई भी बड़ा टूर्नामेंट हो, धोनी माता का आशीर्वाद लेने देवड़ी मंदिर जरूर पहुंचते हैं. जब भी वे रांची में होते हैं, मंदिर आना उनके शेड्यूल का हिस्सा होता है. धोनी की इसी आस्था ने इस प्राचीन स्थल को युवाओं और पर्यटकों के बीच एक प्रमुख ‘हॉटस्पॉट’ बना दिया है.

मन्नत की चुनरी और अनोखी परंपरा
यहाँ आने वाले श्रद्धालु अपनी मुरादें पूरी करने के लिए एक विशेष परंपरा का पालन करते हैं. मंदिर परिसर में स्थित घंटियों में चुनरी बाँधना मन्नत माँगने का एक अनोखा तरीका है. भक्तों का अटूट विश्वास है कि जो कोई भी श्रद्धापूर्वक घंटी में चुनरी बांधता है, माता उसकी हर इच्छा जल्द पूरी करती हैं. कई श्रद्धालु ऐसे हैं जिनकी मन्नतें पूरी होने के बाद वे यहां हर हफ्ते मत्था टेकने आते हैं. आस्था का यह संगम देवड़ी मंदिर को झारखंड के सबसे जागृत और रहस्यमयी धार्मिक स्थलों में से एक बनाता है.

About the Author

Prashun Singh

मीडिया में 6 साल का अनुभव है. करियर की शुरुआत ETV Bharat (बिहार) से बतौर कंटेंट एडिटर की थी, जहां 3 साल तक काम किया. पिछले 3 सालों से Network 18 के साथ हूं. यहां बिहार और झारखंड से जुड़ी खबरें पब्लिश करता हूं.



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