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भास्कर न्यूज| सरायकेला मरीजों को जीवनदान देने के लिए शुरू की गई झारखंड सरकार की 108 एंबुलेंस सेवा खुद बदहाली की शिकार हो चुकी है। कई एंबुलेंस की छत से बारिश का पानी टपक रहा है, कहीं इंजन इतना खराब है कि वाहन को धक्का देकर स्टार्ट करना पड़ता है, तो कहीं घिसे हुए टायर और ऑक्सीजन सिलेंडर के अभाव में मरीजों की जान जोखिम में डालकर सफर कराया जा रहा है। हालात ऐसे हैं कि चालक एंबुलेंस रवाना करने से पहले ही मरीज के परिजनों को उसकी खराब स्थिति से अवगत करा रहे हैं, ताकि रास्ते में कोई अनहोनी होने पर उन पर सवाल न उठे। यह तस्वीर केवल सरायकेला-खरसावां की नहीं, बल्कि पूरे झारखंड की सरकारी आपातकालीन स्वास्थ्य सेवा की दुर्दशा को उजागर करती है। सरायकेला-खरसावां जिले में 16 लोकेशन पर संचालित 18 एंबुलेंस में से चार पूरी तरह ब्रेकडाउन अवस्था में हैं, जबकि 12 एंबुलेंस अत्यंत जर्जर स्थिति में किसी तरह सड़कों पर दौड़ रही हैं। अधिकांश वाहनों के टायर पूरी तरह घिस चुके हैं। कई एंबुलेंस के इंजन बार-बार फेल हो रहे हैं और उन्हें धक्का देकर स्टार्ट करना पड़ रहा है। कई वाहनों की छत से बारिश का पानी सीधे अंदर टपकता है, जिससे मरीज और उनके परिजन भीगते हुए अस्पताल पहुंचने को मजबूर हैं। स्थिति इतनी गंभीर है कि कई एंबुलेंस में जीवन रक्षक ऑक्सीजन सिलेंडर तक उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में गंभीर मरीजों को अस्पताल पहुंचाने के दौरान किसी भी अप्रिय घटना की आशंका बनी रहती है। एंबुलेंस कर्मचारी अनुसार लंबे समय से एंबुलेंस के रखरखाव और मरम्मत पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिए जाने के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई है। बारिश के मौसम में खराब सड़कों और लगातार उपयोग ने भी वाहनों की हालत और बिगाड़ दी है। अब सवाल यह है कि जब जीवन बचाने वाली एंबुलेंस ही सुरक्षित नहीं हैं, तो आपातकालीन स्वास्थ्य सेवा पर आम लोगों का भरोसा कैसे कायम रहेगा। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार को नई व्यवस्था लागू करने के साथ-साथ एंबुलेंस की गुणवत्ता, नियमित रखरखाव और आवश्यक चिकित्सा उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित करनी होगी, ताकि मरीजों को समय पर सुरक्षित और बेहतर सेवा मिल सके। झारखंड में 108 एंबुलेंस सेवा का संचालन कर रही सम्मान फाउंडेशन के साथ राज्य सरकार का इकरारनामा समाप्त होने जा रहा है। सेवा की गुणवत्ता और बदहाल एंबुलेंसों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने नई एजेंसी के चयन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। राज्य स्तर पर 2 अगस्त को नए इकरारनामे पर हस्ताक्षर होने की संभावना है। नई एजेंसी के चयन के साथ यह उम्मीद भी जुड़ी है कि आपातकालीन स्वास्थ्य सेवा में सुधार होगा और लोगों को बेहतर एंबुलेंस सुविधा मिल सकेगी। इधर, सरायकेला-खरसावां जिले में कार्यरत लगभग दो दर्जन एंबुलेंस चालक और ईएमटी (टेक्नीशियनों) को पिछले तीन महीनों से मानदेय नहीं मिलने से परेशान हैं। नई एजेंसी के कार्यभार संभालने के बाद उनके बकाया भुगतान और भविष्य को लेकर असमंजस बना हुआ है।
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