चाईबासा| जिला समाहरणालय स्थित सभागार में उपायुक्त मनीष कुमार की अध्यक्षता में किसान उत्पादक कंपनियों के सुदृढ़ीकरण, क्षमता संवर्धन और व्यावसायिक विकास को लेकर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया। मौके पर डीसी ने कहा कि एफपीओ का गठन केवल कागजी संगठन बनाने के लिए नहीं हुआ है। अब इन्हें मजबूत बिजनेस मॉडल के रूप में काम करना होगा। कृषि, डेयरी, मत्स्य पालन, वनोपज और बागवानी उत्पादों का उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ उनकी प्रॉपर ब्रांडिंग, पैकेजिंग और प्रभावी मार्केटिंग किया जाए। पारंपरिक खेती के साथ-साथ किसानों को मुनाफा देने वाली हाई वैल्यू फसलों की ओर मोड़ना जरूरी है। इस मौके डीडीसी उत्कर्ष कुमार ने कहा कि वित्तीय वर्ष में जेएसएलपीएस और मनरेगा के सहयोग से जिले में 2 करोड़ रुपए के आम बेचे गए हैं। दीदी कैफे” के जरिए स्थानीय उत्पादों को नया बाजार मिला है। वहीं स्ट्रॉबेरी की खेती बेहद सफल रही है, जिसे अब बड़े पैमाने पर विस्तार दिया जाएगा। भास्कर न्यूज| चाईबासा जिला समाहरणालय स्थित सभागार में उपायुक्त मनीष कुमार की अध्यक्षता में भू-अर्जन (भूमि अधिग्रहण) से संबंधित समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में जिला भू-अर्जन पदाधिकारी सहित संबंधित विभागों के कर्मी उपस्थित थे। बैठक के दौरान जिले में संचालित रेलवे ओवरब्रिज, रेलवे अंडरपास, राष्ट्रीय राजमार्ग तथा पथ निर्माण विभाग की विभिन्न परियोजनाओं के लिए किए जा रहे भू-अर्जन और मुआवजा भुगतान की बिंदुवार समीक्षा की गई। उपायुक्त ने प्रत्येक परियोजना की अद्यतन प्रगति, लंबित मामलों तथा मुआवजा वितरण की स्थिति की जानकारी लेते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। समीक्षा के क्रम में उपायुक्त कहा कि भू-अर्जन के कार्यों में किसी भी प्रकार की शिथिलता या कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि विकास योजनाओं को तय सीमा में पूरा करने के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया निर्धारित नियमों के तहत शीघ्र पूरी की जाएं, ताकि परियोजनाओं में अनावश्यक विलंब न हो। उपायुक्त ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि भू-अर्जन से जुड़े हर मामले में अभिलेखों व दस्तावेजों का गंभीरता से सत्यापन किया जाए। किसी भी स्थिति में गलत, अपूर्ण अथवा संदिग्ध दस्तावेज स्वीकार न हों। रैयतों एवं हितधारकों से प्राप्त सभी कागजातों की विधिवत जांच के बाद ही आगे की कार्रवाई करें, जिससे पूरी प्रक्रिया पारदर्शी व त्रुटिरहित बनी रहे।
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