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बारिश-धूप के खेल ने बढ़ाई किसानों की चिंता! मक्के की फसल पर...


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बदलते मौसम में मक्के की फसल पर कीटों का हमला, समय रहते ऐसे करें बचाव

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मौसम में बदलाव से मक्के की फसल पर कीटों का हमला बढ़ गया है. कृषि वैज्ञानिक डॉ. राजन ओझा ने किसानों को सतर्क रहने की सलाह दी है. कीट नियंत्रण के लिए नीम के घोल या दवाओं का छिड़काव करें. खेतों में जल निकासी की सही व्यवस्था रखें. समय पर बचाव से फसल को सुरक्षित रखा जा सकता है.

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देवघरः झारखंड और बिहार में इन दिनों मौसम का मिजाज लगातार बदला-बदला नजर आ रहा है. कभी अचानक तेज बारिश हो जाती है, तो कुछ ही देर बाद कड़ी धूप निकल आती है. इस तरह के उतार-चढ़ाव भरे मौसम का सबसे ज्यादा असर खेतों में खड़ी फसलों पर पड़ रहा है, खासकर मक्के की खेती करने वाले किसान ज्यादा परेशान है. कई इलाकों में लगातार हो रही बारिश के कारण खेतों में पानी का जमाव हो जा रहा है, जिससे मक्के की फसल को भारी नुकसान झेलना पड़ रहा है. पानी के ठहराव की वजह से मिट्टी में नमी अत्यधिक बढ़ जाती है और यही स्थिति कीटों के पनपने के लिए अनुकूल वातावरण तैयार कर देती है. नतीजतन मक्के के पौधों में कीड़ों का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है, जिससे पौधे कमजोर हो रहे हैं और फसल की गुणवत्ता भी प्रभावित हो रही है.

क्या कहते हैं कृषि वैज्ञानिक?
इस समस्या को लेकर देवघर कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉ. राजन ओझा सर किसानों को सतर्क रहने की सलाह दे रहे हैं. उनका कहना है कि जैसे ही खेतों में कीड़ों का प्रकोप दिखाई दे, वैसे ही तुरंत कदम उठाना बेहद जरूरी है. सबसे पहले किसानों को चाहिए कि वे उचित रासायनिक दवाओं का छिड़काव करें, ताकि कीड़ों को शुरुआती स्तर पर ही खत्म किया जा सके और फसल को ज्यादा नुकसान से बचाया जा सके. हालांकि, कई किसान रासायनिक दवाओं का उपयोग नहीं करना चाहते, ऐसे में उनके लिए भी एक सुरक्षित और प्रभावी विकल्प मौजूद है. किसान नीम के घोल का छिड़काव कर सकते हैं, जो प्राकृतिक तरीके से कीड़ों को नियंत्रित करने में काफी कारगर होता है और इससे फसल या मिट्टी को किसी प्रकार का नुकसान भी नहीं होता.

जल निकाशी की व्यवस्था करें
इसके साथ ही कृषि वैज्ञानिक डॉ. राजन ओझा यह भी बताते हैं कि खेतों में पानी का जमाव बिल्कुल नहीं होने देना चाहिए. यदि खेत में पानी रुकता है, तो वह न सिर्फ कीटों को बढ़ावा देता है, बल्कि पौधों की जड़ों को भी सड़ा सकता है. इसलिए किसानों को चाहिए कि वे अपने खेतों में उचित जल निकासी की व्यवस्था करें, ताकि बारिश का पानी तुरंत बाहर निकल सके. इसके लिए खेतों में नालियां बनाना या पहले से मौजूद निकासी व्यवस्था को दुरुस्त करना बेहद जरूरी है.कुल मिलाकर देखा जाए तो बदलते मौसम के इस दौर में किसानों को ज्यादा सतर्क और जागरूक रहने की आवश्यकता है. समय पर सही कदम उठाकर न सिर्फ कीटों के प्रकोप को रोका जा सकता है, बल्कि फसल को होने वाले बड़े नुकसान से भी बचाया जा सकता है. थोड़ी सी सावधानी और सही जानकारी के साथ किसान अपनी मक्के की फसल को सुरक्षित रख सकते हैं और बेहतर उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं.

About the Author

Prashun Singh

मीडिया में 6 साल का अनुभव है. करियर की शुरुआत ETV Bharat (बिहार) से बतौर कंटेंट एडिटर की थी, जहां 3 साल तक काम किया. पिछले 3 सालों से Network 18 के साथ हूं. यहां बिहार और झारखंड से जुड़ी खबरें पब्लिश करता हूं.



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