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पिछले वर्ष से साइंस का ​रिजल्ट 3% गिरा, कॉमर्स में 2% बेहतर




झारखंड एकेडमिक काउंसिल (जैक) द्वारा घोषित इंटरमीडिएट 2026 के परिणामों ने राजधानी रांची की शिक्षा व्यवस्था का बहुआयामी और कुछ हद तक विरोधाभासी चेहरा भी सामने रखा है। राजधानी होने के नाते रांची से सबसे अधिक परीक्षार्थी परीक्षा में शामिल होते हैं, वहीं तीनों संकाय विज्ञान, वाणिज्य और कला के नतीजे संकेत दे रहे हैं कि शिक्षा का स्तर एकरूप नहीं है। एक ओर विज्ञान संकाय में गिरते परिणाम और राज्य औसत से पीछे रहना सवाल खड़े करता है, तो दूसरी ओर वाणिज्य और कला संकाय में शानदार प्रदर्शन बताता है कि सही रणनीति और फोकस के साथ बेहतर परिणाम संभव हैं। महत्वपूर्ण तथ्य है कि तीनों ही संकायों में छात्राओं ने छात्रों से बेहतर प्रदर्शन कर अपनी शैक्षणिक श्रेष्ठता साबित की। एक ही जिले में तीन अलग ट्रेंड : रांची में इंटर के रिजल्ट में तीन तरह के ट्रेंड सामने आए हैं। पहला साइंस में गिरावट चिंतित करने वाला है। वहीं, कॉमर्स में पास प्रतिशत में उछाल आया है। तीसरा आर्ट्स में स्थिरता व उत्कृष्टता देखने को मिला है। तीनों संकायों में छात्राओं का बेहतर प्रदर्शन यह दर्शाता है कि शिक्षा के प्रति उनकी गंभीरता और निरंतरता अधिक मजबूत है। रांची का रिजल्ट कहता है कि जहां बेटियां शिक्षा की नई तस्वीर गढ़ रही हैं, वहीं विज्ञान संकाय में सुधार के बिना राजधानी की शैक्षणिक साख अधूरी रहेगी। कॉमर्स: बीसी-एमबीसी का दबदबा
कॉमर्स संकाय में रांची का प्रदर्शन लगभग हाई परफेक्शन की स्थिति में दिखा, जहां हर वर्ग में सफलता दर बेहद ऊंची रही। बीसी वर्ग की छात्राएं 99.11% और छात्र 96.04% पास हुए। एमबीसी की छात्राओं का पास प्रतिशत 99% रहा। एसटी वर्ग की छात्राएं 98.11% और छात्र 94.75% पास हुए, यानी संतुलित और मजबूत प्रदर्शन रहा। एससी वर्ग की छात्राएं 97.75% और छात्र 93.87% पास हुए। वहीं समान्य के छात्राएं 96.45% और छात्र 92.76% पास हुए।
आर्ट्स संकाय: एसटी बड़ा आधार, बीसी का तेज प्रदर्शन
आर्ट्स संकाय में रांची जिले के कुल 19,664 विद्यार्थी परीक्षा में शामिल हुए, जो इसे सबसे बड़ा संकाय बनाता है। एसटी वर्ग के 8,306 परीक्षार्थी परीक्षा में पास हुए। बीसी वर्ग की छात्राएं 99.08% और 97.72% छात्र पास हुए हैं, जो तेज प्रदर्शन रहा। समान्य वर्ग की छात्राएं 97.35%, छात्र 94.64% पास हुए हैं। वहीं एमबीसी वर्ग की छात्राएं 98.54%, छात्र 96.76% पास हुए हैं। एसी वर्ग की छात्राएं 98.15% व छात्र 96.40% पास हुए हैं। साइंस : सामान्य को मिली चुनौती रांची जिले में पिछड़ा वर्ग के छात्रों ने बेहतर प्रदर्शन किया है। कुल 2,685 परीक्षार्थियों में से 2,041 सफल रहे। एसटी में 1,980 परीक्षार्थियों में से 1,382 सफल हुए। सामान्य वर्ग में 1,993 में से 1,385 सफल रहे। प्रदर्शन अच्छा रहा, लेकिन अन्य वर्गों की चुनौती अब स्पष्ट दिख रही है। एससी में 295 में से 216 सफल हुए हैं, जो स्थिर प्रदर्शन, लेकिन सुधार की गुंजाइश बनी हुई है। जिले में कुल 4,799 छात्रों ने प्रथम श्रेणी प्राप्त की, जिनमें बीसी (1,728) और एसटी (1,165) का बड़ा योगदान रहा।
4668 में 3199 प्रथम श्रेणी से पास हुए कुल परीक्षार्थी 5680 छात्र सफल हुए, पास का प्रतिशत 73.11% कुल परीक्षार्थी बीसी-एसटी बने उभरते लीडर इंटरमीडिएट (कला, विज्ञान और वाणिज्य) के रिजल्ट ने रांची को लेकर एक अहम और गहरी तस्वीर खींची है। अगर इन नतीजों को जातिगत (कास्ट) आधार पर विश्लेषण किया जाए, तो पता चलता है कि अब पिछड़ा वर्ग (बीसी), अत्यंत पिछड़ा वर्ग (एमबीसी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) के छात्र-छात्राएं न सिर्फ बड़ी संख्या में सफल हो रहे हैं, बल्कि मेरिट में भी अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं। तीनों संकायों आर्ट्स, साइंस और कॉमर्स में हर वर्ग में छात्राओं ने छात्रों से बेहतर प्रदर्शन किया है।
रांची ने अपनी साख और मजबूत की
संत जेवियर्स में सेलिब्रेशन। रांची, गुरुवार 7 मई, 2026 | 6 जैक इंटरमीडिएट साइंस/कॉमर्स रिजल्ट-2026 एनालिसिस : सामान्य को हर वर्ग से मिल रही चुनौती 92.68% 67.97% 94.16% 79.17% 3,199 5,680 97.77% 42 93.37% 76.08% 19 2,087 95.80% 73.11% 1,254 4,799 4,668 7,769
2025 लड़के लड़के लड़कियां प्रथम श्रेणी कुल सफल लड़कियां अनुपस्थित राज्य औसत पिछले वर्ष तृतीय श्रेणी फेल पास प्रतिशत पास प्रतिशत द्वितीय श्रेणी प्रथम श्रेणी कॉमर्स में उच्च पास प्रतिशत और बड़ी संख्या में प्रथम श्रेणी यह दिखाता है कि यहां के विद्यार्थी केवल पास होने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उत्कृष्टता हासिल कर रहे हैं। विशेषज्ञ बताते हैं कि वाणिज्य संकाय रांची के लिए परफॉर्मेंस इंजन साबित हो रहा है। वाणिज्य संकाय में रांची ने अपनी साख को न केवल बरकरार रखा, बल्कि और मजबूत किया है।
राज्य के 82.92% की तुलना में रांची का 73.11% रिजल्ट (10% कम) बताता है कि विज्ञान शिक्षा में खामियां हैं। कोडरमा (90.83%) व लातेहार (93.25%) जैसे जिलों से पिछड़ना दर्शाता है कि संसाधनों के बावजूद यहां अपेक्षित परिणाम नहीं मिले। विशेषज्ञ कहते हैं विज्ञान संकाय में गुणवत्ता, पढ़ाई के स्तर व मॉनिटरिंग में सुधार की जरूरत है।
कोडरमा व लातेहार से पिछड़ी राजधानी



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