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सक्षम के पिता दूधेश्वर मिश्रा ट्यूशन पढ़ाकर अपने परिवार का पालन-पोषण करते हैं, जबकि उनकी माता रीना मिश्रा एक गृहिणी हैं और बच्चों की पढ़ाई पर विशेष ध्यान देती हैं. सीमित संसाधनों के बावजूद परिवार ने सक्षम को हर संभव समर्थन दिया, जो उनकी सफलता की मजबूत नींव बना.
आकाश कुमार/जमशेदपुर: झारखंड के जमशेदपुर की गलियों से निकलकर मेहनत और लगन की मिसाल बन चुके सक्षम मिश्रा आज उन हजारों छात्रों के लिए प्रेरणा हैं, जो बड़े सपने देखते हैं और उन्हें सच करने के लिए दिन-रात जुटे रहते हैं. साधारण परिवार से आने वाले सक्षम ने यह साबित कर दिया कि अगर इरादे मजबूत हों, तो कोई भी मुकाम दूर नहीं होता. सक्षम ने साइंस स्ट्रीम से इंटरमीडिएट की परीक्षा में 95% अंक लाकर पूरे जिले में टॉप किया है. उनकी इस सफलता के पीछे सिर्फ और सिर्फ कड़ी मेहनत, अनुशासन और एक स्पष्ट लक्ष्य रहा है. उन्होंने बताया कि यह उपलब्धि अचानक नहीं मिली, बल्कि इसके लिए उन्होंने लंबे समय तक लगातार पढ़ाई की और खुद पर विश्वास बनाए रखा.
दिलचस्प बात यह है कि सक्षम ने अपनी 10वीं की पढ़ाई जमशेदपुर पब्लिक स्कूल से की थी, जहां उन्होंने 94.2% अंक हासिल किए थे. इसके बाद उन्होंने एक अलग रास्ता चुना. उन्होंने सोचा कि क्यों न सरकारी स्कूल से इंटर की पढ़ाई की जाए. इसी सोच के साथ उन्होंने जमशेदपुर के राज्यकृत आदिवासी प्लस टू उच्च विद्यालय में दाखिला लिया और वहीं से अपनी 12वीं की पढ़ाई पूरी की. यह फैसला उनके लिए एक बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुआ.
उनके विषयवार अंक भी उनकी मेहनत की कहानी खुद बयां करते हैं. मैथ्स में 100, फिजिक्स में 96, केमिस्ट्री में 97, बायोलॉजी में 96 और इंग्लिश में 90 अंक. खासकर गणित में पूरे अंक हासिल करना उनकी गहरी समझ और अभ्यास का प्रमाण है.
सक्षम के पिता दूधेश्वर मिश्रा ट्यूशन पढ़ाकर अपने परिवार का पालन-पोषण करते हैं, जबकि उनकी माता रीना मिश्रा एक गृहिणी हैं और बच्चों की पढ़ाई पर विशेष ध्यान देती हैं. सीमित संसाधनों के बावजूद परिवार ने सक्षम को हर संभव समर्थन दिया, जो उनकी सफलता की मजबूत नींव बना.
सक्षम का सपना है कि वह आगे चलकर एक साइंटिस्ट बनें और रिसर्च के क्षेत्र में अपना नाम रोशन करें. उनका मानना है कि पढ़ाई और सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता. वह कहते हैं, “अगर आप शांत दिमाग और धैर्य के साथ पढ़ाई करते हैं, तो उसका परिणाम जरूर अच्छा मिलता है.”
आज सक्षम मिश्रा सिर्फ एक टॉपर नहीं, बल्कि उन सभी छात्रों के लिए एक प्रेरणा हैं जो संघर्षों के बीच अपने सपनों को जिंदा रखते हैं. उनकी कहानी यह सिखाती है कि मेहनत, सही दिशा और आत्मविश्वास के साथ कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है.
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