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LPG Booking : सिलेंडर बुकिंग पर बॉम्‍बे हाईकोर्ट का बड़ा फैसला! खत्‍म...


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सिलेंडर बुकिंग पर बॉम्‍बे हाईकोर्ट का बड़ा फैसला! खत्‍म होगी जनता की दिक्‍कत

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LPG Booking New Rule : सरकार ने देश में एलपीजी सिलेंडर की सप्‍लाई को बेहतर बनाने और इसकी निगरानी के लिए डिजिटल व्‍यवस्‍था लागू करने का ऐलान किया था. लेकिन, बॉम्‍बे हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को आदेश जारी कहा है कि किसी भी व्‍यवस्‍था से आम आदमी को दिक्‍कत नहीं होनी चाहिए. अदालत के इस फैसले से जनता को राहत मिलेगी और एलपीजी संकट खत्‍म होगा.

बॉम्‍बे हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार और तेल कंपनियों को जारी आदेश में कहा है कि सिलेंडर बुकिंग की प्रक्रिया में जो भी बदलाव किया गया है, उससे जनता को दिक्‍कत नहीं होनी चाहिए. इससे पहले एलपीजी सिलेंडरों के वितरण में डिजिटल नियमों के लागू होने से आम आदमी को असुविधा होने लगी थी. बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर बेंच ने अपने आदेश में कहा है कि प्रत्येक डिलीवरी पर डिलीवरी ऑथेंटिकेशन कोड (डीएसी) अनिवार्य है. इसे सिलेंडर की मॉनिटरिंग आसान बनाने के लिए लागू किया गया है, जो डिजिटल व्‍यवस्‍था आने के बाद खत्‍म करने की बात कही जा रही थी.

अदालत ने केंद्र सरकार और तेल कंपनियों को डिजिटल नियमों के साथ ऑफलाइन गैस बुकिंग और डिलीवरी प्रक्रिया जारी रखने की याचिका पर विचार करने का निर्देश दिया है. यह निर्णय तकनीक के नाम पर आम उपभोक्ताओं को असुविधा न पहुंचाने के उद्देश्य से लिया गया है. टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार, एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने इस संबंध में उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी, जिस पर आदेश जारी किया गया है.

एसोसिएशन के अध्यक्ष जयप्रकाश तिवारी ने बताया कि घरेलू गैस सिलेंडरों के वितरण में ओटीपी आधारित वितरण प्रणाली पर पूरी तरह रोक लगाने से ग्राहकों को कई तरह की दिक्‍कतें हो रही हैं. उन्‍होंने चिंता जताई कि यह सिस्‍टम गैस डिलीवरी को बाधित कर सकता है, जिससे समय पर सिलेंडर की सप्‍लाई नहीं हो सकेगी. खासकर ग्रामीण क्षेत्रों या फिर जहां इंटरनेट का सिग्‍नल बेहतर नहीं है, वहां सिर्फ डिजिटल व्‍यवस्‍था के भरोसे सिलेंडर की सप्‍लाई कई तरह की समस्‍या पैदा कर सकती है.

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सरकारी तेल कंपनियों ने शुरू में सिर्फ 50 फीसदी डिलीवरी के लिए डिजिटल कोड प्रणाली लागू की थी. बाद में इसे बढ़ाकर 95 फीसदी कर दिया गया. हालांकि, 4 अप्रैल, 2026 को व्हाट्सएप पर भेजे गए संदेशों में कहा गया कि 100 फीसदी डिलीवरी केवल डीएसी कोड के माध्यम से ही की जानी चाहिए. अन्यथा वितरकों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. इस अचानक लिए गए फैसले से जमीनी स्तर पर अफरा-तफरी मच गई है.

याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट में तर्क दिया है कि देश में हर उपभोक्ता के पास स्मार्टफोन नहीं है और न ही हर कोई ओटीपी प्रक्रिया से अवगत है. नेटवर्क की समस्याओं और वेबसाइट के बंद होने के कारण उपभोक्ताओं को समय पर संदेश नहीं मिल रहे हैं. इससे ऐसी स्थिति उत्पन्न हो रही है, जहां सिलेंडर का स्टॉक तो उपलब्ध है, लेकिन कोड न होने के कारण डिलीवरी संभव नहीं हो पा रही है. उन्होंने तकनीकी खराबी के कारण डिलीवरी को कैंसिल किए जाने का विरोध किया.

एसोसिएशन ने आरोप लगाया कि पिछले मार्च में 10 दिनों की ‘अवैध आपूर्ति’ अवधि के दौरान ऑनलाइन डेटा और सिलेंडरों के वास्तविक स्टॉक में भारी विसंगतियां थीं. उन्होंने अदालत का ध्यान इस ओर दिलाया कि बुकिंग और डिलीवरी डेटा में हेराफेरी के कारण वितरकों को नुकसान हो रहा था. उन्होंने कहा कि केवल डिजिटल प्रणाली पर निर्भर रहने से रिकॉर्ड बनाए रखना मुश्किल हो रहा था और इन्वेंट्री रिकॉर्ड में विसंगतियां पैदा हो रहीं.

एसोसिएशन की याचिका में पुराने ऑफलाइन सिस्‍टम को जारी रखने की मांग की गई है, जिसके तहत उपभोक्ता सीधे गैस एजेंसियों से सिलेंडर लेते हैं. उनका तर्क है कि इससे उन लोगों को बहुत लाभ होगा जो तकनीक से परिचित नहीं हैं और जिनके पास फोन नहीं है. वितरक मांग कर रहे हैं कि उपभोक्ताओं को डिजिटल प्रमाणीकरण के बिना भी गैस प्राप्त करने का अधिकार होना चाहिए, जैसा कि पहले सिस्‍टम चल रहा था.

हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति अनिल किलोर और न्यायमूर्ति राज वाकोडे की पीठ ने याचिका पर सुनवाई करने के बाद संबंधित अधिकारियों को तीन सप्ताह के भीतर निर्णय लेने का आदेश दिया है. न्यायालय ने कहा है कि तकनीक को बढ़ावा देना अच्छी बात है, लेकिन यह आम आदमी की मूलभूत आवश्यकताओं की कीमत पर नहीं होना चाहिए. लिहाजा डिजिटल सिस्‍टम को इस तरह लागू करना चाहिए, ताकि उपभोक्‍ताओं को परेशानी न हो.

कोर्ट ने अपनी टिप्‍पणी में कहा कि देश में करोड़ों गैस उपभोक्ताओं का लाभ सरकार के फैसले पर निर्भर करता है. अगर ऑफलाइन व्यवस्था को मंजूरी मिल जाती है, तो डिजिटल तकनीक से अपरिचित लोगों को बड़ी राहत मिलेगी. विशेषज्ञों का मानना ​​है कि जब तकनीक और ऑफलाइन दोनों व्यवस्थाएं उपलब्ध होंगी, तभी पारदर्शिता और त्वरित सेवाएं प्रदान की जा सकेंगी. सरकार इस पर क्या फैसला लेती है, यह देखना बाकी है. फिलहाल पूरी उम्‍मीद है कि ग्राहकों के हित में पुरानी व्‍यवस्‍था पर विचार किया जा सकता है.

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