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उन्होंने यह भी बताया कि वट सावित्री व्रत केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि पति-पत्नी के अटूट रिश्ते, विश्वास और समर्पण का प्रतीक है. महिलाएं पूरे विश्वास और श्रद्धा के साथ यह व्रत करती हैं और भगवान से अपने पति के सुखी एवं लंबी आयु वाले जीवन की कामना करती हैं. ऐसे में अगर आप भी नवविवाहित हैं और मलेमास को लेकर असमंजस में हैं, तो….
परमजीत/देवघर: साल भर में कई ऐसे पर्व और व्रत आते हैं, जिन्हें सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य के लिए पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ करती हैं. इन्हीं खास व्रतों में से एक है वट सावित्री व्रत. यह व्रत हिंदू धर्म में बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. खासकर नवविवाहित महिलाओं के लिए इसका महत्व और भी ज्यादा बढ़ जाता है, क्योंकि शादी के बाद पहली बार महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए यह कठिन व्रत रखती हैं. वट सावित्री व्रत में महिलाएं पूरे दिन निर्जला उपवास रखती हैं. अगले दिन सुबह स्नान-ध्यान के बाद वट यानी बरगद के पेड़ के नीचे पूजा-अर्चना करती हैं. महिलाएं वट वृक्ष की परिक्रमा कर कच्चा सूत या कलावा बांधती हैं और सावित्री-सत्यवान की कथा सुनती हैं. मान्यता है कि माता सावित्री अपने तप, भक्ति और दृढ़ संकल्प से अपने पति सत्यवान के प्राण यमराज से वापस ला पाई थी. तभी से यह व्रत पति की लंबी उम्र और अखंड सौभाग्य के प्रतीक के रूप में किया जाता है.
मलमास के कारण इस बार है असमंजस की स्थिति
इस बार वट सावित्री व्रत को लेकर महिलाओं के बीच थोड़ी असमंजस की स्थिति बनी हुई है. इसकी सबसे बड़ी वजह है मलेमास. दरअसल इस साल मलमास लगने जा रहा है और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मलमास में कोई भी नया या शुभ कार्य शुरू करना उचित नहीं माना जाता है. ऐसे में कई नवविवाहित महिलाओं के मन में सवाल उठ रहा है कि क्या मलमास में वट सावित्री व्रत करना सही रहेगा या फिर इसे छोड़ देना चाहिए.
क्या कहते हैं ज्योतिषाचार्य
देवघर के ज्योतिषाचार्य पंडित नंद किशोर मुदगल ने लोकल 18 के संवाददाता से बातचीत करते हुए कहा कि शास्त्रों के अनुसार नवविवाहित महिलाओं को वट सावित्री व्रत बिल्कुल नहीं छोड़ना चाहिए. उन्होंने कहा कि इस वर्ष मलमास की शुरुआत 16 मई की रात से हो रही है, जबकि वट सावित्री पूजा दिन में ही पूरी हो जाएगी. इसलिए इसका प्रभाव इस व्रत पर नहीं पड़ेगा. पंडित नंद किशोर मुदगल के अनुसार, जब मलमास शुरू होने से पहले विवाह जैसे मांगलिक कार्य संपन्न किए जा सकते हैं, तो वट सावित्री व्रत और पूजा भी पूरी श्रद्धा के साथ की जा सकती है. उन्होंने कहा कि यह व्रत नवविवाहित महिलाओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, इसलिए इसे भूलकर भी नहीं छोड़ना चाहिए.
पूरे श्रद्धा के साथ करना चाहिए वटसावित्री व्रत और पूजा
उन्होंने यह भी बताया कि वट सावित्री व्रत केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि पति-पत्नी के अटूट रिश्ते, विश्वास और समर्पण का प्रतीक है. महिलाएं पूरे विश्वास और श्रद्धा के साथ यह व्रत करती हैं और भगवान से अपने पति के सुखी एवं लंबी आयु वाले जीवन की कामना करती हैं. ऐसे में अगर आप भी नवविवाहित हैं और मलमास को लेकर असमंजस में हैं, तो घबराने की जरूरत नहीं है. शास्त्रों और ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस वर्ष वट सावित्री व्रत पूरी श्रद्धा और विधि-विधान के साथ किया जा सकता है.
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