भारतन्यूज़ – टॉप हेडर
News Menu Bar

तेजस-Mk1A 4.5 जेन फाइटर जेट मात्र ₹390 करोड़ में! चीनी J-20 का...


Tejas MK1A Update: भारत का स्वदेशी लड़ाकू विमान कार्यक्रम अब ऐसे मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है, जहां वह सिर्फ इंडियन एयरफोर्स की जरूरत पूरी करने वाला प्लेटफॉर्म नहीं, बल्कि वैश्विक हथियार बाजार का बड़ा खिलाड़ी बन सकता है. एचएएल द्वारा निर्मित तेजस-Mk1A को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दिलचस्पी तेजी से बढ़ रही है. इसकी सबसे बड़ी वजह है इसकी कीमत. इतनी कम कीमत में 4.5 जेनरेशन की आधुनिक क्षमताओं वाला फाइटर जेट अभी कोई दूसरा मुल्क नहीं बना पाया है. करीब 42 मिलियन डॉलर यानी लगभग 390 करोड़ रुपये प्रति विमान की कीमत पर उपलब्ध यह फाइटर जेट अब उन देशों के लिए आकर्षक विकल्प बनता जा रहा है जो पुराने F-5, मिग-21 और एफ-7 जैसे तीसरी पीढ़ी के विमानों को बदलना चाहते हैं.

वैश्विक रक्षा बाजार में फिलहाल 300 से 500 हल्के लड़ाकू विमानों की संभावित मांग है. पश्चिमी देशों के पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ फाइटर बेहद महंगे हैं. उदाहरण के तौर पर अमेरिकी F-35 या चीनी J-20 जैसे प्लेटफॉर्म छोटे और मध्यम रक्षा बजट वाले देशों की पहुंच से बाहर हैं. ऐसे में तेजस-Mk1A खुद को किफायती 4.5 जेनरेशन फाइटर के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रहा है.

आधुनिक तकनीक इस तकनीक की सबसे बड़ी ताकत

तेजस की सबसे बड़ी ताकत उसकी आधुनिक तकनीक है. इसमें AESA रडार, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सूट, आधुनिक एवियोनिक्स और बीवीआर यानी बियॉन्ड विजुअल रेंज मिसाइल क्षमता मौजूद हैं. भारत की स्वदेशी अस्त्र Mk-1 मिसाइल के साथ इसकी मारक क्षमता और बढ़ जाती है. कम ऑपरेटिंग लागत और सिंगल इंजन डिजाइन इसे उन देशों के लिए आदर्श बनाता है जिन्हें सीमित बजट में आधुनिक एयर पावर चाहिए.

अब तक तेजस के निर्यात में सबसे बड़ी बाधा अमेरिकी कंपनी GE F404 इंजन की सप्लाई थी. अमेरिकी कंपनी जीई एयरोस्पेस समय पर इंजन नहीं दे पा रही थी, जिससे इस जेट का प्रोडक्शन प्रभावित हुआ. लेकिन अब स्थिति बदलती दिख रही है. जीई ने 2026-27 से हर साल 20 इंजन सप्लाई करने की प्रतिबद्धता जताई है. इससे विदेशी ग्राहकों का भरोसा बढ़ेगा, क्योंकि रक्षा सौदों में समय पर डिलीवरी बेहद अहम होती है.

भारत सरकार ने भी तेजस कार्यक्रम को बड़ी मजबूती दी है. रक्षा मंत्रालय ने भारतीय वायु सेना के लिए 97 अतिरिक्त तेजस-Mk1A खरीद को मंजूरी दी है. करीब ₹62,000 करोड़ के इस सौदे के बाद कुल ऑर्डर 180 जेट से ज्यादा हो चुके हैं. यह किसी भी विदेशी खरीदार के लिए संकेत है कि भारत इस विमान को लंबे समय तक अपने फ्रंटलाइन फाइटर के रूप में इस्तेमाल करेगा. इससे रखरखाव, अपग्रेड और स्पेयर पार्ट्स की स्थिर व्यवस्था का भरोसा मिलेगा.

भारतीय वायु सेना 180 तेजस मार्क-1ए जेट खरीद रही है.

इन देशों पर फोकस कर रहा एचएएल

एचएएल अब लैटिन अमेरिका, अफ्रीका और दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों पर खास फोकस कर रहा है. मिस्र, नाइजेरिया, बोत्सवाना और ब्राजील जैसे देशों को तेजस की पेशकश की गई है. मिस्र को तो इसे लीड-इन फाइटर ट्रेनर के रूप में भी ऑफर किया गया है. इन देशों को ऐसे मल्टीरोल फाइटर चाहिए जो एयर डिफेंस, ग्राउंड अटैक और समुद्री मिशन कर सकें, लेकिन उनकी लागत नियंत्रण में रहे.

यही वह जगह है जहां चीन का J-20 और पश्चिमी देशों के महंगे जेट मात खा जा रहे हैं. J-20 तकनीकी रूप से उन्नत जरूर है, लेकिन उसकी लागत और रखरखाव खर्च काफी अधिक है. रूस के मिग और सुखोई प्लेटफॉर्म तथा फ्रांस के राफेल जैसे विमान भी महंगे विकल्प माने जाते हैं. तेजस इस गैप को भरने की कोशिश कर रहा है, जहां आधुनिक तकनीक और किफायती कीमत दोनों साथ हैं.

रणनीतिक स्वायत्तता

भारत की एक और बड़ी ताकत उसकी रणनीतिक स्वायत्तता है. कई देश पश्चिमी हथियार सौदों में लगाई जाने वाली सख्त शर्तों और एंड-यूजर मॉनिटरिंग से परेशान रहते हैं. भारत अपेक्षाकृत लचीली शर्तें, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और पश्चिमी व स्वदेशी हथियारों के मिश्रण की सुविधा देने को तैयार है. यही वजह है कि कई विकासशील देशों के लिए भारत एक भरोसेमंद रक्षा साझेदार के रूप में उभर रहा है.

हालांकि, असली परीक्षा अब शुरू होती है. एचएएल को सिर्फ विमान की क्षमता साबित नहीं करनी, बल्कि समय पर उत्पादन, डिलीवरी और मजबूत सपोर्ट सिस्टम भी तैयार करना होगा. यदि भारत यह चुनौती सफलतापूर्वक पार कर लेता है, तो 2026 तेजस कार्यक्रम के लिए निर्णायक साल साबित हो सकता है और भारत वैश्विक फाइटर जेट बाजार में बड़ी ताकत बनकर उभर सकता है.



Source link

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top