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नोएडा के छात्रों की शॉर्ट फिल्म दाल रोटी ने अमेरिका में जीता...


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नोएडा के युवाओं ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि प्रतिभा बड़े बजट और महंगे संसाधनों की मोहताज नहीं होती. अमेरिका के टेक्सास राज्य के ऑस्टिन शहर में आयोजित प्रतिष्ठित कनेक्ट हर इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में नोएडा के छात्रों द्वारा बनाई गई शॉर्ट फिल्म दाल रोटी ने नरेशन कैटेगरी में अवॉर्ड जीतकर भारत का नाम रोशन किया है. इस उपलब्धि के बाद छात्रों के परिवार, कॉलेज और पूरे नोएडा में खुशी का माहौल है.

नोएडाः नोएडा के युवाओं ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि प्रतिभा बड़े बजट और महंगे संसाधनों की मोहताज नहीं होती. अमेरिका के टेक्सास राज्य के ऑस्टिन शहर में आयोजित प्रतिष्ठित कनेक्ट हर इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में नोएडा के छात्रों द्वारा बनाई गई शॉर्ट फिल्म दाल रोटी ने नरेशन कैटेगरी में अवॉर्ड जीतकर भारत का नाम रोशन किया है. इस उपलब्धि के बाद छात्रों के परिवार, कॉलेज और पूरे नोएडा में खुशी का माहौल है.

सीमित बजट में तैयार किया गया फिल्म

सबसे खास बात यह रही कि इस फिल्म को बेहद सीमित बजट और साधारण संसाधनों के साथ तैयार किया गया, लेकिन इसकी दमदार कहानी और भावनात्मक प्रस्तुति ने इंटरनेशनल जजों को गहराई से प्रभावित किया. फिल्म घरेलू हिंसा जैसे गंभीर सामाजिक मुद्दे को संवेदनशील तरीके से सामने लाती है. यही इसकी सबसे बड़ी ताकत बनी.
फिल्म की डायरेक्टर श्रेया हैं, जबकि वरदान ने सिनेमेटोग्राफी की जिम्मेदारी संभाली. सुजॉय और आरव मलिक ने भी कैमरा और विजुअल्स में अहम योगदान दिया. चारों छात्र एक ही कॉलेज में पढ़ाई करते हैं और फिल्ममेकिंग के प्रति उनका जुनून उन्हें इस मुकाम तक लेकर आया.

टीम के सदस्यों ने बताया कि उन्हें एक फिल्म कम्युनिटी के व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए “कनेक्ट हर इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल” की जानकारी मिली थी. यह फेस्टिवल खासतौर पर महिलाओं से जुड़े मुद्दों और उनकी कहानियों को वैश्विक मंच देने के लिए जाना जाता है. इसी सोच के साथ टीम ने ऐसी कहानी चुनी, जो भारतीय समाज के एक संवेदनशील और अक्सर अनदेखे पहलू को उजागर कर सके.

मिडिल क्लास पर बना है फिल्म

दाल रोटी की कहानी भारतीय मध्यमवर्गीय परिवारों की गृहणियों के संघर्ष पर आधारित है. फिल्म में दिखाया गया है कि कैसे कई महिलाएं घरेलू हिंसा और मानसिक दबाव के बीच अपनी जिंदगी जीने को मजबूर होती हैं. बाहर से सामान्य दिखने वाले घरों के भीतर छिपे दर्द और संघर्ष को फिल्म ने बेहद प्रभावशाली तरीके से दर्शाया है. फिल्म बनाना टीम के लिए आसान नहीं था. सीमित बजट के कारण सबसे बड़ी चुनौती शूटिंग के लिए उपयुक्त लोकेशन तलाशना थी. इसके लिए आरव मलिक के घर को ही एक मिडिल क्लास परिवार के घर की तरह तैयार किया गया.

वहीं कलाकारों की व्यवस्था भी टीम ने खुद की. दिल्ली के थिएटर आर्टिस्ट्स को फिल्म में शामिल किया गया, जबकि मुख्य पुरुष किरदार के लिए डायरेक्टर के चाचा को कास्ट किया गया, जो मुंबई में कई टीवी सीरियल और फिल्मों में काम कर चुके हैं.

इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में भेजा

फिल्म पूरी होने के बाद टीम ने इसे इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में भेजा, जहां दुनिया भर से आई फिल्मों के बीच ‘दाल रोटी’ ने अपनी अलग पहचान बनाई और नरेशन कैटेगरी में जीत हासिल की. टीम को सर्टिफिकेट के साथ 2.5 हजार डॉलर का पुरस्कार भी मिला है. टीम का कहना है कि यह उनके फिल्मी सफर की सिर्फ शुरुआत है. भविष्य में वे ऐसे सामाजिक मुद्दों पर और फिल्में बनाना चाहते हैं, जो समाज को सोचने पर मजबूर करें. नोएडा के इन युवाओं की सफलता अब देशभर के छात्रों के लिए प्रेरणा बन गई है.

About the Author

Rajneesh Kumar Yadav

मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें



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