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प्री-पैब: समग्र शिक्षा अभियान के लिए झारखंड ने केंद्र से मांगे ‌



पॉलिटिकल रिपोर्टर | रांची स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने वर्तमान वित्तीय वर्ष में समग्र शिक्षा अभियान (एसएसए) के लिए 2400 करोड़ रुपए का प्रस्ताव केंद्र सरकार को दिया है। इसमें रेकरिंग और नॉन-रेकरिंग दोनों तरह के खर्च शामिल हैं। दिल्ली में मंगलवार को आयोजित प्री-पैब (प्री-प्राजेक्ट एप्रूवल बोर्ड) की बैठक में झारखंड के शिक्षा अधिकारियों ने यह प्रस्ताव दिया। इस प्रस्ताव में पूर्व की चल रही योजनाओं के लिए 600 करोड़ रुपए, जबकि वर्तमान वित्तीय वर्ष के लिए 1800 करोड़ रुपए की मांग की गई है। प्री-पैब की बैठक में स्कूलों के लिए बुनियादी ढांचे दुरुस्त करने, स्मार्ट क्लास और आधुनिक लैब के लिए अतिरिक्त फंड की मांग की गई है। इस बार अब तक कोई नई योजना शामिल नहीं हुई है। हालांकि, झारखंड के शिक्षा अधिकारी इस बात पर जोर दे रहे हैं कि 14 मई को होनेवाली पैब की बैठक में कोई न कोई नई योजना को मंजूरी दी जाए। पिछली बार स्कूल ग्रांट नहीं मिली थी, पर अधिकारियों ने उम्मीद जताई है कि इस बार स्कूल ग्रांट के लिए 120 करोड़ रुपए मिलेंगे। एसएसए में केंद्र और राज्य की 60:40 की हिस्सेदारी होती है। ‘प्री-पैब’ की बैठक में राज्य के प्रस्तावों की तकनीकी समीक्षा की गई। अब ” पैब’ की बैठक में अंतिम निर्णय होगा। इस सत्र में कक्षा 1 और 2 की पुस्तकों के लिए आवश्यक फंड की मांग झारखंड ने कक्षा 1 और 2 के लिए अपना नया राज्य आधारित पाठ्यक्रम और पाठ्य पुस्तकें तैयार की हैं। इस सत्र (2026-27) में इनके वितरण और इसके लिए आवश्यक फंड की मांग की गई है, जो इस प्री-पैब की बैठक में एक बड़ा तकनीकी बिंदु रहा। इन क्षेत्रों पर फोकस : स्मार्ट क्लास, व्यावसायिक शिक्षा, शिक्षक प्रशिक्षण, लैब सुदृढ़ीकरण व ड्रॉप-आउट रेट कम करना। एसएसए के प्रभावी क्रियान्वयन में प्रोजेक्ट एप्रूवल बोर्ड काफी निर्णायक समग्र शिक्षा अभियान के प्रभावी क्रियान्वयन में प्रोजेक्ट एप्रूवल बोर्ड की भूमिका केंद्रीय और निर्णायक होती है। यह बोर्ड केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के स्तर पर काम करने वाली सर्वोच्च संस्था है, जो राज्यों की योजनाओं को अंतिम रूप देती है। प्रत्येक राज्य और केंद्र शासित प्रदेश हर साल अपनी वार्षिक कार्ययोजना और बजट तैयार करते हैं। पैब इन प्रस्तावों की समीक्षा करता है और यह तय करता है कि किस मद में कितनी राशि आवंटित की जाएगी। वित्तीय वर्ष स्वीकृत राशि 2023-24 2279.16 करोड़ 2024-25 2331.36 करोड़ 2025-26 2485.40 करोड़ समग्र शिक्षा अभियान में राशि लैप्स नहीं होती है, बल्कि वह अगले वर्ष भी खर्च की जा सकती है। मंगलवार की बैठक में पिछले वर्ष खर्च नहीं हो सकी 600 करोड़ की राशि के समायोजन पर केंद्र और राज्य के बीच तकनीकी सहमति बनाने का प्रयास हुआ।



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