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Tree Based Farming: पलामू के कृषि विशेषज्ञ डॉ. कौशल किशोर जायसवाल ने किसानों को पारंपरिक खेती के साथ इमारती और फलदार वृक्षों की खेती अपनाने की सलाह दी है. उन्होंने बताया कि बरसात का मौसम सागवान, शीशम और गम्हार जैसे इमारती पौधों के रूट (स्टंप) लगाने के लिए सबसे उपयुक्त समय है. वहीं, अमरूद, नींबू, कटहल, अनार और केला जैसे फलदार पौधों के लिए ग्राफ्टिंग तकनीक अपनानी चाहिए.
पलामू: बरसात का मौसम किसानों के लिए केवल धान, मक्का या दलहन की खेती तक सीमित नहीं है. बदलते समय में पारंपरिक खेती के साथ इमारती और फलदार वृक्षों की खेती भी किसानों के लिए लाभ का बेहतर विकल्प बन रही है. कम लागत, लंबे समय तक बेहतर आय और भविष्य की आर्थिक सुरक्षा को देखते हुए वृक्ष आधारित खेती तेजी से लोकप्रिय हो रही है. कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसान सही पौधों का चयन करें और वैज्ञानिक तकनीक अपनाएं, तो अपनी जमीन से कई गुना अधिक मुनाफा कमा सकते हैं.
इमारती पौधे लगाने का सबसे अच्छा समय
कृषि विशेषज्ञ डॉ. कौशल किशोर जायसवाल ने बताया कि वर्तमान समय इमारती पौधों के रूट (स्टंप) लगाने के लिए सबसे उपयुक्त मौसम है. इस तकनीक में पौधे के तने को जड़ सहित तैयार कर दोबारा लगाया जाता है. इससे पौधे की बढ़वार तेज होती है. पौधा सीधा और मजबूत विकसित होता है. सागवान, शीशम और गम्हार जैसे इमारती वृक्षों में यह तकनीक काफी सफल मानी जाती है. किसान इन पौधों को खेत की मेड़ या किनारों पर लगाकर मुख्य फसल के साथ अतिरिक्त आय का स्रोत तैयार कर सकते हैं.
फलदार पौधों के लिए अपनाएं ग्राफ्टिंग तकनीक
डॉ. जायसवाल ने बताया कि रूट तकनीक केवल इमारती पौधों के लिए उपयुक्त है. जबकि फलदार पौधों के लिए ग्राफ्टिंग तकनीक अपनाई जाती है. उन्होंने कहा कि पलामू जैसे क्षेत्रों में किसान अमरूद, नींबू, कटहल, अनार, केला और उपयुक्त किस्म के सेब की खेती कर सकते हैं. इससे खेती में विविधता आएगी. किसानों को अलग-अलग समय पर आय भी प्राप्त होगी. यह अतिरिक्त और बेहतर कमाई का अच्छा माध्यम साबित हो सकता है.
आम की जगह बेल की खेती होगी ज्यादा फायदेमंद
डॉ. जायसवाल ने कहा कि आम की बागवानी लंबे समय से की जा रही है. लेकिन यदि किसान इसकी जगह बेल की व्यावसायिक खेती करें, तो अधिक लाभ कमा सकते हैं. बेल एक औषधीय पौधा है. इसकी बाजार में लगातार मांग बनी रहती है. इसका उपयोग आयुर्वेदिक दवाओं के निर्माण में किया जाता है. इसलिए यह किसानों के लिए बेहतर निवेश साबित हो सकता है.
15 से 30 साल में लाखों की आमदनी
उन्होंने बताया कि शीशम, गम्हार और महोगनी जैसे इमारती वृक्ष 15 से 30 वर्षों में पूरी तरह तैयार हो जाते हैं. इसके बाद इनकी लकड़ी से किसानों को लाखों रुपये की आमदनी हो सकती है. इन पेड़ों की लकड़ी की बाजार में हमेशा अच्छी मांग रहती है. कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसान अभी से वैज्ञानिक तरीके से वृक्ष आधारित खेती की योजना बनाएं, तो आने वाले वर्षों में यह उनकी स्थायी आय का मजबूत आधार बन सकती है. उन्होंने किसानों से पारंपरिक खेती के साथ वृक्षारोपण को जोड़ने की अपील की. उनके अनुसार, यही भविष्य की टिकाऊ, लाभकारी और सुरक्षित कृषि का सबसे प्रभावी मॉडल है.
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न्यूज़18इंडिया में कार्यरत हैं. आजतक से रिपोर्टर के तौर पर करियर की शुरुआत फिर सहारा समय, ज़ी मीडिया, न्यूज नेशन और टाइम्स इंटरनेट होते हुए नेटवर्क 18 से जुड़ी. टीवी और डिजिटल न्यूज़ दोनों विधाओं में काम करने क…
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