Last Updated:
अगले हफ्ते पृथ्वी के नजदीक से एस्टेरॉयड गुजरने जा रहा है. नासा और वैज्ञानिक इस घटना पर पैनी नजर बनाए हुए हैं. वैज्ञानिकों ने बताया कि क्षुद्रग्रह 2026 JH2 अगले हफ्ते पृथ्वी से लगभग 90 हजार किलोमीटर की दूरी से गुजरेगा, जो अगर टकरा गया तो शहर के शहर नष्ट कर देगा, हालांकि ऐसे टकराव की आशंका नहीं है.
अगले हफ्ते एक बड़ी मुसीबत आ रही है. एक बड़ा एस्टेरॉयड धरती के बेहद करीब से गुजरने वाला है. अगर यह धरती से टकरा गया तो बड़ा विध्वंशकारी हो सकता है. यह एस्टेरॉयड कई शहरों को अपनी जद में लेने की क्षमता रखता है. वैज्ञानिकों की मानें तो अगर यह धरती पर गिरा तो पूरे के पूरे शहर को तबाह कर सकता है.
वैज्ञानकों ने 2026 JH2 नाम का यह नया एस्टेरॉइड हाल ही में खोजा है और इसकी निगरानी की जा रही है. अब अगले हफ्ते यह एस्टरॉयड धरती के बहुत करीब से गुजरेगा. इसकी दूरी करीब 90 हजार किलोमीटर बताई जा रही है तो वैज्ञानिकों के अनुसार काफी नजदीक है. स्कूल बस के आकार के इस क्षुद्रग्रह को NASA और अंतरिक्ष वैज्ञानिक बारीकी से ट्रैक कर रहे हैं.<br />(AI से बनाई सांकेतिक तस्वीर)
यह एक अपोलो की तरह का धरती का नजदीकी जिसका रास्ता पृथ्वी की कक्षा को पार करता है. एरिजोना के माउंट लेमन सर्वे ने इसे पहचाना था. फिलहाल इसकी अनुमानित चौड़ाई 16 से 35 मीटर के बीच बताई जा रही है. छोटा होने पर यह बस जितना और बड़ा होने पर कई मंजिला इमारत जितना लग सकता है. हालांकि अगर यह टकराकर धरती पर गिरता है तो पूरे शहर को खत्म कर सकता है.<br />(AI इमेज)
Add News18 as
Preferred Source on Google
यह एक अपोलो की तरह का धरती का नजदीकी जिसका रास्ता पृथ्वी की कक्षा को पार करता है. एरिजोना के माउंट लेमन सर्वे ने इसे पहचाना था. फिलहाल इसकी अनुमानित चौड़ाई 16 से 35 मीटर के बीच बताई जा रही है. छोटा होने पर यह बस जितना और बड़ा होने पर कई मंजिला इमारत जितना लग सकता है. हालांकि अगर यह टकराकर धरती पर गिरता है तो पूरे शहर को खत्म कर सकता है.
यह क्षुद्रग्रह पृथ्वी से महज 90,000 किलोमीटर की दूरी से गुजरेगा. यह दूरी चंद्रमा की औसत दूरी का लगभग एक-चौथाई है. खगोलीय मानकों में यह बहुत करीबी फ्लाईबाय माना जा रहा है. हालांकि वैज्ञानिकों का कहना है कि इसके पृथ्वी से टकराने की आशंका नहीं है. इतनी दूरी भी बचाव के लिए काफी है.
दिन में सुबह 8-9 बजे के आसपास यह क्षुद्रग्रह चंद्रमा के भी करीब से गुजरने वाला है. वैज्ञानिक इसकी गति और रास्ते को समझने के लिए लगातार नई जानकारी जुटा रहे हैं. यह घटना वैज्ञानिकों के लिए बड़ा मौका है. इससे छोटे क्षुद्रग्रहों के व्यवहार को बेहतर समझा जा सकेगा.
वैज्ञानिक कहते हैं कि ऐसी करीबी मुठभेड़ें ग्रह रक्षा अनुसंधान के लिए बहुत उपयोगी होती हैं. वैज्ञानिक इससे क्षुद्रग्रह की कक्षा, आकार और सूर्य के प्रकाश के प्रभाव को समझ पाते हैं. भविष्य में खतरनाक घटनाओं के घटने से पहले ही पहचानने की क्षमता भी बढ़ेगी.
विशेषज्ञों ने बताया कि यह क्षुद्रग्रह नंगी आंखों से नहीं दिखेगा क्योंकि इसकी चमक magnitude 11.5 तक ही रहेगी. अच्छे टेलीस्कोप से इसे देखा जा सकता है. चूंकि वर्चुअल टेलीस्कोप प्रोजेक्ट जैसे संगठन इस फ्लाईबाय की लाइव स्ट्रीमिंग भी करने वाले हैं. लिहाजा दुनिया भर के लोग इसे ऑनलाइन देख सकेंगे.
2026 JH2 जैसे छोटे एस्टेरॉयड हमें याद दिलाते हैं कि हमारे सौर मंडल में कितनी चट्टानी वस्तुएं घूम रही हैं. ज्यादातर इनका पृथ्वी से कोई खतरा नहीं होता. फिर भी NASA और विश्व भर के वेधशालाएं इन्हें लगातार निगरानी में रखती हैं. निरंतर निगरानी ही हमारी सुरक्षा का सबसे अच्छा तरीका है.