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कैश देखकर ED भी रह गई थी हैरान, मंगानी पड़ी थीं कई...


रांची. झारखंड की राजनीति में एक बार फिर पूर्व मंत्री आलमगीर आलम चर्चा के केंद्र में हैं. करीब दो साल तक जेल में रहने के बाद आलमगीर आलम आज रांची के होटवार जेल से जमानत पर रिहा हो गए. सुप्रीम कोर्ट से राहत मिलने के बाद उनके समर्थकों में भारी उत्साह देखने को मिला. रिहाई से पहले ही रांची के धुर्वा स्थित उनके आवास को फूलों से सजाया गया था और बड़ी संख्या में कार्यकर्ता उनके स्वागत के लिए जुट गए थे. जैसे ही आलमगीर आलम जेल से बाहर आए, समर्थकों ने फूल-माला पहनाकर उनका जोरदार स्वागत किया.

बता दें, ईडी की टीम ने 6 मई 2024 को रांची में आलमगीर आलम कई ठिकानों पर छापेमारी की थी. आलमगीर आलम के ठिकानों पर ईडी की रेड में 32.2 करोड़ कैश बरामद हुआ था. इसके बाद झारखंड के बहुचर्चित टेंडर कमीशन घोटाला मामले में ED ने आलमगीर आलम को गिरफ्तार किया था. इस दौरान उनके करीबी और निजी सचिव संजीव लाल से जुड़े ठिकानों से भारी मात्रा में नकदी बरामद हुई थी. सबसे बड़ी बरामदगी संजीव लाल के सहायक जहांगीर आलम के घर से हुई, जहां से ED ने करीब 32.2 करोड़ रुपये कैश जब्त किए थे. इसके अलावा अन्य जगहों से भी लाखों रुपये और कथित लेन-देन से जुड़ी डायरी बरामद की गई थी.

कौन हैं आलमगीर आलम?

आलमगीर आलम झारखंड कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रहे हैं और राज्य सरकार में मंत्री पद भी संभाल चुके हैं. संथाल परगना क्षेत्र में उनकी मजबूत राजनीतिक पकड़ मानी जाती है. वे लंबे समय तक पाकुड़ और आसपास के इलाकों की राजनीति में प्रभावशाली चेहरा रहे हैं. उनकी पत्नी निशात आलम फिलहाल पाकुड़ से विधायक हैं. कांग्रेस संगठन और स्थानीय राजनीति में आलमगीर आलम को एक बड़े मुस्लिम चेहरे के रूप में देखा जाता रहा है.

टेंडर कमीशन घोटाले में आया था नाम

आलमगीर आलम का नाम उस वक्त सुर्खियों में आया जब प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कथित टेंडर कमीशन घोटाले में बड़ी कार्रवाई की थी. जांच एजेंसियों का आरोप था कि सरकारी टेंडर दिलाने के बदले कमीशन वसूला जा रहा था. इसी मामले में ईडी ने उनके निजी सचिव (PS) समेत कई ठिकानों पर छापेमारी की थी. छापेमारी के दौरान भारी मात्रा में नकदी बरामद होने के बाद यह मामला राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आ गया था. जांच के बाद आलमगीर आलम पर शिकंजा कसता गया और उन्हें मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा. बाद में उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था. इस मामले में निचली अदालत से उन्हें राहत नहीं मिली, जिसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया.

सुप्रीम कोर्ट से मिली राहत

करीब दो साल जेल में रहने के बाद 11 मई को सुप्रीम कोर्ट से आलमगीर आलम को जमानत मिली. कोर्ट से राहत मिलने के बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं और समर्थकों में खुशी की लहर दौड़ गई. पिछले दो दिनों से उनके धुर्वा स्थित सरकारी आवास पर समर्थकों का जमावड़ा लगा हुआ था. साहिबगंज, पाकुड़ और संथाल परगना के कई जिलों से कार्यकर्ता रांची पहुंचे थे.

फूलों से सजा आवास, समर्थकों में उत्साह

रिहाई से पहले ही आलमगीर आलम के सरकारी आवास को फूलों और सजावट से तैयार किया गया था. समर्थक बुके और फूल-मालाएं लेकर उनके इंतजार में खड़े दिखे. कई कार्यकर्ताओं ने कहा कि उन्हें अपने नेता की वापसी का लंबे समय से इंतजार था. समर्थकों का कहना है कि आलमगीर आलम क्षेत्र के बड़े नेता हैं और उनकी वापसी से कार्यकर्ताओं में नया उत्साह आया है.

जेल से बाहर आते ही लगा समर्थकों का हुजूम

होटवार जेल के बाहर आलमगीर आलम की एक झलक पाने के लिए भारी भीड़ जुटी रही. जेल से बाहर निकलते ही समर्थकों ने नारेबाजी शुरू कर दी. उनकी पत्नी और विधायक निशात आलम भी मौके पर मौजूद रहीं. आलमगीर आलम जेल से सीधे अपने धुर्वा स्थित आवास पहुंचे, जहां समर्थकों ने उनका भव्य स्वागत किया.

छापेमारी में मिला था करोड़ों का कैश

ईडी की कार्रवाई के दौरान आलमगीर आलम के निजी सचिव संजीव लाल और उससे जुड़े ठिकानों से करीब 35 करोड़ रुपये से ज्यादा नकद बरामद किया गया था. सबसे ज्यादा चर्चा उस वक्त हुई जब एक फ्लैट से नोटों के बंडल भरे बैग और अलमारियां मिली थीं. कैश गिनने के लिए मशीनें मंगानी पड़ी थीं और कई घंटों तक नोटों की गिनती चली थी. जांच एजेंसी का दावा था कि यह रकम कथित टेंडर कमीशन और अवैध लेनदेन से जुड़ी हो सकती है. इसी बड़ी बरामदगी के बाद झारखंड की राजनीति में भूचाल आ गया था और आलमगीर आलम पर राजनीतिक दबाव भी बढ़ गया था.



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