भारतन्यूज़ – टॉप हेडर
News Menu Bar

NEET Paper Leak Biwal Family Rajasthan: 12वीं में बमुश्किल पास हुए थे...


नई दिल्ली (NEET Paper Leak 2026). नीट यूजी परीक्षा में हुए कथित पेपर लीक मामले की परतें जैसे-जैसे खुल रही हैं, वैसे-वैसे बेहद चौंकाने वाले और दिलचस्प मामले सामने आ रहे हैं. CBI की रडार पर इस समय राजस्थान के सवाई माधोपुर का एक ऐसा परिवार है, जिसके 5 बच्चों ने इस बेहद कठिन परीक्षा में ‘असाधारण’ स्कोर हासिल किया. ‘बिवाल परिवार’ के नाम से चर्चित इस कुनबे के 3 सदस्यों- दिनेश बिवाल, मांगीलाल बिवाल और विकास बिवाल को सीबीआई पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है.

जांच में सामने आया कि इस परिवार के जो बच्चे स्कूल-कॉलेज की सामान्य परीक्षाओं में बमुश्किल पास होते थे, उन्होंने नीट जैसी मेडिकल प्रवेश परीक्षा में टॉपर्स वाले नंबर हासिल कर लिए. CBI के हाथ लगे सबूत इशारा करते हैं कि यह सफलता किसी कड़ी मेहनत का नतीजा नहीं, बल्कि पेपर लीक और सॉल्वर गैंग के सुनियोजित खेल की देन थी. दिनेश और मांगीलाल बिवाल पर आरोप है कि उन्होंने मोटी रकम के बदले न केवल अपने परिवार के बच्चों को लीक प्रश्नपत्र मुहैया कराया, बल्कि पूरा सिंडिकेट भी चलाया.

हॉस्टल से गायब हुए बिवाल परिवार के बच्चे

हिंदुस्तान में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, बिवाल परिवार को लेकर हुए खुलासे के बाद जांच की आंच जैसे ही उनके बच्चों तक पहुंची, परिवार के कई सदस्य और छात्र अचानक अपने-अपने मेडिकल कॉलेज और हॉस्टल से गायब हो गए हैं. इस मामले ने परीक्षा प्रणाली की सुरक्षा और प्रामाणिकता पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.

12वीं में 55% और नीट में धमाका: विकास बिवाल की कहानी

सीबीआई की गिरफ्त में आए इस परिवार के एक छात्र विकास बिवाल का रिकॉर्ड सबसे ज्यादा हैरान करने वाला है. विकास का 12वीं कक्षा में शैक्षणिक रिकॉर्ड बेहद सामान्य था और उसने केवल 55 प्रतिशत अंक हासिल किए थे. लेकिन जब नीट का रिजल्ट आया तो उसने अचानक 86 प्रतिशत अंक हासिल कर सबको चौंका दिया और सवाई माधोपुर के सरकारी मेडिकल कॉलेज में सीट सुरक्षित कर ली.

मेडिकल कॉलेज में खुली पोल: 30% नंबर लाना भी भारी

नीट में असाधारण स्कोर करने वाले विकास की असलियत तब सामने आई, जब उसने मेडिकल कॉलेज में पढ़ाई शुरू की. कॉलेज प्रिंसिपल के मुताबिक, विकास पढ़ाई में बेहद कमजोर छात्र साबित हुआ और कॉलेज की इंटरनल परीक्षाओं में वह औसतन केवल 30 प्रतिशत अंक ही ला पाता था. पोल खुलने और चाचा की गिरफ्तारी के डर से विकास जनवरी महीने से ही बिना किसी सूचना के मेडिकल कॉलेज से गायब है.

टॉपर भतीजी पलक और बेटी प्रगति भी रडार पर

इस खेल में केवल विकास शामिल नहीं था. दिनेश बिवाल की भतीजी पलक ने नीट में 98.61 जैसे भारी-भरकम परसेंटाइल हासिल किए थे. उसे जयपुर का प्रतिष्ठित एसएमएस (SMS) मेडिकल कॉलेज मिला था. स्कूल में मेधावी रहने वाली पलक मेडिकल कॉलेज के टेस्ट में औसत छात्रा साबित हुई. अपने परिवार पर सीबीआई का शिकंजा कसते ही पलक भी अचानक हॉस्टल छोड़कर फरार हो गई है. इसी तरह मांगीलाल की बेटी प्रगति भी (नीट में 89% अंक) पिता की गिरफ्तारी वाले दिन से ही कॉलेज से छुट्टी पर चली गई है.

ग्रेस मार्क्स से पास होने वाले भी डॉक्टर बनने की रेस में!

इस परिवार का फर्जीवाड़ा यहीं नहीं रुका. इस साल नीट की परीक्षा में बैठने वाले परिवार के दो अन्य छात्र ऋषि और अमन का रिकॉर्ड तो और भी खराब है. इनमें से ऋषि ने अपनी 12वीं की परीक्षा बेहद मुश्किल से ग्रेस मार्क्स (कृपांक) के सहारे केवल 50% अंकों के साथ पास की थी. सीबीआई को अंदेशा है कि इन दोनों को भी परीक्षा पास कराने के लिए इसी शॉर्टकट और लीक पेपर का सहारा दिया जा रहा था.

कैसे काम करता था बिवाल परिवार का ‘पारिवारिक रैकेट’?

सीबीआई की जांच में यह बात साफ हो रही है कि दिनेश और मांगीलाल बिवाल केवल अपने बच्चों का भविष्य नहीं संवार रहे थे, बल्कि वे इस पेपर लीक नेटवर्क के मुख्य बिचौलिए थे. वे अन्य कमजोर और औसत छात्रों के अभिभावकों से संपर्क साधते थे और लाखों रुपये लेकर उन्हें परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र और सॉल्वर गैंग के कोड्स उपलब्ध कराते थे. जांच एजेंसियां अब इस परिवार के पुराने रिकॉर्ड और बैंक खातों को खंगाल रही हैं ताकि पता चल सके कि यह खेल कितने सालों से चल रहा था.



Source link

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top